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केंद्र से टकराव नहीं चाहते किसान, पैदल शंभू बार्डर की तरफ करेंगे मार्च : डल्लेवाल

Wed, 20 Nov 2024 02:27 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:27 AM IST
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Farmers do not want conflict with the Centre, will march on foot towards Shambhu border - Dallewal
किसान नेता कहा, बाद में जरूरत के मुताबिक आगे का फैसला लिया जाएगा
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बाॅर्डर पर चल रहे मोर्चों को किया जाएगा मजबूत, गांवों में बैठकें आज से
किसानों के साथ महिलाओं से बॉर्डरों पर पहुंचने की अपील की जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने साफ किया कि केंद्र से किसी प्रकार का टकराव किसान नहीं चाहते हैं। इसलिए अगर केंद्र नहीं चाहता है कि किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ दिल्ली जाएं, तो शांतिमय पैदल ही शंभू बार्डर की तरफ मार्च किया जाएगा। अमर उजाला से बात करते डल्लेवाल ने कहा कि फैसला लिया गया है कि छह दिसंबर को 51 सदस्यीय जत्था शंभू बार्डर की तरफ पैदल मार्च करेगा, जिसमें बार्डरों पर आंदोलनरत जत्थेबंदियों में से हरेक के तीन से चार किसान नेता भी शामिल रहेंगे। बाद में जरूरत के मुताबिक फैसला लिया जाएगा कि अगर किसान दिल्ली पहुंच जाते हैं तो वहां लंगर-पानी की व्यवस्था और सोने व ठहरने का प्रबंध कैसे किया जाएगा लेकिन फिलहाल किसानों की पहली प्राथमिकता दिल्ली पहुंचकर केंद्र से अपनी मांगें मनवाना है। गौरतलब है कि अब तक किसान बिना ट्रैक्टर-ट्राली के दिल्ली न जाने पर अड़े थे। डल्लेवाल ने कहा कि अगले संघर्ष के कायर्क्रम का एलान होने के बाद अब शंभू व खनौरी बार्डर पर चले रहे मोर्चों को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत गांव-गांव बैठकें कर किसानों के साथ-साथ महिलाओं से बड़ी संख्या में बार्डर पर पहुंचने की अपील की जाएगी। इसके लिए बुधवार से बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। डल्लेवाल ने कहा कि इस समय किसान गेहूं की बिजाई में व्यस्त हैं, इसलिए जत्थेबंदियों की अपील रहेगी कि महिलाएं इस कमी को पूरा करें और ज्यादा से ज्यादा संख्या में मोर्चों में पहुंचें।

डल्लेवाल ने कहा कि जमीन के नीचे पानी के गिरते स्तर व पराली जलाने से फैल रहे प्रदूषण को लेकर लगातार किसानों को बदनाम किया जा रहा है। इस समस्या का हल केंद्र की ओर से किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने से हो सकेगा। अगर ऐसा हो गया तो किसान धान व गेहूं नहीं लगाएंगे और फिर न ज्यादा पानी का इस्तेमाल होगा और न ही पराली जलाई जाएगी। बिजली का इस्तेमाल भी कम होगा। डल्लेवाल ने कहा कि भारत हर साल बाहर से करीब पौने दो लाख करोड़ का खाद्य तेल व दालें मंगवाता है। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी मिलने से यहीं पर मूंगफली, सरसों के साथ-साथ दालों की खेती कर सकेंगे। जिससे सरकार के लाखों करोड़ की बचत होगी। डल्लेवाल ने सभी वर्गों से संकट की इस घड़ी में केंद्र के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह 26 नवंबर से खनौरी बार्डर पर आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं। इस दौरान उनको कुछ नुकसान होता है तो जिम्मेदारी केंद्र सरकार होगी।
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