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Mohali News: सीवर के लिए खोदी सड़क पर भरा पानी, बच्चों का स्कूल जाना हुआ मुश्किल
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जीरकपुर। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे से नगला गांव को जाने वाली सड़क की हालत जर्जर हो चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों में रुका बरसाती पानी और सीवर लाइन डालने के बाद खोदी सड़क के चलते लोग बेहद परेशान हैं। नगला रोड पर कई सोसाइटियां और दो गांव हैं। दो निजी और एक सरकारी स्कूल भी है। सरकारी स्कूल के हालात इतने ज्यादा बदतर हैं कि बच्चे और शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। नगला बस्ती गांव में बने स्कूल के रास्ते पर घुटनों तक पानी रुका रहता है।
मैनहोल जहां बनाए गए हैं, वहां जमीन धंस गई है। इस कारण गड्ढाें में पानी भरने से कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि स्कूल पहुंचना बच्चों और शिक्षकों के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है। बच्चे पैदल जा नही सकते और गाड़ियां वहां तक पहुंच नही सकती। गांववासियों और स्कूल के शिक्षक कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। होई हादसा न हो इसलिए परिजन बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। लोगों की मांग है कि स्कूल व गांव की सड़क को पक्का बनाया जाए और मैनहोल के गड्ढों को भरा जाए। इसके अलावा इस रोड पर दो निजी स्कूल भी हैं। उनकी बसें भी इन गड्ढों में फंस जाती हैं। इससे लोग बेहद परेशान हैं।
छह माह से खोदकर छोड़ी है सीवर लाइन
नगला रोड पर सीवर लाइन नहीं थी। दिसंबर माह में यहां सीवर लाइन डालने के लिए मेन सड़क और नगला बस्ती गांव की सड़क खोदी गई थी। जो आज तक ऐसी ही पड़ी है। सीवर का गंदा पानी गलियों में फैला रहता है। इस कारण बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनती तब तक सीवर लाइन का तो कोई प्रबंध करना चाहिए। लोगों ने बताया कि छह माह से वे लोग नर्क भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
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नहीं हो रही सुनवाई
हमारे गांव में आठवीं कक्षा तक स्कूल बना हुआ है, जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल आने पर ऐसा लगता है कि जैसे नदी पार करके आना हो। बहुत से बच्चे तो रोजाना अपने कपड़े खराब कर लेते हैं। इस कारण कुछ बच्चों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है। हम कई माह से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है। - अर्जुन कुमार, नगला बस्ती गांव
बारिश में रुकता है पानी
कोई काम जब चलता है तो उसे इतना टाइम नहीं लगता है, लेकिन छह माह से हम बार-बार सीवरेज बोर्ड व नगर परिषद को शिकायतें कर चुके हैं। बरसात के दिनों में इतना पानी रुक जाता है कि यहां कोई भी वाहन नहीं निकल पाता। लोगों को अपने जूते उतार कर पैदल निकलना पड़ता है। - सतनाम सिंह, निवासी नगला बस्ती गांव
कपड़े बदलने पड़ते हैं
जब भी कहीं काम पर जाना हो या कहीं बाहर जाना हो तो जूते उतार कर जाना पड़ता है। कपड़े पुराने डालकर जाते हैं ताकि खराब ना हो जाएं। नए कपड़े आगे जाकर डालने पड़ते हैं। गाड़ियां और मोटरसाइकल एक किलोमीटर पीछे खड़े करने पड़ते हैं। उनके चोरी होने का डर बना रहता है। - प्रदीप सिंह, निवासी नगला बस्ती
सड़क टूटी होने के कारण नगला रोड पर अक्सर जाम लगा रहता है। बरसात के दिनों में यहां इतना पानी रुक जाता है कि दो पहिया वाहन पर चलते हुए भी डर लगता है। सड़क के बीचोंबीच सीवर का ढक्कन खुला रहता है। इस कारण वाहनों को नुकसान हो रहा है। इतना टाइम कहीं भी नही लगता जितना यहां लगा रहे हैं। सरकार और प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। - कुलदीप सिंह, नगला बस्ती
अधिकारी
पूरे नगला रोड पर सीवर डाली गई है। नगला रोड पर टाइल्स लगाने का काम हमारा है। गांव के अंदर स्कूल को जाने वाली सड़क पर टाइल्स लगाने का काम नगर परिषद का है। हमने लाइन बिछाने के बाद सड़क पर टाइल्स बिछानी शुरू कर दी हैं बाकी काम नगर परिषद का है। - जसबीर सिंह, जेई सीवरेज बोर्ड
यह काम सीवरेज बोर्ड का है। यदि हमारा काम है तो स्कूल के कारण काम पहल के आधार पर किया जाएगा। हमने पहले यहां गटका बिछा दिया था ताकि बच्चों को आने-जाने में समस्या ना आए। जैसे ही मिट्टी सुख जाएगी टाइल्स लगाने का काम शुरू करवा दिया जाएगा। - ईशान कुमार, जेई नगर परिषद जीरकपुर
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मैनहोल जहां बनाए गए हैं, वहां जमीन धंस गई है। इस कारण गड्ढाें में पानी भरने से कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि स्कूल पहुंचना बच्चों और शिक्षकों के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है। बच्चे पैदल जा नही सकते और गाड़ियां वहां तक पहुंच नही सकती। गांववासियों और स्कूल के शिक्षक कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। होई हादसा न हो इसलिए परिजन बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। लोगों की मांग है कि स्कूल व गांव की सड़क को पक्का बनाया जाए और मैनहोल के गड्ढों को भरा जाए। इसके अलावा इस रोड पर दो निजी स्कूल भी हैं। उनकी बसें भी इन गड्ढों में फंस जाती हैं। इससे लोग बेहद परेशान हैं।
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छह माह से खोदकर छोड़ी है सीवर लाइन
नगला रोड पर सीवर लाइन नहीं थी। दिसंबर माह में यहां सीवर लाइन डालने के लिए मेन सड़क और नगला बस्ती गांव की सड़क खोदी गई थी। जो आज तक ऐसी ही पड़ी है। सीवर का गंदा पानी गलियों में फैला रहता है। इस कारण बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनती तब तक सीवर लाइन का तो कोई प्रबंध करना चाहिए। लोगों ने बताया कि छह माह से वे लोग नर्क भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
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नहीं हो रही सुनवाई
हमारे गांव में आठवीं कक्षा तक स्कूल बना हुआ है, जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल आने पर ऐसा लगता है कि जैसे नदी पार करके आना हो। बहुत से बच्चे तो रोजाना अपने कपड़े खराब कर लेते हैं। इस कारण कुछ बच्चों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है। हम कई माह से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है। - अर्जुन कुमार, नगला बस्ती गांव
बारिश में रुकता है पानी
कोई काम जब चलता है तो उसे इतना टाइम नहीं लगता है, लेकिन छह माह से हम बार-बार सीवरेज बोर्ड व नगर परिषद को शिकायतें कर चुके हैं। बरसात के दिनों में इतना पानी रुक जाता है कि यहां कोई भी वाहन नहीं निकल पाता। लोगों को अपने जूते उतार कर पैदल निकलना पड़ता है। - सतनाम सिंह, निवासी नगला बस्ती गांव
कपड़े बदलने पड़ते हैं
जब भी कहीं काम पर जाना हो या कहीं बाहर जाना हो तो जूते उतार कर जाना पड़ता है। कपड़े पुराने डालकर जाते हैं ताकि खराब ना हो जाएं। नए कपड़े आगे जाकर डालने पड़ते हैं। गाड़ियां और मोटरसाइकल एक किलोमीटर पीछे खड़े करने पड़ते हैं। उनके चोरी होने का डर बना रहता है। - प्रदीप सिंह, निवासी नगला बस्ती
सड़क टूटी होने के कारण नगला रोड पर अक्सर जाम लगा रहता है। बरसात के दिनों में यहां इतना पानी रुक जाता है कि दो पहिया वाहन पर चलते हुए भी डर लगता है। सड़क के बीचोंबीच सीवर का ढक्कन खुला रहता है। इस कारण वाहनों को नुकसान हो रहा है। इतना टाइम कहीं भी नही लगता जितना यहां लगा रहे हैं। सरकार और प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। - कुलदीप सिंह, नगला बस्ती
अधिकारी
पूरे नगला रोड पर सीवर डाली गई है। नगला रोड पर टाइल्स लगाने का काम हमारा है। गांव के अंदर स्कूल को जाने वाली सड़क पर टाइल्स लगाने का काम नगर परिषद का है। हमने लाइन बिछाने के बाद सड़क पर टाइल्स बिछानी शुरू कर दी हैं बाकी काम नगर परिषद का है। - जसबीर सिंह, जेई सीवरेज बोर्ड
यह काम सीवरेज बोर्ड का है। यदि हमारा काम है तो स्कूल के कारण काम पहल के आधार पर किया जाएगा। हमने पहले यहां गटका बिछा दिया था ताकि बच्चों को आने-जाने में समस्या ना आए। जैसे ही मिट्टी सुख जाएगी टाइल्स लगाने का काम शुरू करवा दिया जाएगा। - ईशान कुमार, जेई नगर परिषद जीरकपुर