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Mohali News: फ्लैट के लाखों रुपये लेकर नहीं दिया पजेशन, 18 फीसदी ब्याज के साथ लौटानी होगी राशि

Tue, 15 Oct 2024 04:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:55 AM IST
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Possession of flat not given after taking lakhs of rupees, amount will have to be returned with 18 percent interest
मोहाली। फ्लैट की लाखों रुपये की कीमत लेकर पजेशन न देने और शिकायतकर्ता पर 15 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ-साथ निगरानी एवं वार्ड शुल्क का भुगतान करने का दबाव बनाने पर उपभोक्ता अदालत ने बिल्डर को जुर्माना लगाया है। बिल्डर को फ्लैट की कीमत 18 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यू चंडीगढ़ निवासी रूचिका ने पंजाब स्टेट फैडरेशन ऑफ कॉपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी (हाउसफैड) के मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने हाउसफैड को जुर्माना लगाया है। बिल्डर को अनुचित व्यवहार के चलते एक हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान भी करना होगा और शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए नुकसान के मद्देनजर डीसी दर के अनुसार मुआवजा भी देना होगा।
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रूचिका ने शिकायत दी थी कि हाउसफैड ने चंडीगढ़-राजपुरा रोड पर एक आवास योजना में श्रेणी-1 फ्लैट के लिए आवेदन किया था, जिसका नाम कॉपरेटिव हाउसिंग स्कीम बनूड़ था। बिल्डर ने एक विज्ञापन दिया जिसमें निर्मित फ्लैटों के लिए सहकारी आवास योजना का जिक्र किया गया था और आसान किस्तों पर फ्लैट देने की बात कही थी। शिकायतकर्ता ने 22 जून 2009 को फ्लैट बुक करवाया। आवंटन पत्र के अनुसार फ्लैट की कुल लागत का 60 फीसदी वर्ष 2011 तक भुगतान किया जाना था और शेष 40 फीसदी (ब्याज के बिना) कब्जे की पेशकश की तारीख से 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना था। शिकायतकर्ता ने 21 जुलाई 2009 से 11 जुलाई 2011 तक विभिन्न तारीख पर डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से बिल्डर को 12 लाख 11 हजार रुपए का भुगतान किया। ब्रोशर में कब्जे की पेशकश की तिथि के बारे में कोई उल्लेख नहीं था। बिल्डर का कहना था कि वर्ष 2011 में उन्हें पजेशन दे दिया जाएगा। 5 वर्ष से अधिक समय के बाद बिल्डर ने पत्र के माध्यम से कब्जा देने के बजाय शिकायतकर्ता को 20 लाख 41 हजार 639 रुपए और जमा करने के लिए कहा, जो फ्लैट की बढ़ी हुई कीमत 32 लाख 50 हजार रुपए थी, जो ब्रोशर की कीमत से 65 फीसदी अधिक थी। बिल्डर ने शिकायतकर्ता पर 15 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ-साथ निगरानी एवं वार्ड शुल्क का भुगतान करने का दबाव भी बनाया और धमकी दी कि पूरी जमा राशि जब्त करके फ्लैट का आवंटन रद कर दिया जाएगा। शिकायतकर्ता ने 4 मार्च 2015 को पत्र के माध्यम से बिल्डर के समक्ष 20 लाख 41 हजार 639 रुपए की बढ़ी हुई कीमत जमा करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की। हालांकि, बिल्डर ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय शिकायतकर्ता को फ्लैट रद्द करने और शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गई राशि जब्त करने की धमकी देना जारी रखा। शिकायतकर्ता ने अपनी राशि वापिस करने की मांग की, लेकिन बिल्डर नहीं माना। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता अदालत में याचिका दायर की और अदालत ने तथ्यों की जानकर बिल्डर को जुर्माना लगाया।
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