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‘पढ़ाई के दौरान अभिभावक करें बच्चों की मॉनिटरिंग’
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मोहाली। कोरोना का असर अब बहुत कम रह गया है और अब सभी स्कूल खुल गए हैं। बच्चे ऑनलाइन क्लास लगाने के बजाय स्कूल में ऑफलाइन पढ़ाई करने के लिए जाने लगे हैं। स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां करवाई जा रही हैं जिससे उनका मन स्कूल आने में लगने लगे। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि पढ़ाई के दौरान बच्चों की मॉनिटरिंग की जाए जिससे बच्चे का ध्यान इधर-उधर जाने के बजाय पढ़ाई पर रहे। यह कहना है गोल्डन बेल्स पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर गुरजीत कौर का। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते स्कूल दो साल बंद रहने के बाद अधिकतर बच्चे घर पर रहने के कारण पढ़ाई से मन चुराने लगे हैं। इनका मन पढ़ाई में लगाने के लिए लगातार बच्चों की क्लास में मॉनिटरिंग की जाने लगी है। इसके साथ ही किताब को पहले पढ़ने में विद्यार्थी 5 से 7 मिनट लगाते थे। अब वह 10 से 12 मिनट का समय लगा रहे हैं।
कोरोना महामारी के दौरान बच्चों ने पूरे दो साल तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। पढ़ाई तो कुछ घंटों की होती थी लेकिन ज्यादा समय बच्चे मोबाइल पर गेम्स खेलने में बिताते थे। इसका असर यह हुआ कि दो साल बाद बच्चे जब स्कूल पहुंचे तो पेंसिल से लिखाई की आदत नहीं रही। वहीं, सबसे पहले बच्चों को लिखने की आदत डालने के लिए निबंध और कहानियां को सुनाने के बजाय लिखकर दिखाने के लिए कहा जाता है। पढ़ाई से ऊब चुके बच्चों का मन लगाने के लिए विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करवाए गए। इसके अलावा नन्हें बच्चों के लिए क्लासेज में पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खिलौनों की व्यवस्था की गई है। इसका फायदा यह होगा कि बच्चा अपने खेल में व्यस्त रहते हुए एक से 50 तक की गिनती भी याद कर लेगा।
ऑफलाइन क्लासेज मिस कीं
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन क्लासेज के समय ऑफलाइन क्लासेज को बहुत मिस किया। अब जब क्लासेज पहले की तरह ऑफलाइन लगने लगी हैं तो पढ़ाई में मन लगने लगा है। -रूपिंदर, छात्र शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
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लिखने-पढ़ने की आदत कम हुई
दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई करने से लिखने और पढ़ने की आदत कम हो गई है। क्योंकि क्लासेज मोबाइल फोन में होती थी और दिमाग वीडियो गेम्स खेलने में लगा रहता था। -चेतन, छात्र, शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
कॉपी में लिखने की आदत कम हुई
दो साल बाद स्कूल पहुंचे तो विद्यार्थियों में किताब पढ़ने और कॉपी के अंदर लिखने की आदत कम हुई। इसका कारण दो साल तक हाथों में मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करना है। क्लास में बच्चों को रोज कहानी या निबंध पढ़ने के लिए दिया जाता है।
-प्रीति, टीचर, शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
बेटे में वीडियो गेम्स खेलने की आदत बढ़ी
पूरे दो साल तक ऑनलाइन क्लासेज के चक्कर में बेटा अब मोबाइल का आदी हो गया है। हर समय बेटे को मोबाइल फोन में गेम्स खेलने के लिए चाहिए। अब स्कूल खुल जाने के बाद मोबाइल फोन से थोड़ी दूरी बनी है। वरना बेटा पूरा दिन मोबाइल फोन में वीडियो गेम्स की खेलता रहता है। -यादविंदर सिंह, अभिभावक
पढ़ाई के समय अभिभावक ध्यान दें
अभिभावक को बच्चे की पढ़ाई के समय ध्यान देना चाहिए कि बच्चा पढ़ाई कर रहा है या नहीं। अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं है तो अभिभावक को एक दोस्त की भूमिका अदा करके उसका मन पढ़ाई में लगाया जाए। -गुरजीत कौर, डायरेक्टर, गोल्ड बेल्स पब्लिक स्कूल, मोहाली
खिलौनों की मदद से पढ़ा रहे
बच्चों का अधिकतर ध्यान पढ़ाई लिखाई में न होकर क्लासरूम से बाहर होता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को खिलौनों की मदद से पढ़ाया जाता है ताकि खेल-खेल में बच्चा एक से 50 तक गिनती की पढ़ाई भी कर ले। -आर बाला, प्रिंसिपल, शास्त्री मॉडल स्कूल, फेज-1 मोहाली।
बच्चे थोड़े आलसी हो गए
कोरोना महामारी के कारण दो साल घर में रहकर पढ़ाई करने से बच्चे का शारीरिक विकास तो हुआ। लेकिन मानसिक विकास नहीं हुआ। इसका असर यह हुआ है कि बच्चे थोड़े आलसी हो गए हैं। इनको रोज सुबह प्रार्थना से पहले व्यायाम करवाकर तंदरुस्त रखने के लिए जागरूक किया जाता है। -बॉबी, टीचर, शास्त्री मॉडल स्कूल, फेज-1 मोहाली
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कोरोना महामारी के दौरान बच्चों ने पूरे दो साल तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। पढ़ाई तो कुछ घंटों की होती थी लेकिन ज्यादा समय बच्चे मोबाइल पर गेम्स खेलने में बिताते थे। इसका असर यह हुआ कि दो साल बाद बच्चे जब स्कूल पहुंचे तो पेंसिल से लिखाई की आदत नहीं रही। वहीं, सबसे पहले बच्चों को लिखने की आदत डालने के लिए निबंध और कहानियां को सुनाने के बजाय लिखकर दिखाने के लिए कहा जाता है। पढ़ाई से ऊब चुके बच्चों का मन लगाने के लिए विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करवाए गए। इसके अलावा नन्हें बच्चों के लिए क्लासेज में पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खिलौनों की व्यवस्था की गई है। इसका फायदा यह होगा कि बच्चा अपने खेल में व्यस्त रहते हुए एक से 50 तक की गिनती भी याद कर लेगा।
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ऑफलाइन क्लासेज मिस कीं
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन क्लासेज के समय ऑफलाइन क्लासेज को बहुत मिस किया। अब जब क्लासेज पहले की तरह ऑफलाइन लगने लगी हैं तो पढ़ाई में मन लगने लगा है। -रूपिंदर, छात्र शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
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लिखने-पढ़ने की आदत कम हुई
दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई करने से लिखने और पढ़ने की आदत कम हो गई है। क्योंकि क्लासेज मोबाइल फोन में होती थी और दिमाग वीडियो गेम्स खेलने में लगा रहता था। -चेतन, छात्र, शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
कॉपी में लिखने की आदत कम हुई
दो साल बाद स्कूल पहुंचे तो विद्यार्थियों में किताब पढ़ने और कॉपी के अंदर लिखने की आदत कम हुई। इसका कारण दो साल तक हाथों में मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करना है। क्लास में बच्चों को रोज कहानी या निबंध पढ़ने के लिए दिया जाता है।
-प्रीति, टीचर, शास्त्री मॉडल स्कूल फेज-1 मोहाली
बेटे में वीडियो गेम्स खेलने की आदत बढ़ी
पूरे दो साल तक ऑनलाइन क्लासेज के चक्कर में बेटा अब मोबाइल का आदी हो गया है। हर समय बेटे को मोबाइल फोन में गेम्स खेलने के लिए चाहिए। अब स्कूल खुल जाने के बाद मोबाइल फोन से थोड़ी दूरी बनी है। वरना बेटा पूरा दिन मोबाइल फोन में वीडियो गेम्स की खेलता रहता है। -यादविंदर सिंह, अभिभावक
पढ़ाई के समय अभिभावक ध्यान दें
अभिभावक को बच्चे की पढ़ाई के समय ध्यान देना चाहिए कि बच्चा पढ़ाई कर रहा है या नहीं। अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं है तो अभिभावक को एक दोस्त की भूमिका अदा करके उसका मन पढ़ाई में लगाया जाए। -गुरजीत कौर, डायरेक्टर, गोल्ड बेल्स पब्लिक स्कूल, मोहाली
खिलौनों की मदद से पढ़ा रहे
बच्चों का अधिकतर ध्यान पढ़ाई लिखाई में न होकर क्लासरूम से बाहर होता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को खिलौनों की मदद से पढ़ाया जाता है ताकि खेल-खेल में बच्चा एक से 50 तक गिनती की पढ़ाई भी कर ले। -आर बाला, प्रिंसिपल, शास्त्री मॉडल स्कूल, फेज-1 मोहाली।
बच्चे थोड़े आलसी हो गए
कोरोना महामारी के कारण दो साल घर में रहकर पढ़ाई करने से बच्चे का शारीरिक विकास तो हुआ। लेकिन मानसिक विकास नहीं हुआ। इसका असर यह हुआ है कि बच्चे थोड़े आलसी हो गए हैं। इनको रोज सुबह प्रार्थना से पहले व्यायाम करवाकर तंदरुस्त रखने के लिए जागरूक किया जाता है। -बॉबी, टीचर, शास्त्री मॉडल स्कूल, फेज-1 मोहाली