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हालात: पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांट एनजीटी ने बंद कराए बंद, बिजली समझौतों पर हंगामे के बाद भी प्राइवेट से ही हो रही सप्लाई

Thu, 09 Dec 2021 04:06 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 09 Dec 2021 04:06 PM IST
सार

गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट पूरी तरह से बंद है और राजपुरा प्लांट का एक यूनिट फिलहाल मरम्मत के लिए बंद किया हुआ है। वहीं पावरकॉम को हाइडल प्रोजेक्टों से 304 मेगावाट और सोलर व नान सोलर प्रोजेक्टों से 267 मेगावाट बिजली मिली।

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Punjab: Powercom purchase Electricity from private plants to meet the demand
electricity - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांट बंद करा दिए गए हैं। ऐसे में बिजली की मांग पूरा करने के लिए पावरकॉम को एक बार फिर से प्राइवेट प्लांटों का सहारा लेना पड़ा है। साथ ही बाहर से भी बिजली खरीदी जा रही है। जबकि पंजाब में चन्नी सरकार के सत्ता में आने के बाद पूर्व बादल सरकार के समय हुए इन प्राइवेट बिजली खरीद समझौतों को लेकर खास तौर से नवजोत सिंह सिद्धू ने खूब हंगामा बरपाया था। जिसके बाद इन समझौतों के खिलाफ सरकार ने विजिलेंस जांच शुरू करा दी है।

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दिल्ली में खतरनाक ढंग से बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 15 दिसंबर तक पंजाब के गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट रोपड़ और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरां मुहब्बत को बंद करा दिया है। जानकारी के मुताबिक तय मानकों के अनुसार दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में पड़ते थर्मल प्लांटों में कोयले की राख से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए फ्यूल गैस डिसल्फ्यूराइदेशन (एफजीडी) टैक्नोलाजी का लगा होना अनिवार्य है। पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों को आधुनिक टेक्नोलाजी के हिसाब से अपग्रेड तो किया जा चुका है पर अभी तक इनमें एफजीडी टेक्नोलाजी नहीं लगी है। 
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सरकारी थर्मलों के बंद होने के बाद अब पावरकॉम बिजली सप्लाई के लिए प्राइवेट प्लांटों पर निर्भर है और साथ ही बाहर से भी बिजली खरीदी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को दिन के समय पंजाब में बिजली की मांग 6660 मेगावाट दर्ज की गई। जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से 4500 मेगावाट के करीब बिजली ली, जबकि प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 1600 मेगावाट प्राप्त की। इनमें तलवंडी साबो के तीनों यूनिटों से 942 मेगावाट, राजपुरा प्लांट के एक यूनिट से 658 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। गौरतलब है कि गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट पूरी तरह से बंद है और राजपुरा प्लांट का एक यूनिट फिलहाल मरम्मत के लिए बंद किया हुआ है। वहीं पावरकॉम को हाइडल प्रोजेक्टों से 304 मेगावाट और सोलर व नान सोलर प्रोजेक्टों से 267 मेगावाट बिजली मिली।

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सरकारी थर्मलों को अपग्रेड करके ही घटाई जा सकेगी निर्भरता

पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजय पाल सिंह अटवाल ने माना कि एनजीटी के आदेश पर सरकारी थर्मल बंद हुए हैं। साथ ही कहा कि सरकारी थर्मल प्लांटों को अपग्रेड करके इनसे मिलने वाली बिजली सप्लाई में बढ़ोतरी करके ही प्राइवेट प्लांटों पर निर्भरता घटाई जा सकती है। इसी से उपभोक्ताओं को भी वाजिब दामों पर बिजली मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि बंद किए बठिंडा थर्मल प्लांट और रोपड़ के बंद किए दोनों यूनिटों को भी दोबारा चलाया जाए। पर्यावरण संबंधी मुद्दे और बिजली सप्लाई इन दोनों क्षेत्रों में एक संतुलन बनाए जाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न हो।

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