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Mohali News: यशमीत सोढी के अभिनय ने जीवंत किया श्रवण का चरित्र, दर्शकों की आंखें हुईं नम
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मोहाली। संतान हो तो श्रवण जैसी- यह कहना था उन दर्शकों का जो सोमवार रात फेज-1 स्थित रामलीला मैदान में श्रवण कुमार प्रसंग देखकर भावुक हो उठे। श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी की रामलीला की दूसरी रात्रि ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराया। रतन ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर सुंदर लाल अग्रवाल ने मां दुर्गा की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। फ्रेंड्स क्लब के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। श्रवण कुमार की भूमिका में यशमीत सोढी ने प्रभावी अभिनय किया। संदीप राणा और शिवानी ने श्रवण के माता-पिता की भूमिका निभाकर दर्शकों की भावनाओं को छू लिया।
राजा दशरथ का श्राप- रात का सबसे मार्मिक पल
जब अमरिंदर मान ने राजा दशरथ की भूमिका में श्रवण के वध के बाद माता-पिता के श्राप को सुना, तो पूरा पंडाल स्तब्ध था। इस दृश्य ने दर्शकों को यह एहसास दिलाया कि किस प्रकार एक अनजाने में किया गया कर्म जीवनभर का दुख दे जाता है। कमेटी के प्रधान आशु सूद ने बताया कि आने वाले दिनों में राम जन्म और ताड़का वध जैसे प्रमुख प्रसंग दिखाए जाएंगे। रामलीला हमारी संस्कृति और जीवन मूल्यों का उत्सव है। इस दौरान मोनू (सुमंत), आयुष शर्मा (गुरु वशिष्ठ) और रोहित, मोनू, आर्यन, आनंद व रंजीत अरमानी (मंत्रियों की भूमिका) ने अपने अभिनय से पूरे मंचन को यादगार बना दिया। दर्शकों की तालियों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
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राजा दशरथ का श्राप- रात का सबसे मार्मिक पल
जब अमरिंदर मान ने राजा दशरथ की भूमिका में श्रवण के वध के बाद माता-पिता के श्राप को सुना, तो पूरा पंडाल स्तब्ध था। इस दृश्य ने दर्शकों को यह एहसास दिलाया कि किस प्रकार एक अनजाने में किया गया कर्म जीवनभर का दुख दे जाता है। कमेटी के प्रधान आशु सूद ने बताया कि आने वाले दिनों में राम जन्म और ताड़का वध जैसे प्रमुख प्रसंग दिखाए जाएंगे। रामलीला हमारी संस्कृति और जीवन मूल्यों का उत्सव है। इस दौरान मोनू (सुमंत), आयुष शर्मा (गुरु वशिष्ठ) और रोहित, मोनू, आर्यन, आनंद व रंजीत अरमानी (मंत्रियों की भूमिका) ने अपने अभिनय से पूरे मंचन को यादगार बना दिया। दर्शकों की तालियों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
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