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अरमीनिया की नागरिकता के सपने दिखा ठगे लाखों
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अपने साथ हुई ठगी के बारे में जानकारी देते दोनों युवक।
मोहाली। जगराओं के दो युवाओं को एक ट्रेवल एजेंट ने अरमीनिया की नागरिकता के सपने दिखाकर लाखों रुपये ठग लिए। अरमीनिया में युवाओं का शोषण किया गया। जब घरवालों ने एजेंट पर दबाव बनाया तो युवाओं को मलयेशिया भेज दिया गया, जहां भी उनकी मुश्किल कम नहीं हुई। बाद में एक प्राइवेट संस्था के सहयोग से दोनों युवाओं को बड़ी मुश्किल से विदेश से वापस भारत लाया गया। अब दोनों युवाओं ने मंगलवार को डीजीपी पंजाब को शिकायत देकर ट्रेवल एजेंट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
पंजाब अंगेस्ट करप्शन संस्था के प्रधान सतनाम सिंह दाऊं ने बताया कि जगराओं के दो युवक अरविंदर सिंह व गुरमीत सिंह विदेश जाकर रोजगार करना चाहते थेे, लेकिन वे जगराओं के एक एजेंट से करीब आठ लाख रुपये की ठगी का शिकार हो गए। एजेंट ने युवाओं को यह कहकर अरमीनिया भेजा कि उन्हें परमिट दिलाकर नागरिकता दिला दी जाएगी। इसकी एवज में उनसे पांच-पांच लाख रुपये ले लिए गए। जब युवक अरमीनिया पहुंचे तो उन्हें कोई काम नहीं दिलाया और न ही उनके पेपर तैयार करवाए। बाद में जब परिवार ने एजेंट पर दवाब बनाया तो युवाओं को वापस बुला लिया गया। इसके बाद पीड़ितों के परिवार ने एजेंट से पैसे वापस मांगे तो एजेंट ने पैसे वापस करने की जगह टूरिस्ट वीजा पर युवाओं को मलयेशिया भेज दिया। वहां जाते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और करीब 50 नौजवानों के साथ एक कमरे में बंद कर दिया गया। खाने-पीने के लिए मुट्ठी भर चावल दिए गए। सतनाम सिंह ने बताया कि दोनों युवाओं ने सोशल मीडिया पर उनका नंबर तलाश कर संपर्क किया। सतनाम सिंह ने उस समय के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के ध्यान में मामला लाया। मामला मेल के माध्यम से एसएसपी व तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भी ध्यान में लाया गया था। इसके बाद उन्होंने एजेंट से संपर्क किया, जिन्होंने दोनों युवाओं को वापस बुलाने का वादा किया। इसी बीच एजेंट ने अपना नंबर बंद कर लिया और दुकान भी बंद कर दी थी।
एजेंट ने मलयेशिया स्थित अपने सब-एजेंटों को कहा कि इन युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाए। इसमें यह कहा जाए कि उनका कोई झगड़ा नहीं है। सतनाम सिंह ने बताया कि इस बारे में युवकों ने जब उन्हें जानकारी दी तो उन्होंने 30 अप्रैल को एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर कहा था कि अगर युवकों को कोई नुकसान हुआ तो उसके लिए एजेंट जिम्मेदार होंगे।
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संस्था के दबाव के बाद एजेंटों ने उक्त युवकों को वहां से निकाल दिया, लेकिन उनके पासपोर्ट खराब कर दिए गए। इसके बाद दोनों युवक जोर बारू शहर के गुरुद्वारे में पहुंचे। वहां पर कुछ दिन रुक कर कुआलालंपुर पहुंचे और अपने परिवार से संपर्क कर पैसे मंगवाए और कागज तैयार करवाए। इसके बाद वह भारत पहुंचे। ऐसे में युवकों को दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। सतनाम सिंह ने पंजाब सरकार से मांग की कि ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लागों को ठगी का शिकार होने से रोका जा सके। वहीं, उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लडे़ंगे।
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पंजाब अंगेस्ट करप्शन संस्था के प्रधान सतनाम सिंह दाऊं ने बताया कि जगराओं के दो युवक अरविंदर सिंह व गुरमीत सिंह विदेश जाकर रोजगार करना चाहते थेे, लेकिन वे जगराओं के एक एजेंट से करीब आठ लाख रुपये की ठगी का शिकार हो गए। एजेंट ने युवाओं को यह कहकर अरमीनिया भेजा कि उन्हें परमिट दिलाकर नागरिकता दिला दी जाएगी। इसकी एवज में उनसे पांच-पांच लाख रुपये ले लिए गए। जब युवक अरमीनिया पहुंचे तो उन्हें कोई काम नहीं दिलाया और न ही उनके पेपर तैयार करवाए। बाद में जब परिवार ने एजेंट पर दवाब बनाया तो युवाओं को वापस बुला लिया गया। इसके बाद पीड़ितों के परिवार ने एजेंट से पैसे वापस मांगे तो एजेंट ने पैसे वापस करने की जगह टूरिस्ट वीजा पर युवाओं को मलयेशिया भेज दिया। वहां जाते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और करीब 50 नौजवानों के साथ एक कमरे में बंद कर दिया गया। खाने-पीने के लिए मुट्ठी भर चावल दिए गए। सतनाम सिंह ने बताया कि दोनों युवाओं ने सोशल मीडिया पर उनका नंबर तलाश कर संपर्क किया। सतनाम सिंह ने उस समय के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के ध्यान में मामला लाया। मामला मेल के माध्यम से एसएसपी व तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भी ध्यान में लाया गया था। इसके बाद उन्होंने एजेंट से संपर्क किया, जिन्होंने दोनों युवाओं को वापस बुलाने का वादा किया। इसी बीच एजेंट ने अपना नंबर बंद कर लिया और दुकान भी बंद कर दी थी।
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एजेंट ने मलयेशिया स्थित अपने सब-एजेंटों को कहा कि इन युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाए। इसमें यह कहा जाए कि उनका कोई झगड़ा नहीं है। सतनाम सिंह ने बताया कि इस बारे में युवकों ने जब उन्हें जानकारी दी तो उन्होंने 30 अप्रैल को एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर कहा था कि अगर युवकों को कोई नुकसान हुआ तो उसके लिए एजेंट जिम्मेदार होंगे।
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संस्था के दबाव के बाद एजेंटों ने उक्त युवकों को वहां से निकाल दिया, लेकिन उनके पासपोर्ट खराब कर दिए गए। इसके बाद दोनों युवक जोर बारू शहर के गुरुद्वारे में पहुंचे। वहां पर कुछ दिन रुक कर कुआलालंपुर पहुंचे और अपने परिवार से संपर्क कर पैसे मंगवाए और कागज तैयार करवाए। इसके बाद वह भारत पहुंचे। ऐसे में युवकों को दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। सतनाम सिंह ने पंजाब सरकार से मांग की कि ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लागों को ठगी का शिकार होने से रोका जा सके। वहीं, उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लडे़ंगे।