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विकास में ऐसे पिछड़े कि अब युवा शादियों को भी तरसे
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नयागांव (मुल्लांपुर)। पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गृह जिले मोहाली को सरकार एक ओर जहां सिंगापुर की तर्ज पर बसाने के दावे तो करती है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने में बसा गांव मिर्जापुर बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण उजड़ने की कगार पर है। इस गांव के हालात यह हैं कि यहां के लोग मजबूरी में चंडीगढ़ या अन्य इलाकों में पलायन कर रहे हैं। सबसे बड़ा प्रभाव यह पड़ा कि इस गांव के युवा लड़कों की शादी करने के लिए रिश्ते तक नहीं आ रहे हैं। क्योंकि कोई भी व्यक्ति उक्त गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण अपनी बेटियों की शादी यहां के लड़कों से नहीं करना चाहता। गांव वाले काफी मुश्किल दौर में हैं और किसी को समझ नहीं आता है कि आखिर उनका दुख कब दूर होगा।
न्यू चंडीगढ़ से महज 7 से 8 किलोमीटर दूर बसा गांव मिर्जापुर खरड़ विधानसभा हलके का बूथ नंबर-2 है। लेकिन विकास के मामले में काफी पीछे है। गांव में आने-जाने का कोई साधन नहीं है। इस गांव में पंजाब रोडवेज या सीटीयू की बस नहीं चलती है। लोगों को मजबूरी में 7-8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गांव में एक प्राइमरी और एक मिडिल स्कूल जरूर है, लेकिन हालात यह है कि बरसात के दिनों में बच्चे स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते हैं। क्योंकि गांव और स्कूल के बीच में एक नहर है। इस पर पुलिया न होने के कारण स्कूल और गांव का संपर्क टूट जाता है। गांव वासियों का कहना है कि किसी भी सरकार ने हमारे गांव की तरफ कोई ध्यान नहीं है। शिवालिक की पहाड़ियों में बसा हुआ गांव मिर्जापुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इसी सुंदरता पर फिदा होकर अंग्रेेजों ने 1914 में यहां पर एक विश्रामगृह बनाया था। इसमें पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी एक रात ठहर चुके हैं। लेकिन आजादी के बाद से गांव का कोई विकास नहीं हुआ है। उच्च शिक्षा, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गांव के युवाओं की अब शादी भी नहीं हो पा रही है। पिछले करीब 10 साल में गांव से 50 परिवार पलायन भी कर चुके हैं।
गर्भवती को किराए पर रहना पड़ता है शहर में
गांव मिर्जापुर के लोगों ने बताया कि उनके गांव में कोई भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण गांव में जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो तो उसको प्रसव के समय पहले से ही तैयारियां करनी पड़ती हैं और इससे उनका खर्चा भी बढ़ जाता है। उनको मजबूरी में अपने प्रसव के लिए शहर में या शहर से सटे अन्य गांव में ऐसी जगह किराए कमरा लेकर रहना पड़ता है, जहां से सरकारी अस्पताल नजदीक हो और वह डॉक्टर की देखरेख में प्रसव के लिए खुद को खतरे से बचा सकें।
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एक भी व्यक्ति नहीं सरकारी नौकरी में
गांव मिर्जापुर में सिर्फ 8वीं तक का स्कूल है। इसके बाद पढ़ाई के लिए बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। यातायात का कोई साधन न होने के कारण गांव के बच्चे 8वीं के बाद पढ़ ही नहीं पाते हैं। इस कारण गांव में आज तक कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है। यह व्यवस्था न होने से ग्रामीण शिक्षा के प्रबंध नहीं होने का दोष सरकार को देते हैं।
सरकार ने छीना रोजगार का साधन
पूरा गांव सिर्फ खेती-बाड़ी पर ही निर्भर है। गांव में रोजगार का कोई और साधन नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि 1995 में उनकी मर्जी के खिलाफ सरकार ने नहर पर एक डैम बनाया था। इसके लिए उनकी जमीन जबरदस्ती ले ली थी। लेकिन 1995 से अब तक उनकी जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। इस कारण ग्रामीण बेरोजगार हो गए हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को एक मांग पत्र भी सौंपा है। साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि अगर पंजाब सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर सकती तो गांव को हिमाचल प्रदेश के साथ जोड़ देना चाहिए।
कोट्स
युवाओं की नहीं हो रही शादी
गांव में बुनियादी सुविधाएं न होने, अशिक्षा और बेरोजगारी होने के कारण गांव के युवाओं की शादी करने में बहुत परेशानी हो रही है। युवाओं के रिश्ते नहीं हो रहे हैं और इस कारण गांव की जनसंख्या लगातार घटती जा रही है। -दिलाराम, स्थानीय निवासी।
नहीं मिला मुआवजा
सरकार ने जबरदस्ती हमारी उपजाऊ जमीन को स्क्वायर करके उसका मुआवजा भी नहीं दिया है। इस कारण गांव की खेती की जमीन भी कम हो गई है। ग्रामीण बेरोजगार हो गए हैं। सरकार को जल्द से जल्द ग्रामीणों का मुआवजा दे देना चाहिए। -हुसन चंद, कार्यकारी सरपंच, मिर्जापुर।
बरसात में बच्चे नहीं पहुंच पाते स्कूल
बरसात के दिनों में गांव के बच्चे दूसरे गांव में अपने स्कूल नहीं पहुंच पाते। क्योंकि रास्ते में नहर होने के कारण नहर में पानी भर जाता है और बच्चे दूसरी ओर अन्य गांव में स्कूल नहीं जा पाते। सरकार इस नहर पर पुलिया नहीं बनवा रही है। अगर यहां पुलिया बन जाती है तो स्कूल जाना आसान हो जाएगा। -अशोक कुमार, स्थानीय निवासी।
नहीं हैं स्वास्थ्य सेवाएं
गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। दूसरे गांव के स्वास्थ्य केंद्र यहां से बहुत दूर पड़ते हैं। इस कारण ग्रामीणों को इलाज करवाने में कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। गर्भवती महिला के प्रसव के समय ग्रामीणों को शहर का रुख करना पड़ता है। जिससे खर्चा और ज्यादा बढ़ जाता है। बहुत सी महिलाओं को इसके लिए शहर में कमरा लेकर भी रहना पड़ता है। -जरनैल सिंह, स्थानीय निवासी।
विधानसभा में उठाया है मुद्दा
विधानसभा में गांव में बनाए जाने वाली पुलिया और डैम के लिए ली गई जमीन के मुआवजे का मुद्दा कई बार उठाया गया है। यहां तक कि पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित मंत्री से भी व्यक्तिगत रूप से बात की गई थी। लेकिन कांग्रेस सरकार विकास के कोई भी काम नहीं करवा रही है। सरकार की ओर से झूठा वादा किया गया था। जो कि अब तक पूरा नहीं किया। 5कंवर संधू, विधायक हलका, खरड़।
क्या कहते हैं अधिकारी
गांव मिर्जापुर की कच्ची पड़ी हुई गलियों को पक्का करवाया गया है। मनरेगा योजना के तहत गांव में विकास के काम किए जाएंगे। जल्द ही गांव में एक धर्मशाला बनाने का काम शुरू किया जाएगा। -जसप्रीत कौर, बीडीपीओ ब्लॉक माजरी।
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न्यू चंडीगढ़ से महज 7 से 8 किलोमीटर दूर बसा गांव मिर्जापुर खरड़ विधानसभा हलके का बूथ नंबर-2 है। लेकिन विकास के मामले में काफी पीछे है। गांव में आने-जाने का कोई साधन नहीं है। इस गांव में पंजाब रोडवेज या सीटीयू की बस नहीं चलती है। लोगों को मजबूरी में 7-8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गांव में एक प्राइमरी और एक मिडिल स्कूल जरूर है, लेकिन हालात यह है कि बरसात के दिनों में बच्चे स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते हैं। क्योंकि गांव और स्कूल के बीच में एक नहर है। इस पर पुलिया न होने के कारण स्कूल और गांव का संपर्क टूट जाता है। गांव वासियों का कहना है कि किसी भी सरकार ने हमारे गांव की तरफ कोई ध्यान नहीं है। शिवालिक की पहाड़ियों में बसा हुआ गांव मिर्जापुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इसी सुंदरता पर फिदा होकर अंग्रेेजों ने 1914 में यहां पर एक विश्रामगृह बनाया था। इसमें पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी एक रात ठहर चुके हैं। लेकिन आजादी के बाद से गांव का कोई विकास नहीं हुआ है। उच्च शिक्षा, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गांव के युवाओं की अब शादी भी नहीं हो पा रही है। पिछले करीब 10 साल में गांव से 50 परिवार पलायन भी कर चुके हैं।
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गर्भवती को किराए पर रहना पड़ता है शहर में
गांव मिर्जापुर के लोगों ने बताया कि उनके गांव में कोई भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण गांव में जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो तो उसको प्रसव के समय पहले से ही तैयारियां करनी पड़ती हैं और इससे उनका खर्चा भी बढ़ जाता है। उनको मजबूरी में अपने प्रसव के लिए शहर में या शहर से सटे अन्य गांव में ऐसी जगह किराए कमरा लेकर रहना पड़ता है, जहां से सरकारी अस्पताल नजदीक हो और वह डॉक्टर की देखरेख में प्रसव के लिए खुद को खतरे से बचा सकें।
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एक भी व्यक्ति नहीं सरकारी नौकरी में
गांव मिर्जापुर में सिर्फ 8वीं तक का स्कूल है। इसके बाद पढ़ाई के लिए बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। यातायात का कोई साधन न होने के कारण गांव के बच्चे 8वीं के बाद पढ़ ही नहीं पाते हैं। इस कारण गांव में आज तक कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है। यह व्यवस्था न होने से ग्रामीण शिक्षा के प्रबंध नहीं होने का दोष सरकार को देते हैं।
सरकार ने छीना रोजगार का साधन
पूरा गांव सिर्फ खेती-बाड़ी पर ही निर्भर है। गांव में रोजगार का कोई और साधन नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि 1995 में उनकी मर्जी के खिलाफ सरकार ने नहर पर एक डैम बनाया था। इसके लिए उनकी जमीन जबरदस्ती ले ली थी। लेकिन 1995 से अब तक उनकी जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। इस कारण ग्रामीण बेरोजगार हो गए हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को एक मांग पत्र भी सौंपा है। साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि अगर पंजाब सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर सकती तो गांव को हिमाचल प्रदेश के साथ जोड़ देना चाहिए।
कोट्स
युवाओं की नहीं हो रही शादी
गांव में बुनियादी सुविधाएं न होने, अशिक्षा और बेरोजगारी होने के कारण गांव के युवाओं की शादी करने में बहुत परेशानी हो रही है। युवाओं के रिश्ते नहीं हो रहे हैं और इस कारण गांव की जनसंख्या लगातार घटती जा रही है। -दिलाराम, स्थानीय निवासी।
नहीं मिला मुआवजा
सरकार ने जबरदस्ती हमारी उपजाऊ जमीन को स्क्वायर करके उसका मुआवजा भी नहीं दिया है। इस कारण गांव की खेती की जमीन भी कम हो गई है। ग्रामीण बेरोजगार हो गए हैं। सरकार को जल्द से जल्द ग्रामीणों का मुआवजा दे देना चाहिए। -हुसन चंद, कार्यकारी सरपंच, मिर्जापुर।
बरसात में बच्चे नहीं पहुंच पाते स्कूल
बरसात के दिनों में गांव के बच्चे दूसरे गांव में अपने स्कूल नहीं पहुंच पाते। क्योंकि रास्ते में नहर होने के कारण नहर में पानी भर जाता है और बच्चे दूसरी ओर अन्य गांव में स्कूल नहीं जा पाते। सरकार इस नहर पर पुलिया नहीं बनवा रही है। अगर यहां पुलिया बन जाती है तो स्कूल जाना आसान हो जाएगा। -अशोक कुमार, स्थानीय निवासी।
नहीं हैं स्वास्थ्य सेवाएं
गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। दूसरे गांव के स्वास्थ्य केंद्र यहां से बहुत दूर पड़ते हैं। इस कारण ग्रामीणों को इलाज करवाने में कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। गर्भवती महिला के प्रसव के समय ग्रामीणों को शहर का रुख करना पड़ता है। जिससे खर्चा और ज्यादा बढ़ जाता है। बहुत सी महिलाओं को इसके लिए शहर में कमरा लेकर भी रहना पड़ता है। -जरनैल सिंह, स्थानीय निवासी।
विधानसभा में उठाया है मुद्दा
विधानसभा में गांव में बनाए जाने वाली पुलिया और डैम के लिए ली गई जमीन के मुआवजे का मुद्दा कई बार उठाया गया है। यहां तक कि पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित मंत्री से भी व्यक्तिगत रूप से बात की गई थी। लेकिन कांग्रेस सरकार विकास के कोई भी काम नहीं करवा रही है। सरकार की ओर से झूठा वादा किया गया था। जो कि अब तक पूरा नहीं किया। 5कंवर संधू, विधायक हलका, खरड़।
क्या कहते हैं अधिकारी
गांव मिर्जापुर की कच्ची पड़ी हुई गलियों को पक्का करवाया गया है। मनरेगा योजना के तहत गांव में विकास के काम किए जाएंगे। जल्द ही गांव में एक धर्मशाला बनाने का काम शुरू किया जाएगा। -जसप्रीत कौर, बीडीपीओ ब्लॉक माजरी।