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फीस माफ न करने पर विद्यार्थियों ने किया प्रदर्शन
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डेराबस्सी। सरकारी कॉलेज में विद्यार्थियों की फीसों को लेकर चल रही तकरार बढ़ती जा रही है। फीस माफ करने को लेकर बीती 24 अगस्त को भी विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था। लेकिन कॉलेज प्रशासन मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है जिस पर बुधवार को भी विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि कॉलेज प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों पर पूरी फीस भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जबकि बहुत सारे विद्यार्थी गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं। लॉकडाउन के कारण उनके परिवारों के कारोबार पूरी तरह ठप हो गए हैं। इस कारण वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। ऐसे दौर में वह फीस नहीं भर सकते हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से फीसें माफ करने की मांग को दोहराते हुए कहा कि अगर सरकारी कॉलेजों का यह हाल है तो निजी स्कूल कॉलेजों में स्थिति और भी गंभीर होगी। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन फीसें वसूलने के पीछे सरकार की हिदायत को जिम्मेदार बता रहा है, लेकिन वसूली जानी वाली फीस का एक बड़ा हिस्सा कॉलेज के पास ही रहता है जबकि सरकार के पास सिर्फ चार हजार रुपये प्रति छात्र जाते हैं। कालेज प्रशासन अपने हिस्से की फीस को माफ कर सकता है। पहले कॉलेज प्रशासन फीस भरने के लिए किस्तों में फीस देने की सुविधा देता था लेकिन अब उनकी ओर से एक साथ इकट्ठी फीस मांगी जा रही है जो विद्यार्थियों के साथ धक्केशाही है। इसे किसी कीमत पर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा बल्कि इसके खिलाफ राज्य भर में प्रदर्शन किए जाएंगे।
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प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि कॉलेज प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों पर पूरी फीस भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जबकि बहुत सारे विद्यार्थी गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं। लॉकडाउन के कारण उनके परिवारों के कारोबार पूरी तरह ठप हो गए हैं। इस कारण वह आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। ऐसे दौर में वह फीस नहीं भर सकते हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से फीसें माफ करने की मांग को दोहराते हुए कहा कि अगर सरकारी कॉलेजों का यह हाल है तो निजी स्कूल कॉलेजों में स्थिति और भी गंभीर होगी। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन फीसें वसूलने के पीछे सरकार की हिदायत को जिम्मेदार बता रहा है, लेकिन वसूली जानी वाली फीस का एक बड़ा हिस्सा कॉलेज के पास ही रहता है जबकि सरकार के पास सिर्फ चार हजार रुपये प्रति छात्र जाते हैं। कालेज प्रशासन अपने हिस्से की फीस को माफ कर सकता है। पहले कॉलेज प्रशासन फीस भरने के लिए किस्तों में फीस देने की सुविधा देता था लेकिन अब उनकी ओर से एक साथ इकट्ठी फीस मांगी जा रही है जो विद्यार्थियों के साथ धक्केशाही है। इसे किसी कीमत पर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा बल्कि इसके खिलाफ राज्य भर में प्रदर्शन किए जाएंगे।
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