{"_id":"605cc90a8ebc3e8c911c8235","slug":"built-electric-rail-engine-for-goods-train-for-the-first-time-132-ton-rail-engine-was-sent-to-east-central-railway-gomoh-patiala-news-pkl4083560142","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बार मालगाड़ी के लिए विद्युत रेल इंजन का निर्माण किया, 132 टन का यह रेल इंजन ईस्ट सेंट्रल रेलवे गोमोह भेजा गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बार मालगाड़ी के लिए विद्युत रेल इंजन का निर्माण किया, 132 टन का यह रेल इंजन ईस्ट सेंट्रल रेलवे गोमोह भेजा गया
विज्ञापन
पटियाला। केंद्र के मेक इन इंडिया के सपने को साकार करते हुए पटियाला स्थित डीजल रेल इंजन आधुनिकीकरण कारखाना (डीएमडब्ल्यू) ने पहली बार मालगाड़ी के लिए अत्याधुनिक नवीनतम तकनीक के कंप्यूटर नियंत्रित इलेक्ट्रिक रेल इंजन का निर्माण किया है। 6000 हार्स पावर वाले तीन फेस फ्रेट डब्ल्यूएजी-9 एचसी रेल इंजन नंबर 41501 को निर्मित कर पूर्व मध्य रेलवे गोमोह को भेजा गया है। गौरतलब है कि पटियाला डीएमडब्लयू ने अब तक डीजल इंजन या फिर सवारी गाड़ियों के लिए इलेक्ट्रिक रेल इंजन ही तैयार किए हैं।
खास बात है कि 3-फेस विद्युत रेल इंजन का निर्माण कर्षण ऊर्जा लागत को बचाने की दिशा में प्रमुख कदम है। साथ ही यह कार्बन उत्सर्जन में भी कटौती करता है। क्योंकि ऐसे रेल इंजन अधिक ऊर्जा कुशल होते हैं और ब्रेक लगाते हुए गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं और विद्युत ऊर्जा प्राप्त करते हैं और इसे रेलवे ओवर हेड इक्वीपमेंट (ओएचई) नेटवर्क को वापस भेजते हैं। जिससे अन्य आसपास के विद्युत रेल इंजनों को रेलवे नेटवर्क की सहायता से बिजली प्रदान की जाती है।
इस रेल इंजन का वजन 132 टन है। यह इंजन 6500 टन तक का वजन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ले जाने में सक्षम है। चालक दल के केबिन पूरी तरह से वातानुकूलित हैं। ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए इन इंजनों का उपयोग बहु परिचालन में भी किया जा सकता है, जहां दो बहु लोको यूनिट होती हैं।
विज्ञापन
यह रेल इंजन साढ़े 9 करोड़ से करीब 20 दिनों में तैयार किया गया है। रेल इंजन को बनाते वक्त कोविड गाइडलाइंस का भी पालन किया गया। जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने पटियाला डीएमडब्ल्यू को 100 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाने का काम सौंपा है, जिसमें से यह पहला तैयार किया गया है। बाकी का निर्माण भी जल्द शुरू किया जाएगा। एसएन दुबे, प्रमुख मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डीएमडब्ल्यू पटियाला ने कार्य स्थल पर कोविड -19 के चुनौतीपूर्ण परिदृश्य के बावजूद इस नए रेल इंजन के निर्माण के लिए डीएमडब्ल्यू के कर्मचारियों, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों के प्रयास की सराहना की है।
विज्ञापन
खास बात है कि 3-फेस विद्युत रेल इंजन का निर्माण कर्षण ऊर्जा लागत को बचाने की दिशा में प्रमुख कदम है। साथ ही यह कार्बन उत्सर्जन में भी कटौती करता है। क्योंकि ऐसे रेल इंजन अधिक ऊर्जा कुशल होते हैं और ब्रेक लगाते हुए गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं और विद्युत ऊर्जा प्राप्त करते हैं और इसे रेलवे ओवर हेड इक्वीपमेंट (ओएचई) नेटवर्क को वापस भेजते हैं। जिससे अन्य आसपास के विद्युत रेल इंजनों को रेलवे नेटवर्क की सहायता से बिजली प्रदान की जाती है।
विज्ञापन
इस रेल इंजन का वजन 132 टन है। यह इंजन 6500 टन तक का वजन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ले जाने में सक्षम है। चालक दल के केबिन पूरी तरह से वातानुकूलित हैं। ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए इन इंजनों का उपयोग बहु परिचालन में भी किया जा सकता है, जहां दो बहु लोको यूनिट होती हैं।
विज्ञापन
यह रेल इंजन साढ़े 9 करोड़ से करीब 20 दिनों में तैयार किया गया है। रेल इंजन को बनाते वक्त कोविड गाइडलाइंस का भी पालन किया गया। जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने पटियाला डीएमडब्ल्यू को 100 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाने का काम सौंपा है, जिसमें से यह पहला तैयार किया गया है। बाकी का निर्माण भी जल्द शुरू किया जाएगा। एसएन दुबे, प्रमुख मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डीएमडब्ल्यू पटियाला ने कार्य स्थल पर कोविड -19 के चुनौतीपूर्ण परिदृश्य के बावजूद इस नए रेल इंजन के निर्माण के लिए डीएमडब्ल्यू के कर्मचारियों, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों के प्रयास की सराहना की है।