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सरबजीत की बहन बोलीं, अब भाई से क्या बात करूंगी

Sun, 28 Apr 2013 01:17 AM IST
योगेश नारायण दीक्षित
योगेश नारायण दीक्षित Updated Sun, 28 Apr 2013 01:17 AM IST
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please save my brother sarabjit appeals dalbir kaur

जब से भाई सरबजीत ने लाहौर जेल में जान को खतरे का संदेश भेजा था, तब से मैं दिल्ली में मंत्रियों से लेकर पाक उच्चायोग तक वीजा के लिए चक्कर लगा रही हूं।

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अब जब वह कोट लखपत जेल में साजिश का शिकार होकर अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रहा है, तब पूरे परिवार को पाक जाने का वीजा मिल गया।

अब अस्पताल के बेड पर लेटे भाई से क्या बात करूंगी?’ यह कहना है सरबजीत की बहन दलबीर कौर का।

शुक्रवार रात जब से सरबजीत पर हमले और उसके अस्पताल में भर्ती होने की खबर आई, रो-रोकर दलबीर की तबियत बिगड़ चुकी है।

हमले को लेकर देश में उबाल: देखें फोटो
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शनिवार दोपहर दलबीर के दिल का गुबार उस समय निकल पड़ा जब विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने उन्हें फोन करके लाहौर जाने का वीजा मिलने की जानकारी दी।

अमृतसर में सरबजीत के परिवार के संग मौजूद दलबीर कौर ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि वह परिवार के साथ शनिवार शाम ही दिल्ली के लिए निकल रही हैं। परिवार रविवार सुबह लाहौर जाने के लिए पूरी कोशिश करेगा।
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उन्होंने कहा कि सुबह उनका बीपी बढ़ने और दिल की धड़कनें तेज होने पर डॉक्टर से दवाई लेनी पड़ी। लेकिन, वीजा मिलने से उन्हें थोड़ा राहत है कि परिवार वाले सरबजीत को देख सकेंगे।

सरबजीत की बड़ी बेटी स्वप्नदीप कौर ने कहा कि परिवार के एक सदस्य को पापा के साथ अस्पताल के अंदर रहने की अनुमति मिल गई है।

sarabjit singh













इससे उन्हें विश्वास है परिवार का हर सदस्य बारी-बारी से सरबजीत के साथ वक्त गुजार सकेगा। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उनके पापा को इलाज के लिए भारत लाया जाए।


वहीं सरबजीत की पत्नी गुमसुम है। कोई भी फोन आने पर बेटियों से पूछने लगती हैं क्या पति की हालत की नई खबर है।

अस्पताल प्रशासन नहीं दे रहा सही जानकारी
सरबजीत की रिहाई के लिए मुहिम चलाने वाले लाहौर के वकील ओवैश शेख ने शनिवार शाम फोन पर हुई बातचीत में ‘अमर उजाला’ को बताया कि जिन्ना अस्पताल में उनके मुवक्किल की हालत गंभीर है।

इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा है। उन्हें सरबजीत को देखने की अनुमति भी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की चुप्पी से सरबजीत की हालत को लेकर चिंता हो रही है।

इलाज के लिए भारत ले जाने दें
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री और मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने शनिवार सुबह राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को नई अपील भेजकर सरबजीत की फांसी की सजा माफ करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति माफ कर दें तो सरबजीत को इलाज के लिए भारत या कहीं और ले जाया जा सकता है। उसे 1990 में लाहौर और फैसलाबाद में हुए धमाकों में आरोपी मानकर 1991 में मौत की सजा दी गई थी। इस लिहाज से उम्रकैद की सजा वह कई बरस पहले पूरा कर चुका है।

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