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कोरोना की चौथी लहर की आहट, धूल फांक रहे वेंटिलेंटरों का अब होगा इस्तेमाल

Mon, 02 May 2022 01:33 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 01:33 AM IST
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Fourth wave of Corona came, the ventilators gathering will now be used in Mohali
मोहाली। कोरोना की चौथी लहर की आहट के बाद जिले के लोगों को बचाने के लिए आखिर जिला सेहत विभाग ने कई महीनों से अस्पताल में धूल फांक रहे वेंटिलेंटरों को प्रयोग करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान में सेहत विभाग द्वारा बनाए जा रहे 30 बेड के आईसीयू वार्ड में इनका प्रयोग होगा। हालांकि इसके बाद भी उक्त वेंटिलेंटर आम गंभीर मरीजों के लिए प्रयोग नहीं होंगे। उन्हें इलाज के लिए चंडीगढ़ या निजी अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ेगा। यह केवल गंभीर कोरोना मरीजों के लिए ही रहेंगे।
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फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान में कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के समय गंभीर मरीजों के इलाज की सुुविधा नहीं थी। ऐसे में कोरोना के गंभीर मरीजों को पटियाला स्थित राजिंद्रा अस्पताल भेजा जाता था। इतना ही नहीं इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा मरीजों के लिए भेजे गए वेंटिलेटर तक प्रयोग नहीं हो पाए थे, क्योंकि अस्पताल के पास माहिर नहीं थे। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए उक्त वेंटिलेंटर निजी अस्पतालों को सौंप दिए गए थे ताकि उनका काम चल पाए।
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इस बार कोरोना की चौथी लहर आने पर दिक्कत न आए, इसके लिए सेहत विभाग ने उचित इंतजाम करने की कवायद शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज ने 30 बेड के आईसीयू वार्ड समेत 120 बेड का कोविड वार्ड तैयार कर दिया है।
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आईसीयू वार्ड में रहेगा पूरा इंतजाम
कोरोना काल में यहां मरीजों व उनके तीमारदारों को ऑक्सीजन से लेकर कई समस्याएं उठानी पड़ी थीं लेकिन इस बार ऐसी दिक्कत नहीं आएगी। आईसीयू में दिन की चार शिफ्टों में एक डॉक्टर और तीन स्टाफ नर्सों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा 5 सीनियर डॉक्टर आईसीयू में अलग-अलग समय में ड्यूटी देंगे। एक मेडिसिन के प्रोफेसर, दो अनेस्थेसिओलॉजिस्ट, एक पीडियाट्रिक्स और एक ऑर्थोलिस्ट आईसीयू में ड्यूटी देंगे। बाकी डॉक्टर ऑन कॉल उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही पांच इमरजेंसी डॉक्टर भी आईसीयू के लिए हफ्ते भर शिफ्टों में ड्यूटी देते रहेंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी
आईसीयू अभी शुरू नहीं हुआ है। भले ही काफी उपकरण आ गए हैं लेकिन उपकरणों के सहारे आईसीयू चलना संभव नहीं है। इस समय सबसे बड़ी दिक्कत लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की है। वहीं दूसरी ओर बिजली भी बड़ी समस्या है क्योंकि आईसीयू में जो उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं, उनके लिए बिजली की सप्लाई 24 घंटे जरूरी है। आईसीयू के लिए कई तरह का स्टाफ चाहिए होता है लेकिन एमडी से लेकर स्पेशलिस्ट तक की नियुक्ति नहीं हुई है। -डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान
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