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अमरूद बाग घोटाला : सह-आरोपी सुखदेव सिंह ने अदालत में जमा कराए 2.40 करोड़ की राशि
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आरोपी सुखदेव सिंह। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। गांव बाकरपुर में करोड़ों के अमरूद बाग घोटाले में गिरफ्तार सह-आरोपी चंडीगढ़ निवासी सुखदेव सिंह ने सोमवार को अदालत में 2 करोड़ 40 लाख 96 हजार की राशि जमा करवाई। सुखदेव सिंह के वकील एचएस धनोआ ने उक्त राशि का डीडी अदालत में जमा करवाया। दरअसल, सुखदेव सिंह को 11 फरवरी को विजिलेंस ने वर्ष 2016-17 में हुए अमरूद बाग घोटाले में गिरफ्तार किया था। उसने अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर की थी। उसने अदालत में गुहार लगाई थी कि वह बकाया राशि अदालत में जमा करवाना चाहता है। अदालत ने राशि का डीडी तो आज जमा कर लिया, लेकिन उसकी जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुखदेव सिंह की जमानत पर अदालत 21 फरवरी को फैसला सुनाएगी।
आरोपियों ने रिश्वत के जरिए अवैध वित्तीय लाभ किया हासिल
विजिलेंस की जांच के दौरान सुखदेव सिंह ने धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर इस आपराधिक साजिश में विशेष भूमिका निभाई। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और आरोपियों ने रिश्वत के जरिए अवैध वित्तीय लाभ भी हासिल किया। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में खुलासा हुआ कि मोहाली में एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान फर्जी अमरूद के बाग होने का दावा करके अवैध रूप से अधिक मुआवजा लेने के इरादे से आरोपी सुखदेव सिंह ने गांव बाकरपुर में 3 कनाल 16 मरले जमीन खरीदी थी। इसके बाद उसने गांव बाकरपुर निवासी और मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह के साथ मिलकर इस अधिग्रहित जमीन पर पहले से अमरूद के पुराने बाग मौजूद होने की साजिश रची। उसने धोखाधड़ी से पेड़ों के मूल्यांकन के दौरान उन्हें तीन साल से अधिक पुराना और फल देने वाले पेड़ों के योग्य साबित करने के लिए संबंधित बागवानी विकास अधिकारी से मिलीभगत कर ली। सुखदेव सिंह और भूपिंदर सिंह के बीच एक समझौता था, जिसके तहत सुखदेव सिंह कर्मचारियों को रिश्वत देने सहित सभी खर्च वहन करेगा, जबकि भूपिंदर सिंह रिश्वत और अपने प्रभाव के जरिए भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से धोखाधड़ी से प्राप्त मुआवजे की दो-तिहाई राशि अपने पास रखेगा।
असली खसरा गिरदावरी माल रजिस्टर किया खुर्द-बुर्द
विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि गांव बाकरपुर के असली खसरा गिरदावरी माल रजिस्टर (2016-2021) को खुर्द-बुर्द कर दिया गया ताकि इस धोखाधड़ी का पता न चल सके और 2019 में एक नया फर्जी खसरा गिरदावरी रजिस्टर तैयार किया गया। भूपिंदर सिंह ने माल पटवारी बचित्र सिंह के साथ मिलकर पक्के अमरूद के बाग मौजूद होने को सही साबित करने के लिए भूमि रिकॉर्ड में हेराफेरी की। इसके बाद सुखदेव सिंह और उसकी पत्नी हरबिंदर कौर ने धोखाधड़ी से गमाडा से क्रमश 2,40,96,442 रुपये और 9,57,86,642 रुपये प्राप्त किए। प्रवक्ता ने आगे बताया कि अवैध रूप से प्राप्त मुआवजे में भूपिंदर सिंह के हिस्से को बदलने के लिए सुखदेव सिंह ने वर्ष 2022 में गांव चप्परचिड़ी जिला मोहाली में लगभग 6 बीघा जमीन भूपिंदर सिंह को कम कीमत पर बेच दी। इसी तरह गांव कैलो मोहाली में उसकी पत्नी हरबिंदर कौर की स्वामित्व वाली 32 कनाल जमीन भी कम कीमत पर भूपिंदर सिंह को बेची गई।
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कार्रवाइयों से बचता रहा सुखदेव
बार-बार समन जारी करने के बावजूद सुखदेव सिंह कानूनी कार्रवाइयों से बचता रहा और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। अन्य लाभार्थी सह-आरोपियों की तरह उसने धोखाधड़ी से प्राप्त मुआवजा राशि स्वेच्छा से खजाने में जमा नहीं करवाई और अदालत से अग्रिम जमानत भी नहीं ली। अन्य सह-आरोपियों से अब तक 86 करोड़ रुपये जमा करवाए जा चुके हैं और इस आरोपी से की जाने वाली 12 करोड़ रुपये की रिकवरी के साथ वापस होने वाली मुआवजा राशि 100 करोड़ रुपये हो जाएगी। इस मामले में अब तक कुल सात सरकारी कर्मचारी और 16 आम व्यक्ति गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
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मोहाली। गांव बाकरपुर में करोड़ों के अमरूद बाग घोटाले में गिरफ्तार सह-आरोपी चंडीगढ़ निवासी सुखदेव सिंह ने सोमवार को अदालत में 2 करोड़ 40 लाख 96 हजार की राशि जमा करवाई। सुखदेव सिंह के वकील एचएस धनोआ ने उक्त राशि का डीडी अदालत में जमा करवाया। दरअसल, सुखदेव सिंह को 11 फरवरी को विजिलेंस ने वर्ष 2016-17 में हुए अमरूद बाग घोटाले में गिरफ्तार किया था। उसने अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर की थी। उसने अदालत में गुहार लगाई थी कि वह बकाया राशि अदालत में जमा करवाना चाहता है। अदालत ने राशि का डीडी तो आज जमा कर लिया, लेकिन उसकी जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुखदेव सिंह की जमानत पर अदालत 21 फरवरी को फैसला सुनाएगी।
आरोपियों ने रिश्वत के जरिए अवैध वित्तीय लाभ किया हासिल
विजिलेंस की जांच के दौरान सुखदेव सिंह ने धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर इस आपराधिक साजिश में विशेष भूमिका निभाई। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और आरोपियों ने रिश्वत के जरिए अवैध वित्तीय लाभ भी हासिल किया। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में खुलासा हुआ कि मोहाली में एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान फर्जी अमरूद के बाग होने का दावा करके अवैध रूप से अधिक मुआवजा लेने के इरादे से आरोपी सुखदेव सिंह ने गांव बाकरपुर में 3 कनाल 16 मरले जमीन खरीदी थी। इसके बाद उसने गांव बाकरपुर निवासी और मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह के साथ मिलकर इस अधिग्रहित जमीन पर पहले से अमरूद के पुराने बाग मौजूद होने की साजिश रची। उसने धोखाधड़ी से पेड़ों के मूल्यांकन के दौरान उन्हें तीन साल से अधिक पुराना और फल देने वाले पेड़ों के योग्य साबित करने के लिए संबंधित बागवानी विकास अधिकारी से मिलीभगत कर ली। सुखदेव सिंह और भूपिंदर सिंह के बीच एक समझौता था, जिसके तहत सुखदेव सिंह कर्मचारियों को रिश्वत देने सहित सभी खर्च वहन करेगा, जबकि भूपिंदर सिंह रिश्वत और अपने प्रभाव के जरिए भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से धोखाधड़ी से प्राप्त मुआवजे की दो-तिहाई राशि अपने पास रखेगा।
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असली खसरा गिरदावरी माल रजिस्टर किया खुर्द-बुर्द
विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि गांव बाकरपुर के असली खसरा गिरदावरी माल रजिस्टर (2016-2021) को खुर्द-बुर्द कर दिया गया ताकि इस धोखाधड़ी का पता न चल सके और 2019 में एक नया फर्जी खसरा गिरदावरी रजिस्टर तैयार किया गया। भूपिंदर सिंह ने माल पटवारी बचित्र सिंह के साथ मिलकर पक्के अमरूद के बाग मौजूद होने को सही साबित करने के लिए भूमि रिकॉर्ड में हेराफेरी की। इसके बाद सुखदेव सिंह और उसकी पत्नी हरबिंदर कौर ने धोखाधड़ी से गमाडा से क्रमश 2,40,96,442 रुपये और 9,57,86,642 रुपये प्राप्त किए। प्रवक्ता ने आगे बताया कि अवैध रूप से प्राप्त मुआवजे में भूपिंदर सिंह के हिस्से को बदलने के लिए सुखदेव सिंह ने वर्ष 2022 में गांव चप्परचिड़ी जिला मोहाली में लगभग 6 बीघा जमीन भूपिंदर सिंह को कम कीमत पर बेच दी। इसी तरह गांव कैलो मोहाली में उसकी पत्नी हरबिंदर कौर की स्वामित्व वाली 32 कनाल जमीन भी कम कीमत पर भूपिंदर सिंह को बेची गई।
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कार्रवाइयों से बचता रहा सुखदेव
बार-बार समन जारी करने के बावजूद सुखदेव सिंह कानूनी कार्रवाइयों से बचता रहा और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। अन्य लाभार्थी सह-आरोपियों की तरह उसने धोखाधड़ी से प्राप्त मुआवजा राशि स्वेच्छा से खजाने में जमा नहीं करवाई और अदालत से अग्रिम जमानत भी नहीं ली। अन्य सह-आरोपियों से अब तक 86 करोड़ रुपये जमा करवाए जा चुके हैं और इस आरोपी से की जाने वाली 12 करोड़ रुपये की रिकवरी के साथ वापस होने वाली मुआवजा राशि 100 करोड़ रुपये हो जाएगी। इस मामले में अब तक कुल सात सरकारी कर्मचारी और 16 आम व्यक्ति गिरफ्तार किए जा चुके हैं।