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निजी कॉलेजों की भरमार, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज का इंतजार

Mon, 24 Jan 2022 02:12 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 02:12 AM IST
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Plenty of private colleges in Mohali, waiting for government engineering college
मोहाली। चंडीगढ़ के साथ बसे वीआईपी जिले में निजी इंजीनियरिंग, नर्सिंग, बिजनेस कॉलेज और यूनिवर्सिर्टीज की भरमार है। लेकिन इलाके को अभी तक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज का इंतजार है। इसका खामियाजा विद्यार्थी और उनके अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। कुछ युवाओं को तो चंडीगढ़ में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जबकि जिन्हें वहां दाखिला नहीं मिल पा रहा है, उनका करियर तक प्रभावित हो रहा है। ऐसे कई तो निजी कॉलेजों में पढ़ने की अपेक्षा विदेशों में जाकर वहीं पर बसने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे परिजनों और पंजाब दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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अंग्रेजों के जमाने से मोहाली की पहचान पहले खरड़ से ही थी। 1975 में मोहाली शहर बसना शुरू हो गया था। 1884 में फेज-6 में सरकारी कॉलेज स्थापित हो गया था। इसके बाद से यहां पर कोई सरकारी कॉलेज नहीं बन पाया। हालांकि निजी कॉजेलों और यूनिवर्सिटीज का पूरी तरह से जाल बिछ गया है। शहर में 25 से अधिक कॉलेज और दो यूनिवर्सिटी चल रही हैं, जबकि जल्द ही दो यूनिवर्सिर्टी खुलने वाली हैं। इसके अलावा मोहाली में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान भी आए हैं। यहां पर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी छात्र पढ़ाई करते हैं। लेकिन निजी कॉलेजों की फीस और खर्च काफी महंगे हैं। ऐसे में कई छात्रों को तो बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। जबकि कुछ अभिभावक अपने बच्चों को यहां पर पढ़ाने के बजाय विदेशों में भेजने को तरजीह देते हैं। जबकि इस मामले को इलाके की समाजसेवी संस्थाएं गंभीरता से उठाती हैं। उनका मानना है कि एक इंजीनियरिंग कॉलेज की जरूरत है। इसके लिए वह जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक को पत्र लिख चुके हैं। वह लगातार सरकार से संपर्क में रहते हैं। इस काम के लिए टीम तक गठित की गई है और जल्द ही यह सपना भी सच होगा।
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83 फीसदी से अधिक है साक्षरता दर
मोहाली शहरी एरिया का विस्तार काफी अधिक हो गया है। अब मोहाली सेक्टर-57 से लेकर 125 तक बस गया है। वहीं, तीन लाख से अधिक आबादी शहर की हो गई है। जबकि बाहरी राज्यों से कई लोग वहां पर आकर बस गए हैं। अब मोहाली जिले की साक्षरता दर 83.80 फीसदी व शहरी एरिया की साक्षरता दर 93 फीसदी है।
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नौ साल इंतजार के बाद शुरू हुआ मेडिकल कॉलेज
आखिरकार नौ साल के इंतजार के बाद फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेड़कर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज खुल पाया है। नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। संस्थान को 100 एमबीबीएस की सीटों की मंजूरी मिली है। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज फरीदकोट के अधीन रेगुलर कक्षाएं चलेंगी। डॉ. भवनीत भारती को डायरेक्टर प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है। स्टाफ और अन्य चीजों की भरती प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज बहुत जरूरी
शहर का विस्तार काफी हो चुका है। जनसंख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में यहां पर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज समय की बहुत बड़ी जरूरत है। पहले हम मेडिकल कॉलेज के पीछे लगे थे, जो कि अब शहर को मिल गया है। कोशिश यही है कि अब सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू खोला जाए। इसके लिए सरकार और प्रशासन से लगातार वह संपर्क कर रहे हैं। अगर यह संस्थान खुलता है तो अपने बच्चे विदेश जाने से रुक जाएंगे। -पीएस विरदी, प्रधान कंज्यूमर प्रोटेक्शन फेडरेशन, मोहाली।
निजी कॉजेलों में पढ़ाई बहुत महंगी
निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग समेत सभी विषय की पढ़ाई महंगी है। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में तो केवल मैरिट पर आने वाले बच्चों को दाखिला दिया जाता है। ऐसे में जिले में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की जरूरत है, ताकि आम घरों के बच्चों को अच्छी पढ़ाई नसीब हो सके।
-अरुण शर्मा पूर्व पार्षद।
चंडीगढ़ में मुश्किल से लगता है नंबर
चंडीगढ़ के कॉलेजों में लिमिटेड सीटें रहती हैं। साथ ही वहां पर पहले चंडीगढ़ के स्कूलों के छात्रों को चुना जाता है। इसके बाद मोहाली या अन्य इलाके के लोगों का नंबर आता है। हमारी सरकार से एक अपील की है कि छात्रों के करियर को ध्यान में रखकर इस दिशा में फैसला लिया जाएगा। -गौतम, छात्र।

निजी कॉलेजों में हर अभिभावक बच्चों नहीं पढ़ा सकता
निजी कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाना या विदेश भेजना सबके बस की बात नहीं है। ऐसे में सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। मैं तो यहां तक कहता हूं कि इस बार के चुनान घोषणा पत्र में इस चीज को शामिल किया जाना चाहिए। ताकि इलाके के लोगों को फायदा हो सके।
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