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शिक्षक दिवस: कोरोना के कारण तनाव में आए शिक्षकों को ऑनलाइन टीचिंग के फोबिया से निकाला, फिर बनाया तकनीक का गुरु

Sun, 05 Sep 2021 07:51 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 05 Sep 2021 07:51 AM IST
सार

मोटिवेशनल स्पीकर गिरीश आनंद कहते हैं कि जब भी जिंदगी में कोई बदलाव आए तो उससे डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। उससे सफलता मिलती है।

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Motivational Speaker Girish Anand Helps Teachers to Overcome of Online Teaching Phobia
गिरीश आनंद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोनाकाल शिक्षकों की अग्नि परीक्षा थी, क्योंकि जो बदलाव एक महामारी ने चंद दिनों में कर दिया उसके बारे में तीस साल तक नहीं सोच सकते थे। सब कुछ बड़ी तेजी से बदल रहा था। ऐसे में कई शिक्षक चिंता और तनाव का शिकार हो गए। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर वह अपने आप को समय के साथ कैसे अपडेट करेंगे। ऐसे हालात में कई स्कूल मैनेजमेंट ने उनसे संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने करीब पंद्रह स्कूलों के दो सौ से अधिक शिक्षकों को ऑनलाइन टीचिंग के फोबिया से निकाला। साथ ही उन्हें पढ़ाने की नई तकनीकों से रूबरू करवाया। परिणाम यह हुआ कि टीचर का रिजल्ट भी सुधरा। वहीं, अब वह खुद नए तरीकों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह कहना है कि मोटिवेशनल स्पीकर एवं मैनेजमेंट गुरु गिरीश आनंद का। 

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उन्होंने कहा कि जब भी जिंदगी में कोई बदलाव आए तो उससे डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। उससे सफलता मिलती है। गिरीश आनंद बताते है कि जब कोरोना आया तो वह कनाडा थे। जून 2020 में वंदे भारत की फ्लाइट से इंडिया पहुंचे। इसी बीच कई स्कूलों की मैनेजमेंट ने अपने शिक्षकों को नई तकनीकों के बारे में ट्रेंड करने के लिए संपर्क किया। सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूल मैनेमजेंट को सीनियर शिक्षकों से आ रही थी। क्योंकि 45 प्लस वाले शिक्षक कंप्यूटर और अन्य तकनीकों में माहिर नहीं थे।
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शिक्षकों को जाना, इसके बाद दी ट्रेनिंग
गिरीश बताते हैं कि उन्होंने पहले शिक्षकों की सारी स्टडी की। उनकी हर दिक्कत को जानने के बाद उन्हें ट्रेनिंग दी। सबसे पहले तो उन्होंने शिक्षकों के अंदर से सीनियर होने का हौव्वा निकाला और उन्हें मोटिवेट कर यंग टीचर की तरह सोचने को कहा। करीब दो से तीन दिन में अधिकतर शिक्षक तकनीकी तौर पर माहिर हो गए। फिर उन्हें क्लास लेने के तरीके और विषय पर पकड़ मजबूत बनाई। क्लास में ऑनलाइन वीडियो चलाने से लेकर अन्य टीचिंग टूल के बारे में रूबरू करवाया। उन्होंने बताया कि दो महीनों में सारे शिक्षक माहिर बन गए। स्कूल मैनेजमेंट का कहना था कि उनके शिक्षकों का प्रदर्शन बढ़ा। वहीं, अब भी वह शिक्षकों व स्कूल मैनेजमेंट के संपर्क में है। किसी को कोई दिक्कत आती है तो वह उस समय निवारण करने के लिए तैयार रहते हैं। कोरोनाकाल में पंजाब और हरियाणा के कई कॉलेजों में गिरीश आनंद ने वेबिनार कर छात्रों को टाइम मैनेजमेंट और करिअर पर बताया।
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क्लासरूम बन गया घर छात्र हो गए ऑनलाइन
अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है, जिसे विद्यार्थियों के लिए पढ़ना और शिक्षकों के लिए पढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कोरोना के दौरान विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाने में कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ये अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक ही समझ सकते हैं। यह कहना है मोहाली के सेक्टर-77 गोल्डन बेल्स पब्लिक स्कूल में बतौर पोस्ट ग्रेजुएट अध्यापिका दीपमाला जैन का। वह स्कूल में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाती हैं। दीपमाला का कहना है कि शुरुआत में विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाने में दिक्कत आई, क्योंकि मोबाइल फोन की आवाज विद्यार्थियों तक साफ न पहुंच पाने के कारण सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा था। ऐसी परिस्थिति में मैंने मुश्किल शब्दों के स्क्रीन शॉट्स बनाकर व्हाट्सअप के जरिए विद्यार्थियों को भेजे, ताकि कक्षा के दौरान विद्यार्थियों को शब्दों को समझने में दिक्कत न आए।   

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