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सुप्रीमकोर्ट की बनाई कमेटी पर भरोसा नहींः किसान नेता
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पटियाला। कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीमकोर्ट के मंगलवार को आए फैसले पर किसान नेताओँ ने साफ कर दिया है कि यह तो केंद्र सरकार व किसानों के बीच का मसला है। केंद्र ने यह कानून पास कराए हैं, इसलिए वह ही इन कानूनों को रद्द करे। साथ ही किसानों ने एक बार फिर चेताया कि उनको खेती कानून रद्द करने से कम कुछ मंजूर नहीं है। जब तक यह कानून रद नहीं होंगे, किसान दिल्ली के बार्डरों पर धरने से नहीं हटेंगे।
भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी जिला पटियाला के प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि खेती कानूनों को मोदी सरकार को रद्दद करना ही पड़ेगा। किसान आंदोलन का यही एकमात्र मकसद है। इससे कम पर किसान नहीं मानेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से खेती कानूनों के मुद्दे पर बनाई कमेटी में किसानों को भरोसा नहीं है।
वहीं किसान नेता सतवंत सिंह वजीदपुर ने कहा कि अदालतें कानून की व्याख्या करने के लिए होती हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किसानों व केंद्र सरकार के बीच में न आए। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को मामले में आगे आकर जवाब देना चाहिए। किसान गुरदीप सिंह ने कहा कि किसानों पर केंद्र सरकार इन कानूनों जरिये कारपोरेट घरानों की मनमानियां थोपना चाह रही है। ऐसा नहीं होने देंगे। सुप्रीमकोर्ट जो भी कहे, लेकिन किसान इन कानूनों को रद्द कराने के अलावा और किसी बात पर नहीं मानेंगे।
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भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी जिला पटियाला के प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि खेती कानूनों को मोदी सरकार को रद्दद करना ही पड़ेगा। किसान आंदोलन का यही एकमात्र मकसद है। इससे कम पर किसान नहीं मानेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से खेती कानूनों के मुद्दे पर बनाई कमेटी में किसानों को भरोसा नहीं है।
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वहीं किसान नेता सतवंत सिंह वजीदपुर ने कहा कि अदालतें कानून की व्याख्या करने के लिए होती हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किसानों व केंद्र सरकार के बीच में न आए। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को मामले में आगे आकर जवाब देना चाहिए। किसान गुरदीप सिंह ने कहा कि किसानों पर केंद्र सरकार इन कानूनों जरिये कारपोरेट घरानों की मनमानियां थोपना चाह रही है। ऐसा नहीं होने देंगे। सुप्रीमकोर्ट जो भी कहे, लेकिन किसान इन कानूनों को रद्द कराने के अलावा और किसी बात पर नहीं मानेंगे।
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