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Hindi News ›   Punjab ›   Patiala News ›   First listen to problems, not decrease the number of pilgrims

पहले सुन लेते समस्याएं तो न घटती श्रद्धालुओं की संख्या

Tue, 07 Jul 2015 09:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Tue, 07 Jul 2015 09:45 PM IST
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श्रीनगर में भंडारा संचालकों के साथ जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह व भाजपा के पंजाब प्रदेश प्रधान कमल शर्मा के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मंशा की नजर से देखा जा रहा है। भंडारे वालों का आरोप है कि इन्हीं नेताओं की लापरवाही के चलते 2015 की अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है।
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भंडारे वालों को तमाम मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। यही नहीं, पिछले तीन साल से केंद्र सरकार ने भंडारे वालों को खानपान की वस्तुओं पर मिलने वाली सब्सिडी बंद की हुई है उसे भी भाजपा सरकार बहाल नहीं कर पाई है।
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यात्रा शुरू होने से पहले श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के सदस्य तमाम मुश्किलों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले थे, लेकिन उनकी बात सुनने की बजाए कहा कि डाक्टर (डा. निर्मल सिंह) के पास चले जाओ।
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यदि उस समय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, डा. निर्मल सिंह और कमल शर्मा भंडारे वालों की समस्याओं पर ध्यान देते तो इस यात्रा में सात लाख से भी अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बनने वाले बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकते थे।

भंडारेवालों का कहना है कि श्राइन बोर्ड का गठन इसलिए किया गया था कि जम्मू-कश्मीर स्थित हिंदू धार्मिक स्थलों की देख-रेख करे। धार्मिक स्थलों पर भंडारे लगाने वालों की समस्या का हल करे। लेकिन बोर्ड ऐसे धार्मिक स्थलों पर जम्मू-कश्मीर के लोकल लोगों को रोजगार मुहैया कराने का कार्य करने लगा है, जबकि ये काम राज्य सरकार का है।

अमरनाथ यात्रा में भंडारे वालों की लोकेशन बदल दी और कई शर्तें भंडारे वालों पर थोप दी। जबकि वहां लोकल लोगों ने निमयों को ताक पर रख कर दुकानें खोली हैं। भंडारे से अधिक दुकानें लगी है। इससे साबित हो रहा है कि श्राइन बोर्ड भंडारे कम करने में लगी हुई है।

इस बार तो श्रद्धालुओं की पंजीकरण और मेडिकल सर्टिफिकेट की प्रक्रिया बहुत कठिन कर दी, जिस कारण सिर्फ दो लाख लोगों ने पंजीकरण करवाया है। जबकि 2015 की अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या छह लाख से भी अधिक होनी थी।

उधर, आर्गेनाइजेशन के महासचिव राजन गुप्ता ने बताया कि पंजतरणी से पवित्र गुफा तक घोड़े का रेट 2200 रुपये और पालकी का रेट नौ हजार रुपये रखा है, ऐसा कर श्राइन बोर्ड व वहां का जिला प्रशासन श्रद्धालुओं के साथ लूट खसोट कर रहा है। एक सवाल के जवाब में गुप्ता ने कहा कि यात्रा शुरू होने से पहले श्राइन बोर्ड ने कई बातें आर्गेनाइजेशन से छिपाकर रखी थीं।


श्राइन बोर्ड की इस हरकत से चंदनवाड़ी और बालटाल में भंडारे लगाने वाले संचालकों को तमाम मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। यात्रा शुरू होने से पहले तमाम समस्याएं लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिले थे लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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