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Mohali News: चंडीगढ़ की तर्ज पर सेक्टर बनाने की योजना 10 साल से फाइलों में दबी, लाखों का सर्वे बेकार कोट आएगा
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जीरकपुर। चंडीगढ़ और मोहाली की तर्ज पर शहर को योजनाबद्ध स्वरूप देने की सेक्टर योजना एक दशक बाद भी सरकारी फाइलों में दबी है। वर्ष 2013-14 में तैयार हुई इस योजना पर लाखों रुपये खर्च कर व्यापक सर्वे करवाया गया था। शहर को 16 सेक्टरों में बांटने और सेक्टरवार बोर्ड बनाने के बावजूद यह धरातल पर लागू नहीं हो सकी। सर्वे के दौरान शहरवासियों से आपत्तियां और सुझाव लिए गए थे। पूरे शहर का डिजिटल अभिलेख नगर परिषद के कंप्यूटर प्रणाली में दर्ज किया गया था। योजना लागू न होने पर भी कई संपत्तियों की कर रसीदों पर आज भी सेक्टर नंबर दर्ज है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सेक्टर व्यवस्था से पते की पहचान और मार्गदर्शन में सुविधा होती। वर्तमान में लोग पते के लिए सोसायटी, कॉलोनी और गली के नामों पर निर्भर हैं। शहर के बढ़ते आकार के बीच स्पष्ट क्षेत्रीय पहचान की कमी आपातकालीन सेवाओं के लिए भी परेशानी है।
योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति
वर्ष 2013-14 में जीरकपुर को चंडीगढ़ और मोहाली की तरह विकसित करने की योजना बनी थी। नगर परिषद ने लाखों रुपये खर्च कर शहर का सर्वे करवाया और 16 सेक्टर बनाने की तैयारी की। सेक्टरवार बोर्ड भी तैयार किए गए, लेकिन योजना कभी लागू नहीं हो पाई। आज भी कई संपत्तियों की कर रसीदों पर सेक्टर नंबर दर्ज मिलते हैं, जो प्रशासनिक कार्य का प्रमाण है।
योजना लागू होती तो बदलती शहर की पहचान
सेक्टर सिस्टम लागू हो जाता तो जीरकपुर को नई पहचान मिलती और एड्रेसिंग आसान होती। अनियोजित बसावट पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता था। राजनीतिक उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना अधर में लटक गई। - कुलभूषण शर्मा, अध्यक्ष, यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, ढकोली
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उम्मीदें पूरी नहीं हुईं
लोगों को उम्मीद थी कि सेक्टरवार नक्शे, मार्गदर्शन और मकान नंबरिंग से शहर का स्वरूप बदलेगा। आज भी पता बताने के लिए सोसायटी और गलियों के नामों का सहारा लेना पड़ता है। - डॉ. अजय यादव, अध्यक्ष, शालीमार एनक्लेव, ढकोली
सरकार बदली तो रुक गया काम
अकाली दल सरकार के समय सेक्टर बनाने का नोटिफिकेशन जारी हुआ था, लेकिन सरकार बदलते ही काम रुक गया। विकास कार्य भी ठप हैं।- एनके शर्मा, पूर्व विधायक
भाजपा सरकार आने पर लागू करने का दावा
सेक्टर योजना बेहतरीन थी, लेकिन इसे रोक दिया गया। भाजपा सरकार आने पर योजना को लागू किया जाएगा। इससे एड्रेसिंग और पिनकोड व्यवस्था में भी सुधार होगा। -संजीव खन्ना, भाजपा नेता
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योजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति
वर्ष 2013-14 में जीरकपुर को चंडीगढ़ और मोहाली की तरह विकसित करने की योजना बनी थी। नगर परिषद ने लाखों रुपये खर्च कर शहर का सर्वे करवाया और 16 सेक्टर बनाने की तैयारी की। सेक्टरवार बोर्ड भी तैयार किए गए, लेकिन योजना कभी लागू नहीं हो पाई। आज भी कई संपत्तियों की कर रसीदों पर सेक्टर नंबर दर्ज मिलते हैं, जो प्रशासनिक कार्य का प्रमाण है।
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योजना लागू होती तो बदलती शहर की पहचान
सेक्टर सिस्टम लागू हो जाता तो जीरकपुर को नई पहचान मिलती और एड्रेसिंग आसान होती। अनियोजित बसावट पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता था। राजनीतिक उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना अधर में लटक गई। - कुलभूषण शर्मा, अध्यक्ष, यूनिफाइड रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, ढकोली
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उम्मीदें पूरी नहीं हुईं
लोगों को उम्मीद थी कि सेक्टरवार नक्शे, मार्गदर्शन और मकान नंबरिंग से शहर का स्वरूप बदलेगा। आज भी पता बताने के लिए सोसायटी और गलियों के नामों का सहारा लेना पड़ता है। - डॉ. अजय यादव, अध्यक्ष, शालीमार एनक्लेव, ढकोली
सरकार बदली तो रुक गया काम
अकाली दल सरकार के समय सेक्टर बनाने का नोटिफिकेशन जारी हुआ था, लेकिन सरकार बदलते ही काम रुक गया। विकास कार्य भी ठप हैं।- एनके शर्मा, पूर्व विधायक
भाजपा सरकार आने पर लागू करने का दावा
सेक्टर योजना बेहतरीन थी, लेकिन इसे रोक दिया गया। भाजपा सरकार आने पर योजना को लागू किया जाएगा। इससे एड्रेसिंग और पिनकोड व्यवस्था में भी सुधार होगा। -संजीव खन्ना, भाजपा नेता