फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   Punjab CM Charanjit Channi Native city Kharar Is Struggling with Problems

खरड़ की गुहार: समस्याओं से जूझ रहा सीएम चन्नी का पैतृक शहर, अब बंधी आस, होगा शहर का विकास

Mon, 25 Oct 2021 02:12 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरड़/मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरड़/मोहाली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 25 Oct 2021 02:12 PM IST
सार

खरड़ अब भले ही सीएम सिटी के रूप में जाना जा रहा है, लेकिन इसका इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। भगवान राम के पूर्वजों से भी इसका नाता है। आज भी यहां अज सरोवर है। इसे भगवान श्रीराम के दादा महाराजा अज ने बनवाया था। आज यह बदहाल है।

विज्ञापन
Punjab CM Charanjit Channi Native city Kharar Is Struggling with Problems
मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी खरड़ के गांव भजौली में जन्मे हैं। गांव की कच्ची गलियों में उनका बचपन बीता है। यहीं पले बढ़े। उनके दोस्त आज भी गांव में रहते हैं। उनके साथ बिताए दिनों को याद करते हैं। बेहद साधारण परिवार में जन्मे चन्नी नगर काउंसिल के प्रधान भी रहे हैं।
विज्ञापन


अब जबकि भजौली का बेटा मुख्यमंत्री बना है तो उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। गांव ही नहीं इलाके के लोग भी चाहते हैं कि उनकी जो समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं, उनका निपटारा किया जाए। मांगें बहुत बड़ी भी नहीं हैं। मसलन खरड़ में बस स्टैंड, लड़कियों के लिए कॉलेज बन जाए। रडियाला से तियुड़ व सहौड़ा से तियुड तक रोड को पक्का कर 12 से 18 फुट चौड़ा कर दिया जाए। इसी तरह  गांव सहौड़ा अल्लांपुर जाने वाली सड़क भी पक्की की जाए। गांव में एक आयुर्वेदिक या कोई अन्य डिस्पेंसरी बनाई जाए। जिस तालाब से चन्नी की माता अपना घर लीपने के लिए मिट्टी लाती थीं, उसकी चहारदीवारी की जाए। साथ ही तालाब की पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए।
विज्ञापन


भजौली के लोग क्या कहते हैं
गांव के लिए हमेशा अग्रसर रहे हैं चन्नी

चरणजीत सिंह चन्नी शुरू से ही गांव के कार्यों के लिए अग्रसर रहे हैं। पानी की टंकी हो या नया कम्यूनिटी सेंटर, उनकी वजह से ही बन पाया। मुझसे उम्र में छोटे हैं। पांचवीं तक इसी गांव के स्कूल में पढ़ाई की है।   -रंधीर सिंह गांव निवासी
विज्ञापन
विज्ञापन


गर्व होता है कि गांव का बेटा सीएम बना
हमें बड़ा गर्व है कि हमारे गांव भजौली का बेटा आज पंजाब का मुख्यमंत्री है। चन्नी ने गांव के लिए बहुत योगदान दिया है। अब उनसे उम्मीद है कि गांव में बने तालाब की चहारदीवारी करवा दें। ताकि कोई हादसा न हो। - हिम्मत सिंह, गांव निवासी

सोशल मीडिया पर देते हैं जवाब
सीएम चन्नी पढ़ाई लिखाई के शौकीन हैं। वह अब तक पढ़ाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। लोगों की दिक्कत सुनते हैं। हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं।  - परविंदर सिंह, गांव निवासी

शुरू से ही नेतृत्व का गुण
चन्नी साहिब मेरे से उम्र में बड़े हैं, लेकिन पूरे परिवार के साथ उनका लगाव रहा है। वह पढ़ने में काफी होशियार थे। नेतृत्व करने का गुण उनमें शुरू से था। वह लोगों की दिक्कतों को समझते हैं।  -भूपिंदर सिंह, गांव के पूर्व सरपंच एवं चचेरा भाई

सीएम के पिता ने भी करवाया काम
चन्नी के पिता ने भी गांव के विकास में पूरा सहयोग दिया है। क्योंकि वह गांव के सरपंच रह चुके हैं। एक मांग पत्र बनाकर हमने सीएम को भेजा है। उम्मीद है कि वह उचित फैसला लेंगे। मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उन्होंने करोड़ों रुपये की कई ग्रांटें गांव को दी है। जिससे गांव में विकास चल रहा है।  -हरपाल सिंह, तहसीलदार

खरड़ समेत पूरे पंजाब में होगा विकास
खरड़ मेरा अपना शहर है। शहर की दिक्कतों को मैं अच्छी तरह से समझता हूं। कोशिश की जाएगी कि शहर के लिए बेहतर किया जाए। साथ ही खरड़ के साथ पूरे पंजाब को विकास के पथ पर आगे ले जाना ही मेरा लक्ष्य है। -चरणजीत सिंह चन्नी, मुख्यमंत्री पंजाब

खरड़ के लोगों की उम्मीदें

मोहाली की तर्ज पर हो खरड़ का विकास
सुबह अपने घर से अदालत जाते थे तो चन्नी के पिता से जरूर मुलाकात करते थे। वह चाहते हैं कि मोहाली की तर्ज पर खरड़ का विकास हो, ताकि लोगों का जीवन स्तर सुधरे। -तारा चंद, सीनियर एडवोकेट

नगर काउंसिल की इमारत बनाई जाए
नगर काउंसिल की नई इमारत बनाने का जो काम अधर में लटका पड़ा है, उसे मुख्यमंत्री खुद रुचि दिखाते हुए पहल के आधार पर पूरा करवाएं।  -पंकज चड्ढा, समाज सेवी

खरड़ के साथ लगते गांवों की बदले सूरत

सीएम उनके पुराने मित्रों में से एक हैं। वह चाहते है कि सीएम अपने कार्यकाल में खरड़ के साथ लगते गांवों में भी विकास कार्य करवाएं। ताकि गांव के लोगों को शहर जैसी सुविधाएं मिल पाएं। -सुरिंदर सिंह, चन्नी के मित्र

शहर में पानी की दिक्कत दूर हो

कजौली पाइपलाइन से खरड़ के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करवाई जाए। इसके आदेश कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली सरकार पहले ही कर चुकी है। लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है। -नरेश कुमार जैन

डंपिंग ग्राउंड की गंदगी से मिले राहत

खरड़ स्टेडियम के पास बने डंपिंग ग्राउंड को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। ताकि शहर को बदबू से राहत मिल सके। इसके कारण लोगों को बहुत परेशानी होती है। -मोहम्मद इकबाल,  समाज सेवी

गौरवपूर्ण है इतिहास, भगवान राम से है नाता
खरड़ अब भले ही सीएम सिटी के रूप में जाना जा रहा है, लेकिन इसका इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। भगवान राम के पूर्वजों से भी इसका नाता है। आज भी यहां अज सरोवर है। इसे भगवान श्रीराम के दादा महाराजा अज ने बनवाया था। आज यह बदहाल है। इसके संरक्षण की जरूरत है। अंग्रेजी हुकूमत के समय भी अंबाला के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर खरड़ ही था। उस समय चंडीगढ़ या मोहाली की पहचान तक नहीं थी। आजादी के बाद पंजाब का सबसे बड़ा विधानसभा हलका भी खरड़ ही बना। खरड़ को गेटवे ऑफ पंजाब भी कहा जाता था। कितने ही दिग्गज खरड़ के आंगन से निकलकर देश दुनिया में चमक रहे हैं। बीजेपी के सत्यपाल जैन और जगमोहन सिंह कंग ऐसे ही नाम हैं।

पुराना बाजार रहता है हमेशा गुजलार
खरड़ का पुराना बाजार हमेशा ग्राहकों से गुलजार रहता है। यहां सुई से लेकर हर तरह का बड़े से बड़ा सामान मिलता है। सोने, चांदी, लोहा, इस्पात, कपड़ा, मसाले इत्यादि की बहुत दुकाने हैं। पक्का दरवाजा पार करते ही बाजार शुरू हो जाता है। पुराने समय से ही अपनी पहचान है। पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से भी लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। अनाज मंडी तो पूरे सूबे में प्रसिद्ध है। शिक्षा के लिहाज से भी खरड़ मुफीद है। 50 से अधिक देशों के विद्यार्थी निजी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ते हैं।


लोहड़ी से लेकर क्रिसमस तक की धूम
खरड़ में अधिकतर लोग नौकरीपेशा और व्यापारी हैं। सभी त्योहारों को लोग मिल जुलकर मनाते हैं। 60 फीसदी आबादी सिखों की है। जबकि बाकी आबादी में हिंदू, क्रिश्चियन, मुस्लिम आदि हैं। लोहड़ी से लेकर क्रिसमस तक सब धूमधाम से मनाते हैं।

लखनवी कबाब ही नहीं,  बिहार का लिट्टी चोखा भी
खाने के शौकीनों के लिए तो यहां किसी तरह की कमी नहीं है। लखनऊ के कबाब से लेकर हिमाचल का सिड्डू और धाम। बिहार का लिट्टी चोखा और बरेली की बर्फी सब आपको मिलेगा। इन दुकानों पर हर समय भीड़ लगी रहती है।

साक्षरता दर
अगर मोहाली जिले की बात करे तो जिले की साक्षरता दर 82 फीसदी है। जबकि खरड़ शहर की साक्षरता दर 72 फीसदी है। इसमें पुरुष और महिलाएं बिलकुल बराबर हैं। यहां के वाहन पीबी 027 नाम से जाने जाते हैं।

खरड़ की प्रमुख समस्याएं
1. ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी दिक्कत है
2. लावारिस पशु और कुत्ते
3. सिटी बस सर्विस का कोई इंतजाम नहीं
4. शहर की सफाई और सौंदर्यीकरण की जरूरत
5. कई इलाकों में पानी का संकट
6. रियल एस्टेट माफिया
7. पुलिस के सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
8. कोई बड़ा पार्क या लाइब्रेरी की सुविधा नहीं

चुनौतियां जिन्हें दूर करना है जरूरी
  • खरड़ तेजी से विकसित होता शहर है। लगातार बढ़ रही आबादी के कारण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। सीवरेज, जाम, पार्किंग की समस्या गंभीर है। सीवरेज लाइन बहुत पुरानी हो चुकी है। इसका गंदा पानी निकलकर सड़क पर बहने लगता है। 
  • खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की जरूरत है। इसके अभाव में युवाओं को खेलने के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला जाना पड़ता है। 
  • कम्युनिटी सेंटर की सुविधा नहीं है। इसके बिना लोगों को अपने शादी समारोह या अन्य आयोजनों के लिए महंगे होटल और मैरिज पैलेस में जाना पड़ता है। 
  • नगर काउंसिल प्रधान रहते चन्नी ने खानपुर में कम्युनिटी सेंटर बनाया था। खरड़ फ्लाईओवर के दौरान नगर परिषद पुराना दफ्तर की जमीन अधिग्रहीत हो जाने की वजह से इसी नगर काउंसिल में शिफ्ट कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed