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आर्थिक तंगी से किसान और मजदूर ने फंदा लगाया
ब्यूरो/अमर उजाला, संगरूर
Updated Fri, 12 Jun 2015 10:28 PM IST
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आर्थिक तंगी के चलते पंजाब में किसानों व मजदूरों द्वारा आत्महत्या करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांव छाजली के किसान व गांव गोबिंदगढ़ जेजियां के खेत मजदूर ने आर्थिक तंगी के चलते अपने घरों में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस ने दोनों मामलों में पोस्टमार्टम के बाद लाशें परिजनों को सौंप दी हैं।
दोनों मामलों को इलाके में सक्रिय चिट फंड कंपनियों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि भाकियू एकता उग्राहां ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं।
छाजली के 35 वर्षीय किसान हरविंदर दास के पास दो एकड़ जमीन थी। खेती में लगातार घाटा होने से वह परेशान था। बताया जाता है कि उसके सिर पर सात लाख का कर्ज था।
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कर्ज से परेशान हरविंदर को गेहूं के सीजन से उम्मीद थी, लेकिन बढ़िया झाड़ प्राप्त नहीं हुआ। वीरवार की रात को उसने घर में छत से फंदा लगाकर जान दे दी। वह अपने पीछे पत्नी व दो बेटियों को छोड़ गया।
वहीं, दूसरे मामले में गांव गोबिंदगढ़ के 25 वर्षीय सतगुर सिंह ने भी आर्थिक तंगी के कारण घर में फंदा लगाकर जान दे दी। आर्थिक तंगी के कारण वह दो वक्त की रोटी तक जुटा नहीं पा रहा था
।
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला उपाध्यक्ष दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों ने देश का पेट भरने वाले किसानों का यह हाल किया है।
केंद्र की मोदी सरकार व पंजाब की अकाली भाजपा सरकार, साफ तौर पर किसान विरोधी है। उन्होंने पीड़ितों के परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा व सरकारी नौकरी देने की मांग की।
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दोनों मामलों को इलाके में सक्रिय चिट फंड कंपनियों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि भाकियू एकता उग्राहां ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं।
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छाजली के 35 वर्षीय किसान हरविंदर दास के पास दो एकड़ जमीन थी। खेती में लगातार घाटा होने से वह परेशान था। बताया जाता है कि उसके सिर पर सात लाख का कर्ज था।
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कर्ज से परेशान हरविंदर को गेहूं के सीजन से उम्मीद थी, लेकिन बढ़िया झाड़ प्राप्त नहीं हुआ। वीरवार की रात को उसने घर में छत से फंदा लगाकर जान दे दी। वह अपने पीछे पत्नी व दो बेटियों को छोड़ गया।
वहीं, दूसरे मामले में गांव गोबिंदगढ़ के 25 वर्षीय सतगुर सिंह ने भी आर्थिक तंगी के कारण घर में फंदा लगाकर जान दे दी। आर्थिक तंगी के कारण वह दो वक्त की रोटी तक जुटा नहीं पा रहा था
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भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला उपाध्यक्ष दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों ने देश का पेट भरने वाले किसानों का यह हाल किया है।
केंद्र की मोदी सरकार व पंजाब की अकाली भाजपा सरकार, साफ तौर पर किसान विरोधी है। उन्होंने पीड़ितों के परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा व सरकारी नौकरी देने की मांग की।