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Mohali News: मंजूरी के बाद लटकी योजना, अब मोहाली सर्किल मीटर टेस्टिंग के लिए पटियाला-रूपनगर पर निर्भर
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मोहाली। बड़े-बड़े दावों के बीच बिजली विभाग की एक अहम परियोजना अधर में लटक गई है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में प्रस्तावित आधुनिक मीटर टेस्टिंग लैब का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते पूरा मोहाली सर्किल मीटर जांच के लिए पटियाला और रूपनगर पर निर्भर बना हुआ है।
इस स्थिति से न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष-2024 में मोहाली में मीटर टेस्टिंग लैब स्थापित करने को मंजूरी मिली थी। शुरुआती स्तर पर स्थान चयन और अन्य औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थीं, लेकिन बाद में उसी जगह को ईस्ट जोन कार्यालय के निर्माण के लिए चिन्हित कर दिया गया। इस कारण मीटर टेस्टिंग लैब की योजना ठप हो गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, उसके बाद ही लैब पर आगे विचार होगा।
जांच के लिए दूसरे जिले में जाते हैं उपभोक्ता
मीटर टेस्टिंग में हो रही देरी का सबसे ज्यादा असर बिजली चोरी से जुड़े मामलों पर पड़ रहा है। संदिग्ध मीटरों की जांच के लिए उपभोक्ताओं को दूसरे जिलों में उपस्थित होना पड़ता है, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर खराब होने के बाद नया मीटर लगने में हफ्तों लग जाते हैं, इससे बिलिंग और बिजली आपूर्ति दोनों प्रभावित होती हैं।
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छह उप-शाखाएं बाहरी जिलों पर निर्भर
पीएसपीसीएल के अधीन मोहाली सर्किल की छह उप-शाखाएं मोहाली-1, मोहाली-2, डेराबस्सी, खरड़, लालड़ू और बनूड़ मीटर जांच के लिए बाहरी जिलों पर निर्भर हैं। जले, खराब या विवादित मीटर पहले फेज-1 स्थित शाखा में जमा किए जाते हैं। वहां से उन्हें पटियाला या रूपनगर भेजा जाता है। हर साल सैकड़ों मीटर खराब होने के बावजूद स्थानीय जांच सुविधा न होने से मामलों के निपटान में महीनों लग जाते हैं।
मोहाली में मीटर टेस्टिंग लैब का काम फिलहाल रुका हुआ है। भविष्य में ईस्ट जोन कार्यालय के साथ-साथ लैब भी बनाई जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर मीटर जांच की सुविधा मिल सके, हालांकि इस संबंध में कोई तय समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। - जसतेज सिंह टिवाणा, कार्यकारी अभियंता, मीटर टेस्टिंग शाखा
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इस स्थिति से न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष-2024 में मोहाली में मीटर टेस्टिंग लैब स्थापित करने को मंजूरी मिली थी। शुरुआती स्तर पर स्थान चयन और अन्य औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थीं, लेकिन बाद में उसी जगह को ईस्ट जोन कार्यालय के निर्माण के लिए चिन्हित कर दिया गया। इस कारण मीटर टेस्टिंग लैब की योजना ठप हो गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, उसके बाद ही लैब पर आगे विचार होगा।
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जांच के लिए दूसरे जिले में जाते हैं उपभोक्ता
मीटर टेस्टिंग में हो रही देरी का सबसे ज्यादा असर बिजली चोरी से जुड़े मामलों पर पड़ रहा है। संदिग्ध मीटरों की जांच के लिए उपभोक्ताओं को दूसरे जिलों में उपस्थित होना पड़ता है, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर खराब होने के बाद नया मीटर लगने में हफ्तों लग जाते हैं, इससे बिलिंग और बिजली आपूर्ति दोनों प्रभावित होती हैं।
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छह उप-शाखाएं बाहरी जिलों पर निर्भर
पीएसपीसीएल के अधीन मोहाली सर्किल की छह उप-शाखाएं मोहाली-1, मोहाली-2, डेराबस्सी, खरड़, लालड़ू और बनूड़ मीटर जांच के लिए बाहरी जिलों पर निर्भर हैं। जले, खराब या विवादित मीटर पहले फेज-1 स्थित शाखा में जमा किए जाते हैं। वहां से उन्हें पटियाला या रूपनगर भेजा जाता है। हर साल सैकड़ों मीटर खराब होने के बावजूद स्थानीय जांच सुविधा न होने से मामलों के निपटान में महीनों लग जाते हैं।
मोहाली में मीटर टेस्टिंग लैब का काम फिलहाल रुका हुआ है। भविष्य में ईस्ट जोन कार्यालय के साथ-साथ लैब भी बनाई जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर मीटर जांच की सुविधा मिल सके, हालांकि इस संबंध में कोई तय समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। - जसतेज सिंह टिवाणा, कार्यकारी अभियंता, मीटर टेस्टिंग शाखा