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किसानों ने इस बार 785 करोड़ की डीएपी खाद बचाई: खेतीबाड़ी मंत्री
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 12 Sep 2016 03:17 PM IST
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पटियाला में किसान मेले के दौरान धान की फसल की जायजा लेते खेतीबाड़ी मंत्री जत्थेदार तोता सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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यंग फार्म्स एसोसिएशन की ओर से रखड़ा में आयोजित किसान मेले में खेतीबाड़ी मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने कहा कि इस बार साउनी के सीजन में पंजाब के किसानों ने 785 करोड़ की कीमत की डीएपी खाद की बचत की है।
उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 95 फीसदी किसानों ने धान की फसल में डीएपी खाद का इस्तेमाल नहीं किया है। केवल प्रति एकड़ दो थैले यूरिया इस्तेमाल करके खेती की है। इसका मतलब पंजाब का किसान अब खेती का लागत मूल्य कम कर रहा है और रासायनिक खाद का इस्तेमाल भी कम कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह सब कुछ खेतीबाड़ी विभाग की ओर से लगाए जा रहे किसान सिखलाई कैंपों के कारण ही संभव हो सका है क्योंकि विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि अगर हाड़ी की फसल में गेहूं को डीएपी खाद डाल दी जाती है तो साउनी की फसल में धान को डीएपी डालने की जरूरत ही नहीं है।
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उन्होंने कहा कि विदेशों में भारत की बासमती को नकारा जा रहा है। इसका कारण केंद्र की नीतियां हैं जो एमपी जैसे राज्यों को भी बासमती लगाने की इजाजत दे रही है। यह बात साफ है कि बढ़िया किस्म की बासमती केवल पंजाब व हरियाणा के खेतों में ही हो सकती है और यह केवल यहां ही लगनी चाहिए।
तोता सिंह ने केंद्र के वैज्ञानिकों के सामने मांग रखी कि पंजाब के किसान को धान की 201 किस्म को बदलदिया जाए ताकि किसान कम समय और कम पानी के साथ 40 क्विंटल धान हर एकड़ पर ले सकें। केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए तोता सिंह ने कहा कि आप धर्म विरोधी और केजरीवाल जैसे लोग किसी के नहीं होते हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 95 फीसदी किसानों ने धान की फसल में डीएपी खाद का इस्तेमाल नहीं किया है। केवल प्रति एकड़ दो थैले यूरिया इस्तेमाल करके खेती की है। इसका मतलब पंजाब का किसान अब खेती का लागत मूल्य कम कर रहा है और रासायनिक खाद का इस्तेमाल भी कम कर रहा है।
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उन्होंने आगे कहा कि यह सब कुछ खेतीबाड़ी विभाग की ओर से लगाए जा रहे किसान सिखलाई कैंपों के कारण ही संभव हो सका है क्योंकि विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि अगर हाड़ी की फसल में गेहूं को डीएपी खाद डाल दी जाती है तो साउनी की फसल में धान को डीएपी डालने की जरूरत ही नहीं है।
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उन्होंने कहा कि विदेशों में भारत की बासमती को नकारा जा रहा है। इसका कारण केंद्र की नीतियां हैं जो एमपी जैसे राज्यों को भी बासमती लगाने की इजाजत दे रही है। यह बात साफ है कि बढ़िया किस्म की बासमती केवल पंजाब व हरियाणा के खेतों में ही हो सकती है और यह केवल यहां ही लगनी चाहिए।
तोता सिंह ने केंद्र के वैज्ञानिकों के सामने मांग रखी कि पंजाब के किसान को धान की 201 किस्म को बदलदिया जाए ताकि किसान कम समय और कम पानी के साथ 40 क्विंटल धान हर एकड़ पर ले सकें। केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए तोता सिंह ने कहा कि आप धर्म विरोधी और केजरीवाल जैसे लोग किसी के नहीं होते हैं।