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Kargil Vijay Diwas 2021: अपने शहीदों को खूब सम्मान देता है मोहाली, शहर की शान है कारगिल का हीरो 'त्रिशूल'

Mon, 26 Jul 2021 02:18 AM IST
मोहाली ब्‍यूरो नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: मोहाली ब्‍यूरो Updated Mon, 26 Jul 2021 02:18 AM IST
सार

कारगिल युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था। ‘मिग-21’ विमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पायलट के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विमान उनके लिए ताबूत बन सकता है। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने इसकी परवाह न करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था। 

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Fighter Aircraft Trishul used in Kargil war is Pride of Mohali 
मोहाली में रखा लड़ाकू विमान त्रिशूल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पॉलीवुड की मायानगरी के नाम से विख्यात पंजाब के वीआईपी शहर मोहाली की एक पहचान और भी है। इस शहर के कई संस्थान, सड़कें व पार्क देश के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान करने वाले शहीदों के नाम पर हैं। इतना ही नहीं कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला लड़ाकू विमान त्रिशूल भी मोहाली की शान है। 

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मोहाली में संस्थानों, पार्कों व सड़कों को शहीदों का नाम देना युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास है। ताकि वे देश के वीर सपूतों के बारे में जान सकें। इसी उद्देश्य से कारगिल युद्ध के बाद सेक्टर 71 में कारगिल पार्क की स्थापना की गई थी। मोहाली के सरकारी कॉलेज को भी यु्द्ध में शहीद हुए मेजर हरमिंदर पाल सिंह का नाम दिया गया। इसके अलावा मोहाली के महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेस प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट में मिग-21 लड़ाकू विमान खड़ा है, जिसका भारतीय नाम त्रिशूल है। इस लड़ाकू विमान ने कारगिल युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे किए थे। इसे 2012 में यहां लाया गया था।

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फेज-6 के सरकारी कॉलेज को मिला शौर्य चक्र विजेता शहीद मेजर हरमिंदर पाल सिंह का नाम

फेज-छह स्थित सरकारी कॉलेज का नाम 1999 में शहीद हुए शौर्य चक्र विजेता मेजर हरमिंदर पाल सिंह के नाम पर है। मेजर हरमिंदर पाल सिंह ने कारगिल युद्ध के दौरान राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपनी शहादत दी थी। मरणोपरांत उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। मेजर ने अपनी पढ़ाई खरड़ के खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल और मोहाली के गवर्नमेंट कॉलेज से की थी। वह एनसीसी में शामिल हो गए थे। इसके बाद वे सेना में भर्ती हुए। उनके पिता हरपाल सिंह भी सेना से कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

कारगिल पार्क की हुई स्थापना
कारगिल युद्ध के बाद मोहाली के सेक्टर-71 में कारगिल पार्क की स्थापना की गई। यह काफी आकर्षक पार्क है। इसकी लैंड स्केपिंग काफी शानदार है। पार्क में एक विशेष फव्वारा स्थापित किया गया है, जहां पर शानदार म्यूजिक चलता है। 

महाराजा रणजीत सिंह एएफपीआई में है त्रिशूल

22 साल पहले दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो का फाइटर प्लेन ‘मिग-21’ (त्रिशूल) मोहाली की शान है। कारगिल युद्ध के दौरान बठिंडा में तैनात वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो को दुश्मन से लोहा लेने का जिम्मा सौंपा गया था। वायुसेना के 300 जांबाज पायलट 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते थे। कारगिल युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था। ‘मिग-21’ विमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पायलट के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विमान उनके लिए ताबूत बन सकता है। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने इसकी परवाह न करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था। 

पाकिस्तानी वायुसेना ने इस ऊंचाई पर लड़ने से साफ इनकार कर दिया था। इस ऐतिहासिक जंग के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा रहे एक ‘मिग-21’ लड़ाकू विमान को 2012 में मोहाली लाया गया था। जो इन दिनों राज्य के इकलौते आर्म्ड फोर्सेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शोभायमान है। एएफपीआई के डायरेक्टर मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल ने तत्कालीन एयर चीफ मार्शल से कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले एक मिग विमान को इंस्टीट्यूट के परिसर में स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा था। एयर चीफ मार्शल ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए बठिंडा में तैनात ‘मिग-21’ को मोहाली भेजने के आदेश दिए। इसके बाद मई, 2012 में यह भारतीय वायुसेना का यह लड़ाकू विमान मोहाली लाया गया और इसे एएफपीआई परिसर में स्थापित किया गया।

ऐसा है दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाला त्रिशूल
  • कारगिल वॉर के हीरो इस ‘मिग-21’ का भारतीय नाम त्रिशूल है
  • यह विमान 2125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है
  • कारगिल युद्ध से पहले यह विमान 1971 और 1965 के युद्ध में दुश्मन से लोहा ले चुका है
  • इस लड़ाकू विमान में 23 एमएम गन लगी हैं
  • यह विमान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागने में सक्षम है
  • पांच-पांच सौ किलो के दो भारी भरकम बम ले जाने और दागने की क्षमता रखता है
  • विमान का वजन 8000 किलो है
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