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Hindi News ›   Chandigarh ›   The corona patient was told dead in the first morning, the patient died in the evening

मोहाली: सुबह ही जिंदा कोरोना मरीज को बता दिया मृत, शाम को हुई मौत

Sun, 13 Sep 2020 01:45 AM IST
मोहाली ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: मोहाली ब्‍यूरो Updated Sun, 13 Sep 2020 01:45 AM IST
सार

  • सेक्टर-69 के एक निजी अस्पताल का मामला, परिवार ने स्वास्थ्य मंत्री और विभाग को दी शिकायत
  • शहर में पूरा दिन मामला बना रहा चर्चा का विषय, लोग बोले- अस्पताल लोगों को लूटना बंद करें

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The corona patient was told dead in the first morning, the patient died in the evening
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में चल रहे सेक्टर-69 के एक निजी अस्पताल ने शनिवार को एक नया कारनामा का डाला। जो कि शहर में सोशल मीडिया पर पूरा दिन चर्चा का विषय बना रहा। मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह एक उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीज के परिवार को सूचना दी कि उनके मरीज की मौत हो गई है। इसके बाद पीड़ित परिवार ने इस संबंध में रिश्तेदारों को जानकारी दे दी और सोशल मीडिया पर शोक संदेश तक डाल दिया। जबकि बाद में अस्पताल जाने पर पता चला कि मरीज जिंदा है। 

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यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि शाम करीब 6 बजे अस्पताल की ओर से मरीज के परिवार को सूचित किया गया कि उनके मरीज की मौत हो गई है, उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद परिवार अस्पताल पहुंच गया है। इस पर अस्पताल प्रबंधन से नाराज पीड़ित मृतक के परिवार ने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है इस मामले की जांच होनी चाहिए। अस्पताल लोगों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक फेज-5 मार्केट के पूर्व प्रधान रणबीर सिंह ढिल्लों कोरोना पीड़ित होने के कारण सेक्टर-69 के एक निजी अस्पताल में दाखिल थे और उनको वेंटिलेटर पर रखा हुआ था। ढिल्लों के बेटे सुखलीन सिंह ढिल्लों ने बताया कि सुबह साढ़े 7 बजे अस्पताल से डॉक्टर का फोन आया कि आपके पिता का स्वर्गवास हो गया है। इस पर परिवार दुखी हो गया और उन्होंने इसकी सूचना अपने रिश्तेदारों और करीबियों को दे दी और इसके बाद वह अस्पताल चले गए। 

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अस्पताल पहुंचने पर उनको बताया गया कि अस्पताल की तरफ से सिविल सर्जन दफ्तर को मेल भेजकर सूचित कर दिया गया है। उनके मरीज का शव जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल ने उन्हें नगर निगम से संपर्क करने और मृतक के दाह संस्कार का प्रबंध करने को कहा। इसके बाद उनके साथ आए पार्षद अशोक झा ने निगम अधिकारियों से संपर्क कर संस्कार के लिए 2 बजे का समय ले लिया। 

उन्होंने बताया कि करीब साढ़े 11 बजे अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बिल भरने को कहा। वह पैसे जमा करवाने काउंटर पर गए तो वहां बैठे अस्पताल स्टाफ ने उन्हें बताया कि उनका मरीज तो जिंदा हैं और उनका इलाज चल रहा है। इसके बाद अस्पताल वालों ने उन्हें पीपीई किट पहनाकर वार्ड में ले जाकर उनके पिता को दिखाया, जो कि बेहोश थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में किसी अन्य मरीज की मौत हुई थी। जबकि अस्पताल प्रबंधन ने गलती से उन्हें फोन कर दिया था। इसके बाद शाम करीब 6 बजे अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को जानकारी दी कि उनके मरीज की हार्ट अटैक से मौत हो गई है। 

दूसरे मामले में एक परिवार को सौंपा किसी और का शव, पता गलत होने पर हुआ बवाल
वहीं एक दूसरे मामले में अस्पताल में बुलाए गए एक अन्य मरीज के रिश्तेदारों ने जब मृतक का चेहरा देखा तो उन्होंने उसे ले जाने से इनकार कर दिया। क्योंकि परिजनों का आरोप था कि जो शव उन्हें सौंपा गया है, वह किसी और व्यक्ति का है। उन्होंने कहा कि मरीज का नाम भले ही ठीक है लेकिन मरीज के पिता का नाम और पता किसी और का है। वहीं पता चला है कि पहले गलती से मरीज के पते में डेराबस्सी की जगह अंबाला लिख दिया गया था। इसके बाद जांच करने पर यह मामला निपट गया था। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया

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