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आप के सत्ता में आने पर भी पूरा नहीं हुआ दिल्ली मॉडल स्कूल का सपना

Sat, 23 Apr 2022 01:12 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2022 01:12 AM IST
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'Responsibility for five classes, heavy on one teacher'
बनूड़। आजादी के सात दशक बाद भी गांव खलौर स्थित प्राइमरी स्कूल की सुध किसी ने नहीं ली, जबकि इस दौरान कई सरकारें आई और गईं। स्कूल की वर्तमान स्थिति ये है कि एक से पांचवीं कक्षा तक के 70 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है, जो उस पर भारी पढ़ रही है। शिक्षक को बच्चों के भविष्य की चिंता सताती रहती है। हालांकि, गांव के कुछ युवकों ने इस दिशा में सराहनीय फैसला लिया है। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर किसी तरह का प्रभाव न पड़े इसके लिए एक शिक्षिका को रखा है, जिसे वेतन वह अपने खर्च में से पैसे निकाल कर दे रहे हैं।
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सत्ता में आई आम आदमी पार्टी से गांव के लोगों को उम्मीद है कि बहुत जल्द प्राइमरी स्कूल के दिन बहुरेंगे। सरकार स्कूल का जीर्णोद्धार करवाने के साथ पर्याप्त स्टाफ की भी व्यवस्था करेगी। इससे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलने के साथ उनके जीवन स्तर में भी सुधार होगा। गांव के लोगों को उम्मीद है कि दिल्ली की तरह उनके स्कूल का भी कायाकल्प जल्द होगा। गांव खलौर के नंबरदार सतनाम सिंह सत्ता खलौर, ठेकेदार शेर सिंह, इंद्रजीत और पंच गुरदीप सिंह ने बताया कि आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी गांव में केवल सरकारी प्राइमरी स्कूल ही है। 2019 से केवल एक शिक्षक पांच कक्षाओं के 70 बच्चों को पढ़ाता आ रहा था।
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उन्होंने बताया कि दिल्ली की तरह आप सरकार से स्कूल में और शिक्षक रखने की मांग की गई है लेकिन यह सपना कब पूरा होगा इसके बारे में अभी कुछ कहना ठीक नहीं है। गांव के लोगों ने बताया कि स्थानीय युवकों ने नंबरदार सतनाम सिंह के नेतृत्व में खुद ही गांव निवासी कोमलजीत कौर को अपने खर्चे पर बतौर शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने के लिए रख लिया है। युवकों ने शिक्षिका को एक महीने का वेतन भी दे दिया है। उन्होंने इलाके के समाजसेवियों को इस अभियान में योगदान देने के लिए कहा है, ताकि बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो और वह निजी स्कूलों की महंगी फीस से बच सकें।
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