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Mohali: आरोपी का एफआईआर में नाम नहीं तो सलाखों में क्यों रखा, मोहाली कोर्ट ने मंजूर की जमानत याचिका
Wed, 17 Jan 2024 12:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 17 Jan 2024 12:24 PM IST
सार
आरोपी को इरादा-ए-कत्ल मामले में सह-अभियुक्त के बयान पर नामजद किया गया था। अदालत के सामने आया कि वारदात के समय वह मौके पर मौजूद ही नहीं था। उस समय वह अपने पैतृक गांव जिला फिरोजपुर में था। आरोपी ने अपने तर्क के समर्थन में उसने घटना वाली रात की तस्वीरें रिकार्ड के तौर पर अदालत में पेश कीं।
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Court order
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विस्तार
इरादा कत्ल के एक मामले में नामजद आरोपी सहजप्रीत सिंह कंग उर्फ सहज की नियमित जमानत याचिका को मोहाली अदालत ने मंजूर कर लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का नाम एफआईआर में ही नहीं है तो उसे सलाखों के पीछे क्यों रखा, यह ठीक नहीं है।
अदालत को बताया गया कि इस मामले में उसे सह-अभियुक्त सुखताज सिंह के बयान पर नामजद किया गया था। अदालत को आरोपी पक्ष ने बताया कि कथित वारदात के समय सहजप्रीत सिंह मौके पर मौजूद ही नहीं था। उस समय वह अपने पैतृक गांव जिला फिरोजपुर में था। आरोपी ने अपने तर्क के समर्थन में उसने घटना वाली रात की तस्वीरें रिकार्ड के तौर पर अदालत में पेश कीं। अदालत ने कहा कि अभियुक्त मामले का सामना करने के लिए तैयार है।
अदालत ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि इस मामले में अभी तक पुलिस ने चालान पेश नहीं किया है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को हिरासत में रखना उचित एवं न्यायसंगत नहीं होगा। अभियुक्त को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए 50 हजार रुपये की राशि के जमानत बांड और उतनी ही राशि की एक जमानत राशि भरने के निर्देश देते हुए उसकी नियमित जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। बशर्ते कि वह सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित होगा। वह अभियोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।
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पुलिस ने किया था जमानत का विरोध
वहीं, दूसरी ओर सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया था और दलील रखी थी कि आरोपी के खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं। अगर उसे जमानत मिली तो वह दोबारा अपराध कर सकता है। वह देश छोड़ सकता है। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को पुलिस और अदालत के सामने सच्चे बयान देने से रोक सकता है। उन्होंने जमानत अर्जी खारिज करने की प्रार्थना की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मंजूर कर लिया।
यह था मामला
इस मामले में एफआईआर शिकायतकर्ता जगदीप सिंह के बयान पर दर्ज की गई थी। उसने बयान में में बताया था कि 18 नवंबर, 2023 की सुबह करीब साढ़े दस बजे वह चीमा चौक के पास रेहड़ी पर चाय पी रहा था। इसी दौरान एक सफेद कार वहां आई और उसमें से सुखदीप सिंह, सुखताज सिंह और हरजीत सिंह उर्फ काला और 2-3 अज्ञात व्यक्ति सवार थे। सुखदीप सिंह और जुगराज सिंह ने उसके सिर, बांई बाजू पर तलवार से वार किए। जुगराज सिंह ने 2-3 अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उसकी टांगों पर किरचों और तलवारों से वार किए थे। इसके बाद वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर गया और जब शोर मचाया तो लोग इकट्ठे हो गए और उन्होंने उसे आरोपियों से बचाया। इसके बाद सभी आरोपी अपने-अपने हथियारों सहित जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए थे। उसने पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 323, 506, 148, 149 के तहत केस दर्ज किया गया था।
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अदालत को बताया गया कि इस मामले में उसे सह-अभियुक्त सुखताज सिंह के बयान पर नामजद किया गया था। अदालत को आरोपी पक्ष ने बताया कि कथित वारदात के समय सहजप्रीत सिंह मौके पर मौजूद ही नहीं था। उस समय वह अपने पैतृक गांव जिला फिरोजपुर में था। आरोपी ने अपने तर्क के समर्थन में उसने घटना वाली रात की तस्वीरें रिकार्ड के तौर पर अदालत में पेश कीं। अदालत ने कहा कि अभियुक्त मामले का सामना करने के लिए तैयार है।
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अदालत ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि इस मामले में अभी तक पुलिस ने चालान पेश नहीं किया है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को हिरासत में रखना उचित एवं न्यायसंगत नहीं होगा। अभियुक्त को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए 50 हजार रुपये की राशि के जमानत बांड और उतनी ही राशि की एक जमानत राशि भरने के निर्देश देते हुए उसकी नियमित जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। बशर्ते कि वह सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित होगा। वह अभियोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।
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पुलिस ने किया था जमानत का विरोध
वहीं, दूसरी ओर सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया था और दलील रखी थी कि आरोपी के खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं। अगर उसे जमानत मिली तो वह दोबारा अपराध कर सकता है। वह देश छोड़ सकता है। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को पुलिस और अदालत के सामने सच्चे बयान देने से रोक सकता है। उन्होंने जमानत अर्जी खारिज करने की प्रार्थना की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मंजूर कर लिया।
यह था मामला
इस मामले में एफआईआर शिकायतकर्ता जगदीप सिंह के बयान पर दर्ज की गई थी। उसने बयान में में बताया था कि 18 नवंबर, 2023 की सुबह करीब साढ़े दस बजे वह चीमा चौक के पास रेहड़ी पर चाय पी रहा था। इसी दौरान एक सफेद कार वहां आई और उसमें से सुखदीप सिंह, सुखताज सिंह और हरजीत सिंह उर्फ काला और 2-3 अज्ञात व्यक्ति सवार थे। सुखदीप सिंह और जुगराज सिंह ने उसके सिर, बांई बाजू पर तलवार से वार किए। जुगराज सिंह ने 2-3 अज्ञात लोगों के साथ मिलकर उसकी टांगों पर किरचों और तलवारों से वार किए थे। इसके बाद वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर गया और जब शोर मचाया तो लोग इकट्ठे हो गए और उन्होंने उसे आरोपियों से बचाया। इसके बाद सभी आरोपी अपने-अपने हथियारों सहित जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए थे। उसने पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 323, 506, 148, 149 के तहत केस दर्ज किया गया था।