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जीरकपुर में केमिकल डालकर सुखाए जा रहे वृक्ष, विरोध में कमेटी ने किया प्रदर्शन
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जीरकपुर। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में सबसे अहम भूमिका वृक्षों की होती है। वहीं, बिल्डर अपने प्रोजेक्टों को चमकाने के लिए खड़े पेड़ पर केमिकल लगाकर उसे सुखा देते हैं और सूखने के बाद वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर उसे कटवा लेते हैं। यह आरोप है ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्यों ने पेड़ काटने के विरोध में किए प्रदर्शन के दौरान लगाए।
कमेटी के सदस्यों का कहना है कि बार बार शिकायत के बाद भी वन विभाग ने अधिकारियों ने बिल्डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधि सोमवार को सड़कों पर उतर आए और जीरकपुर-पटियाला मार्ग पर स्थित पेट्रोप पंप के सामने प्रदर्शन किया। ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जैक) के प्रधान सुखदेव चौधरी, एडवोकेट विनय कुमार, कुलविंदर सिंह, अंजू चौधरी, बृजमोहन ग्रोवर, राजेश खन्ना, एचएस चीमा, हितेष मुलतानी, विजय सेठी ने बताया कि जीरकपुर, पीरमुछल्ला, ढकोली, गाजीपुर, नगला, ओल्ड अंबाला रोड समेत पूरे एरिया में पेड़ इसलिए काटे जाते हैं कि बिल्डरों का प्रोजेक्ट क्लीयर दिखाई दें। यह ऐसे पेड़ हैं जिनके नंबर लगे हुए हैं।
पेड़ काटने की प्रक्रिया है लंबी
सुखदेव चौधरी ने बताया कि अगर कानूनी तौर पर पेड़ काटे जाते हैं तो उसकी प्रक्रिया कठिन व लंबी होती है। पेड़ काटने से पहले पेड़ लगाने भी पड़ते हैं। बिल्डर इस प्रक्रिया में नहीं जाते और वन विभाग के कर्मचारियों की सहमति के साथ पेड़ों की जड़ों में केमिकल डालकर उन्हें सुखा देते हैं। इसके बाद वन विभाग पेड़ को सूखा दिखाकर काट देता है। जीरकपुर, पीरमुछल्ला, ढकोली, पटियाला मार्ग पर बिल्डरों के प्रोजेक्ट के आगे के पेड़ तो सूखे हैं, जबकि आसपास के इलाके के पेड़ हरे हैं। उन्होंने पेड़ काटने वालों पर केस दर्ज करने की मांग की है।
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कोट
मामला आज ही उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में रेंज ऑफिसर को बोल दिया है कि पूरी जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाए। अगर कोई भी जांच के दायरे में आया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पेड़ों के सूखने के कारणों का भी पता लगाया जाएगा।
-अमित चौहान, डीएफओ
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कमेटी के सदस्यों का कहना है कि बार बार शिकायत के बाद भी वन विभाग ने अधिकारियों ने बिल्डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधि सोमवार को सड़कों पर उतर आए और जीरकपुर-पटियाला मार्ग पर स्थित पेट्रोप पंप के सामने प्रदर्शन किया। ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जैक) के प्रधान सुखदेव चौधरी, एडवोकेट विनय कुमार, कुलविंदर सिंह, अंजू चौधरी, बृजमोहन ग्रोवर, राजेश खन्ना, एचएस चीमा, हितेष मुलतानी, विजय सेठी ने बताया कि जीरकपुर, पीरमुछल्ला, ढकोली, गाजीपुर, नगला, ओल्ड अंबाला रोड समेत पूरे एरिया में पेड़ इसलिए काटे जाते हैं कि बिल्डरों का प्रोजेक्ट क्लीयर दिखाई दें। यह ऐसे पेड़ हैं जिनके नंबर लगे हुए हैं।
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पेड़ काटने की प्रक्रिया है लंबी
सुखदेव चौधरी ने बताया कि अगर कानूनी तौर पर पेड़ काटे जाते हैं तो उसकी प्रक्रिया कठिन व लंबी होती है। पेड़ काटने से पहले पेड़ लगाने भी पड़ते हैं। बिल्डर इस प्रक्रिया में नहीं जाते और वन विभाग के कर्मचारियों की सहमति के साथ पेड़ों की जड़ों में केमिकल डालकर उन्हें सुखा देते हैं। इसके बाद वन विभाग पेड़ को सूखा दिखाकर काट देता है। जीरकपुर, पीरमुछल्ला, ढकोली, पटियाला मार्ग पर बिल्डरों के प्रोजेक्ट के आगे के पेड़ तो सूखे हैं, जबकि आसपास के इलाके के पेड़ हरे हैं। उन्होंने पेड़ काटने वालों पर केस दर्ज करने की मांग की है।
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मामला आज ही उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में रेंज ऑफिसर को बोल दिया है कि पूरी जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाए। अगर कोई भी जांच के दायरे में आया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पेड़ों के सूखने के कारणों का भी पता लगाया जाएगा।
-अमित चौहान, डीएफओ