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पीयू में नाटक का मंचन
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:28 PM IST
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नाटक मौत दी टीसी ने दर्शकों को झकझोरा
पीयू में तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के थियेटर एंड टेलीविजन विभाग और रूपक कला व वेलफेयर सोसाइटी की ओर से विश्व थियेटर दिवस के मौके पर विश्वविद्यालय के कला भवन में तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। उद्घाटन वीसी डा. बीएस घुम्मन ने किया। फेस्टिवल संगीता गुप्ता की ओर से निर्देशित कोनकनी नाटक मौत दी टीसी की पेशकारी के साथ शुरू हुआ। नाटक में एक पूरी तरह से निराश लड़के की कहानी दर्शाई गई है। यह लड़का एक अखबार में दिए विज्ञापन जरिये एक व्यक्ति के संपर्क में आता है, जो दुनिया की हरेक समस्या को हल करने का दावा करता है। लड़का उस व्यक्ति को मिलकर अपनी सारी मुसीबतें सांझी करता है।
यह व्यक्ति उस लड़के को सारी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सुसाइड करने की सलाह देता है। लड़का पहली बार तो इससे असहमत हो जाता है। बाद में उसकी सलाह मानने का यकीन दिलाता है। यह नाटक उन नौजवानों को संबोधित है, जो मुसीबतों का सामना करने की बजाय हौसला हार बैठते हैं। पांडुलिक नायक की ओर लिखे गए इस नाटक का अनुवाद आत्मजीत ने किया है। नाटक में विनोद कुमार, सरवेश, रितिका, गगनदीप और विजय के अभियन ने काफी प्रभावित किया।
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पीयू में तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के थियेटर एंड टेलीविजन विभाग और रूपक कला व वेलफेयर सोसाइटी की ओर से विश्व थियेटर दिवस के मौके पर विश्वविद्यालय के कला भवन में तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। उद्घाटन वीसी डा. बीएस घुम्मन ने किया। फेस्टिवल संगीता गुप्ता की ओर से निर्देशित कोनकनी नाटक मौत दी टीसी की पेशकारी के साथ शुरू हुआ। नाटक में एक पूरी तरह से निराश लड़के की कहानी दर्शाई गई है। यह लड़का एक अखबार में दिए विज्ञापन जरिये एक व्यक्ति के संपर्क में आता है, जो दुनिया की हरेक समस्या को हल करने का दावा करता है। लड़का उस व्यक्ति को मिलकर अपनी सारी मुसीबतें सांझी करता है।
यह व्यक्ति उस लड़के को सारी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सुसाइड करने की सलाह देता है। लड़का पहली बार तो इससे असहमत हो जाता है। बाद में उसकी सलाह मानने का यकीन दिलाता है। यह नाटक उन नौजवानों को संबोधित है, जो मुसीबतों का सामना करने की बजाय हौसला हार बैठते हैं। पांडुलिक नायक की ओर लिखे गए इस नाटक का अनुवाद आत्मजीत ने किया है। नाटक में विनोद कुमार, सरवेश, रितिका, गगनदीप और विजय के अभियन ने काफी प्रभावित किया।
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