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हाईकोर्ट का आदेश किसानों के खिलाफ रेवेन्यू विभाग नहीं करेगा कोई कार्रवाई

Tue, 21 Jun 2022 02:09 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 21 Jun 2022 02:09 AM IST
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Revenue Department will not take any action against the farmers, the order of the High Court
हाईकोर्ट का आदेश किसानों के खिलाफ रेवेन्यू विभाग नहीं करेगा कोई कार्रवाई
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क्रासर - ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, बोले - जीत कर रहेंगे कानूनी लड़ाई भी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुल्लांपुर/नयागांव। पांच माजरियों के नाम से पहचाने जाने वाले गांव जयंती माजरी, गुड़ा, कसौली, भगिंडी और करौंदेवाल के लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद राहत की सांस ली है। पांचों गांव की करीब 3603 एकड़ जमीन को पंचायत के नाम करने के मामले में हाईकोर्ट ने रेवेन्यू विभाग को किसानों के खिलाफ 18 जुलाई तक कोई भी कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। इस संबंधी गांव के लोगों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
विभाग ने पांच गांव की 3603 एकड़, 3 कनाल, 13 मरले जमीन को हिस्सेदारों की मलकीयत से हटाकर ग्राम पंचायत के नाम कर दिया था। इसमें 2172 एकड़, 7 कनाल, 1 मरले पहाड़ी जमीन जबकि 499 एकड़, 1 कनाल, 10 मरले जमीन नदी नालों की थी। एफसीआर ने अपने आदेश में कहा था कि 1983- 1984 में इस जमीन का इंतकाल देह शामलात के नाम पर था। 1991 में चकबंदी अधिकारी की ओर से लोगों के हिस्सेदारी में कर दिया था। 1991 के चकबंदी अधिकारी के आदेशों को निरस्त करते हुए फाइनेंशियल कमिश्नर ने इंतकाल नंबर 2026 को रद्द कर दिया था। उसके खिलाफ लोग निरंतर अपनी आवाज उठा रहे थे। ग्रामीणों की तरफ से 10 जून को मामले में डीसी को एक ज्ञापन दिया गया था। 16 जून को ग्रामीणों की तरफ से मुख्यमंत्री का आवास घेरने के लिए एक आंदोलन किया था। लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हें मुल्लापुर बैरियर पर ही रोक लिया था। इसके बाद 17 जून को इलाके की विधायक अनमोल गगन मान ने ग्रामीणों के साथ एक बैठक की थी और सरकार की तरफ से ग्रामीणों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इसके साथ साथ ग्रामीणों की तरफ से 9 जून को हाईकोर्ट में एक केस दायर किया था। इसमें फाइनेंशियल कमिश्नर की ओर से एक जून को पारित किए गए आदेश पर रोक लगाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 18 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
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हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि यह हमारी पुश्तैनी जमीन है। इसको सरकार धक्केशाही करके हमारे से छीन नहीं सकती। इस जमीन के लिए हम हर संभव लड़ाई लड़ेंगे और कानूनी लड़ाई में भी हमारी जीत होगी।
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