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Mohali News: गज्जनमाजरा की पीजीआई से वीसी से हुई पेशी, न्यायिक हिरासत में भेजा
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मोहाली। 41 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने पंजाब के अमरगढ़ से आप विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा को गिरफ्तार किया था। सोमवार देर रात हिरासत में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। शाम करीब चार बजे वीसी से उनकी पेशी हुई। इस दौरान अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिया।
अदालत ने आदेश में कहा कि उन पर आरोप गंभीर हैं। अभी उनकी हालत गंभीर है इसलिए जब तक वह स्वस्थ नहीं होते तब तक उनका इलाज कराया जाए। वहीं, स्वस्थ होने के बाद उन्हें रोपड़ जेल भेजा जाए।
बता दें कि गज्जनमाजरा वही विधायक हैं, जिन्होंने पंजाब की खराब वित्तीय हालत का हवाला देते हुए सिर्फ एक रुपया वेतन लेने का एलान किया था। वहीं, ईडी ने पिछले साल सितंबर में संगरूर में तारा हवेली, तारा कॉन्वेंट स्कूल, तारा गोल्डन होम्स और मालेरकोटला में तारा फीड इंडस्ट्री के परिसरों पर दबिश दी थी। सूत्रों से पता चला है कि तारा कॉर्पोरेशन लिमिटेड इन सभी व्यावसायिक उपक्रमों की मूल कंपनी है और इसका स्वामित्व गज्जनमाजरा, उनके भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों के पास है। उनके परिवार के सदस्यों ने 2011 और 2014 के बीच कई ऋण लिए थे लेकिन ईडी और सीबीआई की जांच के अनुसार ऋण का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया था, जिसके लिए बैंक से पैसा लिया गया था। वहीं, जिस समय ऋण लिया गया था, उस समय गज्जनमाजरा कंपनियों के निदेशकों में से एक थे। फर्म ने अपने निदेशकों के माध्यम से अपने स्टॉक को छिपाया और गलत इरादे से ऋणों में हेरफेर किया। इससे बैंक को करीब 40.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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अदालत ने आदेश में कहा कि उन पर आरोप गंभीर हैं। अभी उनकी हालत गंभीर है इसलिए जब तक वह स्वस्थ नहीं होते तब तक उनका इलाज कराया जाए। वहीं, स्वस्थ होने के बाद उन्हें रोपड़ जेल भेजा जाए।
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बता दें कि गज्जनमाजरा वही विधायक हैं, जिन्होंने पंजाब की खराब वित्तीय हालत का हवाला देते हुए सिर्फ एक रुपया वेतन लेने का एलान किया था। वहीं, ईडी ने पिछले साल सितंबर में संगरूर में तारा हवेली, तारा कॉन्वेंट स्कूल, तारा गोल्डन होम्स और मालेरकोटला में तारा फीड इंडस्ट्री के परिसरों पर दबिश दी थी। सूत्रों से पता चला है कि तारा कॉर्पोरेशन लिमिटेड इन सभी व्यावसायिक उपक्रमों की मूल कंपनी है और इसका स्वामित्व गज्जनमाजरा, उनके भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों के पास है। उनके परिवार के सदस्यों ने 2011 और 2014 के बीच कई ऋण लिए थे लेकिन ईडी और सीबीआई की जांच के अनुसार ऋण का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया था, जिसके लिए बैंक से पैसा लिया गया था। वहीं, जिस समय ऋण लिया गया था, उस समय गज्जनमाजरा कंपनियों के निदेशकों में से एक थे। फर्म ने अपने निदेशकों के माध्यम से अपने स्टॉक को छिपाया और गलत इरादे से ऋणों में हेरफेर किया। इससे बैंक को करीब 40.92 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
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