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काहलों ने पंचायत सचिवों के भरती स्कैंडल केस में पेशी से छूट ली
ब्यूरो,अमर उजाला/पटियाला
Updated Sat, 24 Sep 2016 04:28 PM IST
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पटियाला की सीबीआई अदालत में चल रहे पंचायत सचिवों के भरती स्कैंडल संबंधी केस की सुनवाई के दौरान मामले में नामजद पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर एवं पूर्व पंचायत मंत्री निर्मल सिंह काहलों ने पेशी से छूट हासिल की।
वकील सतनाम सिंह कलेर ने अदालत में काहलों का मेडिकल सर्टीफिकेट पेश किया। अदालत ने इसे मंजूर करते हुए काहलों को पेशी से छूट दे दी। शुक्रवार की सुनवाई दौरान केस में नामजद अन्य आरोपी पेश हुए और अदालत ने अगली सुनवाई 21 अक्तूबर तय की।
पिछली पेशी दौरान सीबीआई के जज एसएस मान की अदालत में विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव जेएस केसर और ज्वाइंट डायरेक्टर सीएल प्रेमी की ओर से उनको केस से डिस्चार्ज करने के आवेदन लगाए गए थे जिन पर अदालत में बहस की गई थी। शुक्रवार को इन आवेदनों पर फैसला आना था, लेकिन सुनवाई आगे डाल दी गई।
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यह मामला अकाली दल की 1997 से 2002 तक की सरकार के समय में पंचायत विभाग की ओर से 909 पंचायत सचिवों की भरती के साथ संबंधित है। उस समय निर्मल सिंह काहलों पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री थे। बाद में 2002 में कांग्रेस की सरकार आने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंचायत सचिवों की इस भरती में जांच कराई थी। जिसके तहत ही सीबीआई ने 14 जून 2002 को काहलों समेत तत्कालीन प्रमुख सचिव जेएस केसर, संयुक्त डायरेक्टर सीएल प्रेमी, विकास शर्मा व पीएस सोढी के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
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वकील सतनाम सिंह कलेर ने अदालत में काहलों का मेडिकल सर्टीफिकेट पेश किया। अदालत ने इसे मंजूर करते हुए काहलों को पेशी से छूट दे दी। शुक्रवार की सुनवाई दौरान केस में नामजद अन्य आरोपी पेश हुए और अदालत ने अगली सुनवाई 21 अक्तूबर तय की।
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पिछली पेशी दौरान सीबीआई के जज एसएस मान की अदालत में विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव जेएस केसर और ज्वाइंट डायरेक्टर सीएल प्रेमी की ओर से उनको केस से डिस्चार्ज करने के आवेदन लगाए गए थे जिन पर अदालत में बहस की गई थी। शुक्रवार को इन आवेदनों पर फैसला आना था, लेकिन सुनवाई आगे डाल दी गई।
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यह मामला अकाली दल की 1997 से 2002 तक की सरकार के समय में पंचायत विभाग की ओर से 909 पंचायत सचिवों की भरती के साथ संबंधित है। उस समय निर्मल सिंह काहलों पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री थे। बाद में 2002 में कांग्रेस की सरकार आने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंचायत सचिवों की इस भरती में जांच कराई थी। जिसके तहत ही सीबीआई ने 14 जून 2002 को काहलों समेत तत्कालीन प्रमुख सचिव जेएस केसर, संयुक्त डायरेक्टर सीएल प्रेमी, विकास शर्मा व पीएस सोढी के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।