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सेल्फी लेने के होड़: सीमन का एक डोज दो लाख रुपये... पुष्कर मेले में छाया 15 करोड़ की कीमत वाला पंजाब का शहबाज

Fri, 31 Oct 2025 01:41 PM IST
अंकेश ठाकुर शिवानी हंस, मोहाली
शिवानी हंस, मोहाली Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 31 Oct 2025 01:41 PM IST
सार

राजस्थान के पुष्कर मेले में 15 करोड़ की कीमत वाला पंजाब का शहबाज घोड़े को देखने वालों की होड़ लगी हुई है। शहबाज की लोकप्रियता इतनी है कि उसकी प्रजनन फीस दो लाख रुपये प्रति सत्र रखी गई है। घोड़े के मालिक को इसके लिए 9 करोड़ तक के ऑफर मिल चुके हैं।

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Shahbaz horse from Mohali is worth Rs 15 crore at Pushkar fair
शहबाज घोड़ा। - फोटो : संवाद

विस्तार

राजस्थान के अजमेर जिले में चल रहे अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में इस बार मोहाली का शहबाज सब पर भारी पड़ा है। खरड़ के पास पडियाला गांव स्थित वीर स्टड फार्म का यह शानदार मारवाड़ी नस्ल का काला घोड़ा मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है। राजसी चाल, चमकदार काया और दमदार दौड़ से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले शहबाज की अनुमानित कीमत 15 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। 

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शहबाज के मालिक गुरप्रताप सिंह गिल (गैरी गिल) ने बताया कि यह घोड़ा करीब ढाई साल का है और उन्होंने इसे खुद अपने फार्म में पाला है। गिल हर साल पुष्कर मेले में अपने घोड़े लेकर जाते हैं लेकिन इस बार शहबाज की लोकप्रियता ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लोग न सिर्फ इसे देखने बल्कि फोटो और सेल्फी लेने के लिए भी लाइन में खड़े रहते हैं। 
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प्रजनन फीस दो लाख, 9 करोड़ तक के ऑफर ठुकराए
शहबाज की लोकप्रियता इतनी है कि उसकी प्रजनन फीस दो लाख रुपये प्रति सत्र रखी गई है। अब तक गिल को इसके लिए 9 करोड़ तक के ऑफर मिल चुके हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि शहबाज मेरे परिवार का हिस्सा है। उसकी कीमत नहीं, पहचान है।
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मोहाली से पुष्कर तक छाया जलवा
इस बार पुष्कर मेले में 4300 से ज्यादा पशु पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 3028 घोड़े और 1306 ऊंट शामिल हैं। सबसे ज्यादा चर्चा मोहाली के शहबाज की हो रही है। देशभर से आए दर्शक और पशुप्रेमी शहबाज की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। गुरप्रताप सिंह गिल कहते हैं कि हमारा उद्देश्य मारवाड़ी नस्ल को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी में इसे लोकप्रिय बनाना है। पंजाब और उत्तर भारत के लोग भी इस राजसी नस्ल को पहचानें और संजोएं यही हमारी कोशिश है। 


शहबाज की देखभाल में हर माह 50 हजार का खर्च
शहबाज की देखबाल राजसी घोड़े से कम नहीं है। इसके लिए दो विशेष सेवादार 24 घंटे तैनात रहते हैं। हर महीने के खानपान और देखरेख पर करीब 50 हजार रुपये खर्च होते हैं। उसके भोजन में चुने हुए अनाज, सूखे मेवे और पोषणयुक्त सप्लीमेंट शामिल हैं। सुबह-शाम उसे हल्की सवारी और नियमित एक्सरसाइज करवाई जाती है ताकि चाल और फिटनेस बरकरार रहे। गुरप्रताप सिंह गिल का कहना है कि शहबाज अब तक पांच नेशनल लेवल के शो टाइटल जीत चुका है। पिछले साल इसने पंजाब के नीत प्रमुख घोड़ा मुकाबलों में पहला स्थान और एक में दूसरा स्थान जीता था। गिल गर्व से कहते हैं कि जहां भी सहबाज जाता है खाली हाथ नहीं लौटता उसकी चाल-ढाल और आकर्षक लुक के आगे बाकी घोड़े फीके पड़ जाते हैं। शहबाज की लोकप्रियता इतनी है कि उसकी प्रजजन फीस दो लाख रुपये प्रति सत्र रखी गई है। 

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