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वीकेंड लॉकडाउन पर बवाल, दुकानदारों ने सड़कों पर उतर किए सवाल
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मोहाली। कोरोना महामारी के चलते लगाए पंजाब सरकार की ओर से लगाए वीकेंड लॉकडाउन के खिलाफ अब व्यापारी संघर्ष की राह पर उतर आए। दुकानदारों ने शनिवार को सरकार के नियमों को तोड़कर अपनी दुकानें खोली। इसके साथ ही सरकार के खिलाफ काले बिल्ले लगाकर जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस की टीमें बाजारों में दुकानें बंद करवाने पहुंची तो उन्हेें भी वापिस लौटना पड़ा।
इसको लेकर व्यापार मंडल के प्रधान विनीत वर्मा ने कहा कि जब मोहाली को लेकर अन्य फैसले ट्राइसिटी को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं, तो दुकानें खोलने संबंधी फैसला भी ट्राइसिटी को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। अब सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो आने वाले चुनावों में व्यापारी सरकार को सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि शराब ठेकों को वीकेंड लॉकडाउन में राहत दी गई है, इससे सरकार की नीयत सामने आई है कि वह सिर्फ अपना राजस्व देख रही है, न कि दुकानदारों का नुकसान।
दरअसल वीकेंड पर चंडीगढ़ और पंचकूला के बाजार खुलने के बाद जिला मोहाली के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें भी बाजारों में अपनी दुकानें खोलने के लिए चंडीगढ़ की तर्ज पर राहत देनी चाहिए। वीकेंड लॉकडाउन के खिलाफ व्यापार मंडल पहले से ही संघर्ष कर रहा था। इसके लिए करीब चार महीनों से पत्राचार से जंग चल रही थी। लेकिन वीकेंड पर चंडीगढ़ और पंचकूला के बाजार खुलते ही मोहाली में भी बगावत शुरू हुई।
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इसको लेकर फेज-7 की मार्केट के व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी मांग रखी। इस दौरान व्यापार मंडल के महासचिव सरबजीत सिंह पारस कि अगुवाई में दुकानदारों ने संघर्ष शुरू कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी दुकानें खोली।
इस दौरान जब पुलिस की टीमें दुकानें बंद करवाने के लिए भी पहुंचीं तो व्यापारियों का सख्त रवैया देखकर उन्हें वापिस जाना पड़ा।
इस मौके पर सरबजीत सिंह पारस ने कहा कि लॉकडाउन कोरोना की महामारी से निपटने का हल नहीं है। दुकानें बंद रहने से दुकानदार भूूखमरी के शिकार हो गए हैं और कई दुकानें बंद हो चुकी हैं। लोगों को अपना घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब वह चुप नहीं बैठ सकते। उन्हें अब घर और परिवार बचाने के लिए संघर्ष की राह पर निकलना पड़ा है।
शनिवार-रविवार ही बाजार आते हैं ज्यादा ग्राहक, उस पर भी सरकार फेर रही पानी
मोहाली व्यापार मंडल के प्रधान विनीत वर्मा ने कहा कि सभी को मालूम है कि शनिवार और रविवार को ही ज्यादा ग्राहक बाजार आते हैं। जितना व्यापार पूरे हफ्ते में होता है, उतना अकेले दोनों दिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं दो दिन सरकार ने दुकानें बंद करवा दीं। यह हम सभी व्यापारियों के साथ धक्केशाही नहीं तो क्या है। सरकार अगर लोगों को रोटी दे नहीं सकती है तो व्यापारी की मेहनत से कमाई रोटी को छीनने का भी हक नहीं है। मान लो किसी को इन्हीं दो दिन में कोई सामान लेना है तो वह चंडीगढ़ से लेकर आएगा। ऐसे तो मोहाली का बिजनेस ठप हो जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जब चंडीगढ़ और पंचकूला का प्रशासन समझदारी दिखा सकता है तो मोहाली प्रशासन को भी व्यापारियों के हित में सोचना चाहिए न कि उन्हें बर्बाद करने के बारे में। उन्होंने कहा कि सभी दुकानदारों को चंडीगढ़ की तर्ज पर सुविधाएं देनी चाहिए। जिस तरह सरकार व्यापारियों के साथ धक्केशाही कर रही है, आने वाले चुनाव में सभी व्यापारी सरकार को इसका सबक सिखाएंगे।
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इसको लेकर व्यापार मंडल के प्रधान विनीत वर्मा ने कहा कि जब मोहाली को लेकर अन्य फैसले ट्राइसिटी को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं, तो दुकानें खोलने संबंधी फैसला भी ट्राइसिटी को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। अब सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो आने वाले चुनावों में व्यापारी सरकार को सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि शराब ठेकों को वीकेंड लॉकडाउन में राहत दी गई है, इससे सरकार की नीयत सामने आई है कि वह सिर्फ अपना राजस्व देख रही है, न कि दुकानदारों का नुकसान।
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दरअसल वीकेंड पर चंडीगढ़ और पंचकूला के बाजार खुलने के बाद जिला मोहाली के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें भी बाजारों में अपनी दुकानें खोलने के लिए चंडीगढ़ की तर्ज पर राहत देनी चाहिए। वीकेंड लॉकडाउन के खिलाफ व्यापार मंडल पहले से ही संघर्ष कर रहा था। इसके लिए करीब चार महीनों से पत्राचार से जंग चल रही थी। लेकिन वीकेंड पर चंडीगढ़ और पंचकूला के बाजार खुलते ही मोहाली में भी बगावत शुरू हुई।
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इसको लेकर फेज-7 की मार्केट के व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी मांग रखी। इस दौरान व्यापार मंडल के महासचिव सरबजीत सिंह पारस कि अगुवाई में दुकानदारों ने संघर्ष शुरू कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी दुकानें खोली।
इस दौरान जब पुलिस की टीमें दुकानें बंद करवाने के लिए भी पहुंचीं तो व्यापारियों का सख्त रवैया देखकर उन्हें वापिस जाना पड़ा।
इस मौके पर सरबजीत सिंह पारस ने कहा कि लॉकडाउन कोरोना की महामारी से निपटने का हल नहीं है। दुकानें बंद रहने से दुकानदार भूूखमरी के शिकार हो गए हैं और कई दुकानें बंद हो चुकी हैं। लोगों को अपना घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब वह चुप नहीं बैठ सकते। उन्हें अब घर और परिवार बचाने के लिए संघर्ष की राह पर निकलना पड़ा है।
शनिवार-रविवार ही बाजार आते हैं ज्यादा ग्राहक, उस पर भी सरकार फेर रही पानी
मोहाली व्यापार मंडल के प्रधान विनीत वर्मा ने कहा कि सभी को मालूम है कि शनिवार और रविवार को ही ज्यादा ग्राहक बाजार आते हैं। जितना व्यापार पूरे हफ्ते में होता है, उतना अकेले दोनों दिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं दो दिन सरकार ने दुकानें बंद करवा दीं। यह हम सभी व्यापारियों के साथ धक्केशाही नहीं तो क्या है। सरकार अगर लोगों को रोटी दे नहीं सकती है तो व्यापारी की मेहनत से कमाई रोटी को छीनने का भी हक नहीं है। मान लो किसी को इन्हीं दो दिन में कोई सामान लेना है तो वह चंडीगढ़ से लेकर आएगा। ऐसे तो मोहाली का बिजनेस ठप हो जाएगा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जब चंडीगढ़ और पंचकूला का प्रशासन समझदारी दिखा सकता है तो मोहाली प्रशासन को भी व्यापारियों के हित में सोचना चाहिए न कि उन्हें बर्बाद करने के बारे में। उन्होंने कहा कि सभी दुकानदारों को चंडीगढ़ की तर्ज पर सुविधाएं देनी चाहिए। जिस तरह सरकार व्यापारियों के साथ धक्केशाही कर रही है, आने वाले चुनाव में सभी व्यापारी सरकार को इसका सबक सिखाएंगे।