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टेस्टिंग ज्यादा बढ़ाएंगे और कोरोना को हराएंगे
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मोहाली। जिले में कोरोना को मात देने के लिए जिला प्रशासन ने नई योजना बनाकर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत अब रोजाना टेस्टिंग बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हालांकि सैंपलिंग लेने के साथ ही टेस्टिंग का लक्ष्य रोजाना 3000 का है, लेकिन प्रशासन करीब 4500 से 5000 तक टेस्टिंग रोजाना कर रहा है। जिससे संक्रमित लोगों की समय से पहचान करके उनका इलाज शुरू किया जा सके। डीसी डॉ. ईशा कालिया ने बताया कि टीकाकरण होने का एक फायदा यह हुआ है कि पहली और दूसरी लहर की तरह लोगों की हालत ज्यादा नहीं बिगड़ रही है। अधिकतर मरीजों का उनके घरों में ही इलाज चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी से 60 साल से अधिक उम्र या बीमारियों से पीड़ित लोगों पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में इस उम्र के जो मरीज घरों में आइसोलेशन पर चल रहे हैं प्रशासन की ओर से खुद फोन करके उनका हालचाल जाना जा रहा है। अगर उन्हें कोई दिक्कत आ रही है तो इसको दूर करने की कोशिश की जाती है। जहां तक कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन की बात है तो अभी तक जिले में एक भी केस ओमिक्रॉन का नहीं आया है। हालांकि जिले में जहां बहुत ज्यादा कोरोना के मरीज आते हैं तो वहां से जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए केस भेजे जाते हैं। काफी सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि अभी तक कुछ सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है।
अस्पतालों में इलाज के लिए इंतजाम पूरे
जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक अगर कोरोना के केस बढ़ते हैं तो ऐसे में अस्पतालों में बेड से लेकर ऑक्सीजन तक की कमी न आए, इसके लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में पूरी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों से रोजाना पूछा जाता है कि उनके यहां कितने मरीज हैं। लेवल-2 या लेवल-2 विद वेंटीलेटर वाले कितने मरीज हैं। जिससे पूरी स्थिति पर नजर रखी जा सकेे। यहां तक कि सरकारी अस्पताल में 10-12 लोग भर्ती होंगे। जबकि निजी अस्पतालों में हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली और अन्य जगह से मरीज आते है । ऐसे यह यह संख्या बढ़ जाती है।
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अस्पताल में भर्ती ने नहीं करवाया कोरोना टीकाकरण
कोरोना टीकाकरण जरूरी है। क्योंकि टीकाकरण न करवाने वाले लोगों के संक्रमित होने पर अस्पताल की जरूरत पड़ रही है। अब तक जिला सिविल अस्पताल में भर्ती केसों में वहीं लोग हैं, जिन्होंने टीकाकरण नहीं करवाया है। हालांकि जिले में अभी तक 16 लाख लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इनमें 10 लाख लोगों ने पहली डोज और 6 लाख लोगों ने दूसरी डोज लगवाई है। तीन हजार फ्रंट लाइन वर्कर अभी तक कोरोना टीकाकरण की बूस्टर डोज लगवा चुके हैं। 15 से 18 साल के 18 हजार किशोरों का टीकाकरण हो चुका है।
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जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी से 60 साल से अधिक उम्र या बीमारियों से पीड़ित लोगों पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में इस उम्र के जो मरीज घरों में आइसोलेशन पर चल रहे हैं प्रशासन की ओर से खुद फोन करके उनका हालचाल जाना जा रहा है। अगर उन्हें कोई दिक्कत आ रही है तो इसको दूर करने की कोशिश की जाती है। जहां तक कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन की बात है तो अभी तक जिले में एक भी केस ओमिक्रॉन का नहीं आया है। हालांकि जिले में जहां बहुत ज्यादा कोरोना के मरीज आते हैं तो वहां से जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए केस भेजे जाते हैं। काफी सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि अभी तक कुछ सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है।
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अस्पतालों में इलाज के लिए इंतजाम पूरे
जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक अगर कोरोना के केस बढ़ते हैं तो ऐसे में अस्पतालों में बेड से लेकर ऑक्सीजन तक की कमी न आए, इसके लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में पूरी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों से रोजाना पूछा जाता है कि उनके यहां कितने मरीज हैं। लेवल-2 या लेवल-2 विद वेंटीलेटर वाले कितने मरीज हैं। जिससे पूरी स्थिति पर नजर रखी जा सकेे। यहां तक कि सरकारी अस्पताल में 10-12 लोग भर्ती होंगे। जबकि निजी अस्पतालों में हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली और अन्य जगह से मरीज आते है । ऐसे यह यह संख्या बढ़ जाती है।
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अस्पताल में भर्ती ने नहीं करवाया कोरोना टीकाकरण
कोरोना टीकाकरण जरूरी है। क्योंकि टीकाकरण न करवाने वाले लोगों के संक्रमित होने पर अस्पताल की जरूरत पड़ रही है। अब तक जिला सिविल अस्पताल में भर्ती केसों में वहीं लोग हैं, जिन्होंने टीकाकरण नहीं करवाया है। हालांकि जिले में अभी तक 16 लाख लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इनमें 10 लाख लोगों ने पहली डोज और 6 लाख लोगों ने दूसरी डोज लगवाई है। तीन हजार फ्रंट लाइन वर्कर अभी तक कोरोना टीकाकरण की बूस्टर डोज लगवा चुके हैं। 15 से 18 साल के 18 हजार किशोरों का टीकाकरण हो चुका है।