{"_id":"61bbaaef048676419a31eaa8","slug":"lab-owners-across-punjab-descended-the-path-of-struggle-mohali-news-pkl4363026184","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब भर के लैब मालिक उतरे संघर्ष की राह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब भर के लैब मालिक उतरे संघर्ष की राह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। पंजाब भर में चलने निजी लैबों के मालिक संघर्ष पर आ गए हैं। उनकी दलील है कि केंद्र सरकार की ओर से लैब संबंधी जो नया एक्ट लागू किया गया है, उससे राज्य की अधिकतर निजी लैब बंद हो जाएंगी, हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। साथ ही लोगों से लूट होगी और उनकी सेहत पर पूरा असर पड़ेेगा। क्योंकि यह कानून भी कृषि कानूनों की तर्ज पर निजी मेडिकल कंपनियों को फायदा देने के लिए बनाया गया है। ऐसे में उक्त एक्ट के विरोध में संघर्ष की राह पर आना पड़ा है। यह बात वीरवार को सेक्टर-69 स्थित पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के बाहर जुटे लैब मालिकों ने कही। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए एएपी कानून के जरिए पंजाब के सभी सरकारी अस्पतालों में होने वाली टेस्टिंग का काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जाता है। जिसका असर पंजाब भर के प्राइवेट बेसिक मेडिकल लैबोरेट्री में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के सभी सरकारी अस्पतालों में चलने वाली लैब को महाराष्ट्र के एक प्राइवेट कंपनी को ठेके में दे दिया है। जिसके बाद से कॉर्पोरेट घरानों की नजर पंजाब में चल रही 15000 से भी ज्यादा छोटी बेसिक मेडिकल लैबोरेट्री पर पड़ी गई है। वहीं पंजाब सरकार ताकत का इस्तेमाल करते हुए पंजाब में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर चुप्पी साधी हुई हैं। सरकार ने मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के जरिए केंद्र सरकार का नया कानून लाने की योजना बनाई है। जिसका नाम एएचपी काउंसिल बिल है। केंद्र सरकार के इस कानून में हर तरह के प्रोफेशनल की परिभाषा दी गई है। मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री के साथ लगभग 7 बार मीटिंग हो चुकी है। लेकिन पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट की ओर से एक्ट को जबरदस्ती लागू किया जा रहा है। एक्ट में कहा गया है कि पंजाब की सभी लेबोरेटरी में एक एमबीबीएस को तैनात किया जाए। ऐसे में महंगे डॉक्टर को रखने का फैसला हमारी समझ से बाहर है। जिससे देखते हुए वीरवार को पंजाब के अलग शहरों ये आए मेडिकल लेबोरेटरी के कर्मचारियों द्वारा रोष प्रदर्शन किया गया।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के सभी सरकारी अस्पतालों में चलने वाली लैब को महाराष्ट्र के एक प्राइवेट कंपनी को ठेके में दे दिया है। जिसके बाद से कॉर्पोरेट घरानों की नजर पंजाब में चल रही 15000 से भी ज्यादा छोटी बेसिक मेडिकल लैबोरेट्री पर पड़ी गई है। वहीं पंजाब सरकार ताकत का इस्तेमाल करते हुए पंजाब में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर चुप्पी साधी हुई हैं। सरकार ने मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के जरिए केंद्र सरकार का नया कानून लाने की योजना बनाई है। जिसका नाम एएचपी काउंसिल बिल है। केंद्र सरकार के इस कानून में हर तरह के प्रोफेशनल की परिभाषा दी गई है। मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री के साथ लगभग 7 बार मीटिंग हो चुकी है। लेकिन पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट की ओर से एक्ट को जबरदस्ती लागू किया जा रहा है। एक्ट में कहा गया है कि पंजाब की सभी लेबोरेटरी में एक एमबीबीएस को तैनात किया जाए। ऐसे में महंगे डॉक्टर को रखने का फैसला हमारी समझ से बाहर है। जिससे देखते हुए वीरवार को पंजाब के अलग शहरों ये आए मेडिकल लेबोरेटरी के कर्मचारियों द्वारा रोष प्रदर्शन किया गया।
विज्ञापन