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मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भी जीरकपुर को नहीं मिला कजौली वाटर वर्क्स से पानी
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जीरकपुर। 2012 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की मौखिक घोषणा के बाद कजौली वॉटर वर्क्स से पानी लाने की कवायद शुरू हुई थी। बाकायदा इसके लिए साल 2015 में मत भी डाला गया, लेकिन यह परियोजना रफ्तार नहीं पकड़ पाई और दस साल बाद भी स्थानीय लोगों को नहरी पानी नहीं मिल पाया। जबकि इसके लिए हलका विधायक एनके शर्मा ने 50 करोड़ रुपये की एफडी भी करवा रखी है। इसके लिए फंड की कमी भी नहीं है। बावजूद यह परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। क्योंकि इस पर राजनीति आज भी कुंडली मारकर बैठी है। इसका नतीजा लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं, क्योंकि राजनीतिक पार्टियों के लिए यह परियोजना सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गई है। इसको धरातल पर लाने के लिए कभी कागजों से बाहर धरातल पर काम ही नहीं हुआ। यह बेहतर उदाहरण है।
हाउस की बैठक के दौरान पक्ष और विपक्ष से बातचीज
अप्रैल, 2021 में हुए पहले हाउस की बैठक के दौरान एक ओर जहां कजौली वॉटर वर्क्स के प्रस्ताव को पटल पर नगर परिषद प्रधान उदयवीर ढिल्लों ने पेश किया था, वहीं शिअद के वार्ड-20 से पार्षद तेजिंदर सिंह तेजी सिद्धू ने सवाल खड़े कर दिए थे। पार्षद ने कहा था कि यह प्रस्ताव हमारे शासनकाल के दौरान 2019 में पारित किया जा चुका है और जानबूझकर कांग्रेस सरकार ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने दी।
इसके जवाब में प्रधान उदयवीर ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि जून, 2019 में पारित प्रस्ताव को उनकी कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन एस्टिमेट की कार्रवाई को आगे बढ़ाने की तरफ ध्यान नहीं दिया और प्रस्ताव की समय सीमा एक वर्ष थी, जो जून, 2020 में खत्म हो गई।
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वहीं, मार्च, 2020 के अंदर हाउस की समय सीमा खत्म होने से पहले एक बार दोबारा कजौली वाटर वर्क्स को लेकर प्रस्ताव पारित करके जरूर सरकार के पास भेजा गया, लेकिन उसकी समय सीमा कोविड काल के चलते खत्म हो गई।
चार-पांच साल फिर इंतजार, विधानसभा चुनाव में भी मुद्दे को भुनाएंगे नेता
अब कजौली वाटर वर्क्स से जीरकपुर को पानी देने के लिए विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद इसमें कागजी कार्रवाई अमल में लायी जाएगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो इसमें अभी चार-पांच साल का समय और लग सकता है। तब तक नेता इस मुद्दे को विधान सभा चुनाव-2022 में भी भुनाने में कामयाब हो जाएंगे। मतलब आने वाले पांच साल तक जीरकपुर, ढकोली, पीरमुछल्ला और बलटाना के लोगों को ट्यूबवेल्स के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा, सीएम से आश्वासन भी मिला, पर लोगों को नहीं मिला नहरी पानी : विधायक एनके शर्मा
इस परियोजना संबंधी हलका विधायक एनके शर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले विधानसभा में कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने का मुद्दा उठा चुका हूं। इस पर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्वासन भी दिया था, लेकिन जीरकपुर के लोगों को नहरी पानी नहीं मिल पाया। वहां बोलकर भी आया था कि 50 करोड़ रुपये की एफडी है, फंड की कमी नहीं है और बस मंजूरी ही चाहिए। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई।
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हाउस की बैठक के दौरान पक्ष और विपक्ष से बातचीज
अप्रैल, 2021 में हुए पहले हाउस की बैठक के दौरान एक ओर जहां कजौली वॉटर वर्क्स के प्रस्ताव को पटल पर नगर परिषद प्रधान उदयवीर ढिल्लों ने पेश किया था, वहीं शिअद के वार्ड-20 से पार्षद तेजिंदर सिंह तेजी सिद्धू ने सवाल खड़े कर दिए थे। पार्षद ने कहा था कि यह प्रस्ताव हमारे शासनकाल के दौरान 2019 में पारित किया जा चुका है और जानबूझकर कांग्रेस सरकार ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने दी।
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इसके जवाब में प्रधान उदयवीर ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि जून, 2019 में पारित प्रस्ताव को उनकी कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन एस्टिमेट की कार्रवाई को आगे बढ़ाने की तरफ ध्यान नहीं दिया और प्रस्ताव की समय सीमा एक वर्ष थी, जो जून, 2020 में खत्म हो गई।
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वहीं, मार्च, 2020 के अंदर हाउस की समय सीमा खत्म होने से पहले एक बार दोबारा कजौली वाटर वर्क्स को लेकर प्रस्ताव पारित करके जरूर सरकार के पास भेजा गया, लेकिन उसकी समय सीमा कोविड काल के चलते खत्म हो गई।
चार-पांच साल फिर इंतजार, विधानसभा चुनाव में भी मुद्दे को भुनाएंगे नेता
अब कजौली वाटर वर्क्स से जीरकपुर को पानी देने के लिए विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद इसमें कागजी कार्रवाई अमल में लायी जाएगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो इसमें अभी चार-पांच साल का समय और लग सकता है। तब तक नेता इस मुद्दे को विधान सभा चुनाव-2022 में भी भुनाने में कामयाब हो जाएंगे। मतलब आने वाले पांच साल तक जीरकपुर, ढकोली, पीरमुछल्ला और बलटाना के लोगों को ट्यूबवेल्स के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा, सीएम से आश्वासन भी मिला, पर लोगों को नहीं मिला नहरी पानी : विधायक एनके शर्मा
इस परियोजना संबंधी हलका विधायक एनके शर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले विधानसभा में कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने का मुद्दा उठा चुका हूं। इस पर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्वासन भी दिया था, लेकिन जीरकपुर के लोगों को नहरी पानी नहीं मिल पाया। वहां बोलकर भी आया था कि 50 करोड़ रुपये की एफडी है, फंड की कमी नहीं है और बस मंजूरी ही चाहिए। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई।