पंजाब कांग्रेस: अब टीम सिद्धू अपनी नाक कितना झुकाएगी? आलाकमान का प्रभारी को भरोसे में लेने का संदेश साफ है
पंजाब के प्रभारी महासचिव हरीश रावत को भी पंजाब में सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है। वह भी कुछ मुद्दों का समाधान चाहते हैं। हरीश रावत चंडीगढ़ प्रवास पर थे और उनका इरादा पार्टी तथा सरकार के बीच में कामकाजी सामंजस्य बनाना था। लेकिन अब बात उनके भी दायरे से बाहर जा रही है...
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पंजाब के कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की टीम ने सिर मुड़ाते ही ओले गिराने शुरू कर दिए हैं। टीम के कामकाज की शैली से अब शीर्ष नेता भी चिंतित नजर आ रहे हैं। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और राहुल गांधी की टीम में शामिल वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि दो पावर सेंटर राज्य के लिए ठीक नहीं। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता वहां पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर काफी चिंतित हैं। नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर अपना मुद्दा लेकर दिल्ली आए थे। वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन भेंट नहीं हो पाई। पिछली बार भी प्रियंका गांधी वाड्रा के हस्तक्षेप के बाद ही नवजोत को राहत मिली थी। कांग्रेस का प्रधान बनने का रास्ता तय हो पाया था। लेकिन अब सिद्धू के लिए यह एक संदेश की तरह हैं कि वह राज्य के प्रभारी को विश्वास में लें।
पंजाब में मर्ज का इलाज जरूरी
पंजाब के प्रभारी महासचिव हरीश रावत को भी पंजाब में सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है। वह भी कुछ मुद्दों का समाधान चाहते हैं। हरीश रावत चंडीगढ़ प्रवास पर थे और उनका इरादा पार्टी तथा सरकार के बीच में कामकाजी सामंजस्य बनाना था। लेकिन अब बात उनके भी दायरे से बाहर जा रही है। कैप्टन से नाराज जो नेता हरीश रावत से मिलने देहरादून गए थे, उन्होंने भी चंडीगढ़ में रावत ने मिलने से परहेज किया। कैप्टन सरकार के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा को पंजाब में नया मुख्यमंत्री चाहिए। वह कैप्टन को बदलने की मांग पर अड़े हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा के भी तेवर अभी बने हुए हैं। पंजाब के पूर्व कांग्रेस प्रभारी का कहना है कि यह स्थितियां नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस प्रधान बनाए जाने के कारण खड़ी हुई हैं। इससे पार्टी के भीतर दो पावर सेंटर बनने का संकेत गया। इसके साथ-साथ कांग्रेस प्रधान ने अति उत्साह में कई अटपटी पहल भी कर दी है।
बनी बनाई छवि बिगड़ रही है, आम आदमी पार्टी को फायदा
पार्टी के पंजाब से सांसद कहते हैं कि इस मसले पर वह पार्टी फोरम पर अपनी बात रखेंगे। पंजाब की स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उन्होंने पत्र भी लिखा है। इसलिए उनका बोलना ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व को पहल करके पंजाब में सबकुछ ठीक करना चाहिए। अमर उजाला से बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि किसान आंदोलन की शुरुआत से ही मोंगा, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, होशियारपुर, गुरुदासपुर समेत हर जगह शिरोमणि अकाली दल (बादल) का लोग विरोध कर रहे हैं। भाजपा नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पंचायत के चुनावों ने भी कांग्रेस की स्थिति को बयां कर दिया है, लेकिन अब जो हो रहा है, उसे अच्छा नहीं कहा जा सकता। इससे चुनाव नजदीक आने तक आम आदमी पार्टी को फायदा होने लगेगा।
सिद्धू या कैप्टन के बीच में किसकी नीची होगी नाक?
कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू जहां जल्दबाजी भरा कदम उठा रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सोचे, समझे तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। कैप्टन ने एक बार फिर खुद को चंडीगढ़ और पंजाब तक सीमित कर लिया है। उनके सचिवालय के सूत्र की मानें तो वह हर रोज पहले की तरह लोगों से मेल मुलाकात कर रहे हैं।
कांग्रेस के नेता बलविंदर सिंह संधू कहते हैं कि कैप्टन ने हमेशा से पंजाब में अपने मिजाज की राजनीति की है। हाल में जलियांवाला बाग पर अपने सधे बयान के जरिए कैप्टन ने मंशा भी जता दी है। बलविंदर सिंह कहते हैं कि पार्टी दो स्थितियों में फंसी है। कैप्टन नहीं चाहते थे कि सिद्धू की इस तरह से ताजपोशी हो। आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद यह तो अब बीती बात है। अब सिद्धू अपनी राजनीति कर रहे हैं और कैप्टन अकड़ दिखा रहे हैं। बलविंदर सिंह को नहीं लगता कि कैप्टन नाक नीची करेंगे।