{"_id":"60c74bf88ebc3ef79460ca76","slug":"teachers-of-union-protest-again-govt-for-their-demand-patiala-news-pkl4166049150","type":"story","status":"publish","title_hn":"---सीएम सिटी में एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों का संघर्ष जारी--- सरकार खिलाफ सड़कों पर उतरे, वाईपीएस चौक जाम करके दिया धरना रेग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
---सीएम सिटी में एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों का संघर्ष जारी--- सरकार खिलाफ सड़कों पर उतरे, वाईपीएस चौक जाम करके दिया धरना रेग
विज्ञापन
पटियाला। सीएम सिटी में गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब के नजदीक अपनी मांगों के लिए धरने पर बैठे एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों ने सोमवार को पंजाब सरकार के खिलाफ बाजारों से रोष मार्च निकाला। सभी ने वाईपीएस चौक में पहुंचकर चक्का जाम कर जोरदार धरना दिया। इस मौके एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों को रेगुलर करने की मांग की गई, जिसके पूरा न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
इस मौके एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापक यूनियन पंजाब के प्रदेश प्रधान राय साहिब सिंह सिद्धू, प्रदेश सचिव अनूपजीत सिंह, प्रदेश उप प्रधान नवनीत कुमार ने कहा कि एक तरफ पंजाब सरकार प्रदेश की शिक्षा को देश में पहले नंबर पर दिखा रही है। लेकिन जिन एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों की ओर से पिछले सात वर्षों से शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने में अहम योगदान डाला गया, उनका विभिन्न कंपनियों के हाथों आर्थिक व मानसिक शोषण कराया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में उनके 1910 अध्यापकों को 22 कंपनियों के तहत अधीन भरती किया गया। जिसके लिए कारपोरेट घरानों को सालाना अनुमानित छह करोड़ की राशि अदा की जाती है, लेकिन इन अध्यापकों को 17 हजार रुपये महीना सैलरी कहकर 11 हजार रुपये ही दिए जाते हैं। ऊपर से कोई मेडिकल छुट्टी लागू नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ताक पर रखकर महिला अध्यापकों को मैटरनिटी छुट्टी तक नहीं दी जाती है। यह अध्यापक स्टूडेंट्स को रोजगारोन्मुखी कोर्स कराके नौकरी लगाकर पंजाब सरकार के घर-घर नौकरी के आंकड़ों में इजाफा कर रहे हैं। उन्हीं को मामूली तनख्वाहों कारण मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। कैप्टन सरकार सरकारी स्कूलों में कारपोरेट घरानों के दखल से निजीकरण की तरफ कदम रख रही है, जिसे किसी कीमत होने नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मौके एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापक यूनियन पंजाब के प्रदेश प्रधान राय साहिब सिंह सिद्धू, प्रदेश सचिव अनूपजीत सिंह, प्रदेश उप प्रधान नवनीत कुमार ने कहा कि एक तरफ पंजाब सरकार प्रदेश की शिक्षा को देश में पहले नंबर पर दिखा रही है। लेकिन जिन एनएसक्यूएफ वोकेशनल अध्यापकों की ओर से पिछले सात वर्षों से शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने में अहम योगदान डाला गया, उनका विभिन्न कंपनियों के हाथों आर्थिक व मानसिक शोषण कराया जा रहा है।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग में उनके 1910 अध्यापकों को 22 कंपनियों के तहत अधीन भरती किया गया। जिसके लिए कारपोरेट घरानों को सालाना अनुमानित छह करोड़ की राशि अदा की जाती है, लेकिन इन अध्यापकों को 17 हजार रुपये महीना सैलरी कहकर 11 हजार रुपये ही दिए जाते हैं। ऊपर से कोई मेडिकल छुट्टी लागू नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ताक पर रखकर महिला अध्यापकों को मैटरनिटी छुट्टी तक नहीं दी जाती है। यह अध्यापक स्टूडेंट्स को रोजगारोन्मुखी कोर्स कराके नौकरी लगाकर पंजाब सरकार के घर-घर नौकरी के आंकड़ों में इजाफा कर रहे हैं। उन्हीं को मामूली तनख्वाहों कारण मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। कैप्टन सरकार सरकारी स्कूलों में कारपोरेट घरानों के दखल से निजीकरण की तरफ कदम रख रही है, जिसे किसी कीमत होने नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन