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पांच राज्यों में जाली स्टांप बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, सरगना की निशानदेही पर चार साथी गिरफ्तार

Wed, 24 Feb 2021 02:28 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 02:28 AM IST
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Gangs selling counterfeit stamps busted in five states, four accomplices arrested on gangster's traces
जीरकपुर थाने में एसपी रवजोत कौर प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हुईं। - फोटो : MOHALI
जीरकपुर। पुलिस ने फर्जी स्टांप और नकली मोहरें बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के सरगना हरीश अरोड़ा की निशानदेही पर पुलिस ने अन्य चार शातिरों को गिरफ्तार किया है।
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पत्रकार वार्ता में एसपी रवजोत कौर ग्रेवाल ने बताया कि यह गिरोह पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान व मुंबई में नकली स्टांप और मोहरें सप्लाई करता था। गिरोह के सरगना को पुलिस ने पटियाला रोड पर स्थित लक्की ढाबे के नजदीक रॉयल मेंशन ढकोली से 15 फरवरी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद हरीश अरोड़ा की निशानदेही पर चार शातिरों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया। आरोपी ईशान ठाकुर निवासी राजपुरा, जिला पटियाला, अशोक कुमार निवासी समाना जिला पटियाला, सचिन जिंदल निवासी सुनाम जिला संगरूर व सतपाल तहसील कांप्लेक्स सेक्टर-17 चंडीगढ़ का रहने वाला है।
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शातिर बड़ी संख्या में खाली स्टांप अपने साथ रखते थे और उसे पुरानी तारीख में व्यक्तिगत लाभ के लिए और संपत्ति के नाम में हेरफेर करने के लिए मोटी रकम लेकर लोगों को बेचते थे। उक्त शातिर हरीश कुमार अरोड़ा को पुरानी तारीख के स्टांप और मोहरें लाकर देते थे। हरीश अरोड़ा उक्त स्टांप फरोश से पुराने स्टांप, जो बिना नंबर के हैं और बंद हो चुके हैं, लेकर पिछली तारीखों में उनकी एंट्री करवाता था और वह स्टांप टिकटों पर शपथ पत्र चिपकाकर स्वयं हस्ताक्षर भी करता था।
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हरीश अरोड़ा के पास से एक क्रेटा कार, 333 टिकट, 11 अन्य नकली टिकट, 250 शपथ पत्र और 10 एंट्री रजिस्टर बरामद हुए हैं। एसपी रवजोत कौर ने कहा कि हरीश कुमार अरोड़ा आठ साल से यह धंधा चला रहा था। उसने जीरकपुर के अलावा पंजाब के विभिन्न शहरों और पंजाब के बाहर के राज्यों में भी संबंध बनाए हुए थे। इस धंधे में उसके दोनों बेटे साहिल और अभिषेक अरोड़ा भी शामिल थे, जो अभी फरार हैं।

बैंकों में सप्लाई किए थे स्टांप
एसपी रवजोत ग्रेवाल ने बताया कि हरीश अरोड़ा का कारोबार इतना बढ़ गया था कि वह बैंकों को भी स्टांप सप्लाई कर रहा था। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय बन गया है कि जीरकपुर में 2012 के बाद न जाने कितनी पुरानी कॉलोनियों के जाली स्टांप तैयार कर उन्हें रेगुलाइजेशन पॉलिसी के तहत पास करवाया गया है। इन स्टांप का इस्तेमाल अवैध कॉलोनियों को पंजीकृत करने के लिए भी किया गया है।
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