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कोविड काल में भी नहीं थमा अवैध खनन, डीसी तक पहुंचा मामला
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मोहाली। कोरोना महामारी (कोविड-19) के बीच भी अवैध माइनिंग का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस दौरान चलने वाले टिप्परों से जहां इलाके की सड़कों को नुकसान हो रहा है, वहीं, पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रह है।
इसी मामले को लेकर मुल्लांपुर से जुड़े इलाके के एक व्यक्ति और अवैध माइनिंग के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाने वाले राम सिंह की अगुवाई में डीसी मोहाली गिरीश दियालन को लिखित मेें शिकायत दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर अवैध माइनिंग पर अंकुश नहीं लगा और इलाके से गुुजरते टिप्परों को बंद नहीं किया तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे। उन्होंने इस संबंधी सीसीटीवी कैमरे में कैद टिप्परों की वीडियो और अन्य जानकारियां भी डीसी को सौंपी हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक डीसी को लिखित में दी शिकायत में उन्होंने बताया है कि वह गांव अभिपुर मुल्लांपुर के रहने वाले हैं। कोविड काल में जब रात के समय कर्फ्यू लग रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी उनके एरिया में स्थित स्क्रीनिंग प्लांटों पर टिप्पर धड़ल्ले से आते हैं। जिसमें गांव अभिपुर, मियांपुर चंगर, कुब्बाहेड़ी में अवैध माइनिंग से भरे टिप्पर आते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से यह टिप्पर चलते हैं, उससे यह साफ है कि इसमें प्रशासन के अधिकारी मिले हुए हैं, जो कि इस काले कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन माइनिंग वाले टिप्परों से सबसे ज्यादा नुकसान गांव वाले ही उठा रहे हैं। क्योंकि सरकार ने उनके इलाकों में लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए टाइल लगाई थी। इससे उन टाइलों को टूटने का खतरा बना हुआ है। अब हम इस समस्या से पूरी तरह से हार चुके हैं। वहीं, मजबूरी में हमे इस राह पर आना पड़ा है। वहीं, ऐसे हालात में कोई घटना होती है, किसी तरह का कोई जानी नुकसान होता है, तो उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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बता दें कि जिला प्रशासन की ओर से माइनिंग को रोकने के लिए अपने स्तर पर कई प्रयास किए जाते हैं। इतना ही नहीं रात को चेकिंग टीमें गठित की गई हैं, कुछ समय पहले इन्हीं लोगों ने रेत और बजरी आदि से भरे टिप्पर पकड़कर पुलिस को सौंपे थे। जबकि आरोपी फरार हो गए थे।
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इसी मामले को लेकर मुल्लांपुर से जुड़े इलाके के एक व्यक्ति और अवैध माइनिंग के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाने वाले राम सिंह की अगुवाई में डीसी मोहाली गिरीश दियालन को लिखित मेें शिकायत दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर अवैध माइनिंग पर अंकुश नहीं लगा और इलाके से गुुजरते टिप्परों को बंद नहीं किया तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे। उन्होंने इस संबंधी सीसीटीवी कैमरे में कैद टिप्परों की वीडियो और अन्य जानकारियां भी डीसी को सौंपी हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक डीसी को लिखित में दी शिकायत में उन्होंने बताया है कि वह गांव अभिपुर मुल्लांपुर के रहने वाले हैं। कोविड काल में जब रात के समय कर्फ्यू लग रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी उनके एरिया में स्थित स्क्रीनिंग प्लांटों पर टिप्पर धड़ल्ले से आते हैं। जिसमें गांव अभिपुर, मियांपुर चंगर, कुब्बाहेड़ी में अवैध माइनिंग से भरे टिप्पर आते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से यह टिप्पर चलते हैं, उससे यह साफ है कि इसमें प्रशासन के अधिकारी मिले हुए हैं, जो कि इस काले कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन माइनिंग वाले टिप्परों से सबसे ज्यादा नुकसान गांव वाले ही उठा रहे हैं। क्योंकि सरकार ने उनके इलाकों में लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए टाइल लगाई थी। इससे उन टाइलों को टूटने का खतरा बना हुआ है। अब हम इस समस्या से पूरी तरह से हार चुके हैं। वहीं, मजबूरी में हमे इस राह पर आना पड़ा है। वहीं, ऐसे हालात में कोई घटना होती है, किसी तरह का कोई जानी नुकसान होता है, तो उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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बता दें कि जिला प्रशासन की ओर से माइनिंग को रोकने के लिए अपने स्तर पर कई प्रयास किए जाते हैं। इतना ही नहीं रात को चेकिंग टीमें गठित की गई हैं, कुछ समय पहले इन्हीं लोगों ने रेत और बजरी आदि से भरे टिप्पर पकड़कर पुलिस को सौंपे थे। जबकि आरोपी फरार हो गए थे।