{"_id":"67b24b50c5627d498d028189","slug":"four-including-md-acquitted-in-check-tampering-case-mohali-news-c-71-1-mli1005-125666-2025-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: चेक से छेड़छाड़ मामले में एमडी समेत चार बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: चेक से छेड़छाड़ मामले में एमडी समेत चार बरी
विज्ञापन
मोहाली। एक चेक से छेड़छाड़ मामले में ग्रेटर मोहाली एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की शिकायत पर दर्ज केस में सुनवाई करते हुए जीरकपुर के रॉयल सिटी प्रमोटर्स के खिलाफ चल रहे केस में मैनेजिंग डायरेक्टर समेत चार लोगों को कोर्ट ने बरी कर दिया गया है। अदालत ने सरकारी और बचाव पक्ष के वकीलों की दलील सुनने के बाद मैनेजिंग डायरेक्टर दिलजीत सिंह, डायरेक्टर अनुराग मिड्डा, डायरेक्टर लियाकत अली, ऑथराइज्ड सिग्नेटरी सुमित बंसल को आरोपों से बरी कर दिया।
शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया है कि आरोपियों के खिलाफ वर्तमान शिकायत गमाडा द्वारा उस चेक के आधार पर दायर की गई जो आरोपी व्यक्तियों द्वारा उनके कानूनी रूप से लागू दायित्व के निर्वहन में जारी किया गया था। इसमें तर्क दिया गया कि चेक का अनादर किया गया है। इसके विपरीत आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि चेक आरोपी या आरोपी के किसी भी निदेशक द्वारा जारी नहीं किया गया। यह तर्क भी दिया गया कि चेक किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जारी किया गया जो वर्तमान शिकायत में आरोपी नहीं है।
अदालत को बताया गया कि आईडीबीआई बैंक की संबंधित शाखा में जो खाता है वह चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स के नाम पर है। इसके मालिक सुमित बंसल हैं। खाता खोलने के फॉर्म पर चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स के मालिक सुमित बंसल के हस्ताक्षर हैं। इस मामले में यह बात सामने आई कि जिस खाते का यह चेक है वह एक प्रोपराइटरशिप फर्म का है न कि किसी कंपनी का।
विज्ञापन
खाता खोलने के फॉर्म के अनुसार सुमित बंसल ने चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर के प्रोपराइटर के रूप में अपने हस्ताक्षर किए हैं। चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर की मुहर और स्टाम्प एक प्रोपराइटरशिप फर्म के रूप में लगाई गई है न कि किसी कंपनी की। चूंकि संबंधित चेक उपरोक्त प्रोपराइटरशिप फर्म के खाते से संबंधित है, इसलिए शिकायतकर्ता का मामला विफल हो जाता है।
अदालत ने कहा कि वर्तमान आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य देयता मौजूद नहीं पाई गई है, इसलिए धारा 138 एनआई अधिनियम के आरोप साबित नहीं होते। अदालत ने कहा कि मुकदमे का सामना कर रहे आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोप के नोटिस से बरी कर दिया जाता है।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया है कि आरोपियों के खिलाफ वर्तमान शिकायत गमाडा द्वारा उस चेक के आधार पर दायर की गई जो आरोपी व्यक्तियों द्वारा उनके कानूनी रूप से लागू दायित्व के निर्वहन में जारी किया गया था। इसमें तर्क दिया गया कि चेक का अनादर किया गया है। इसके विपरीत आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि चेक आरोपी या आरोपी के किसी भी निदेशक द्वारा जारी नहीं किया गया। यह तर्क भी दिया गया कि चेक किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जारी किया गया जो वर्तमान शिकायत में आरोपी नहीं है।
विज्ञापन
अदालत को बताया गया कि आईडीबीआई बैंक की संबंधित शाखा में जो खाता है वह चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स के नाम पर है। इसके मालिक सुमित बंसल हैं। खाता खोलने के फॉर्म पर चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स के मालिक सुमित बंसल के हस्ताक्षर हैं। इस मामले में यह बात सामने आई कि जिस खाते का यह चेक है वह एक प्रोपराइटरशिप फर्म का है न कि किसी कंपनी का।
विज्ञापन
खाता खोलने के फॉर्म के अनुसार सुमित बंसल ने चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर के प्रोपराइटर के रूप में अपने हस्ताक्षर किए हैं। चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर की मुहर और स्टाम्प एक प्रोपराइटरशिप फर्म के रूप में लगाई गई है न कि किसी कंपनी की। चूंकि संबंधित चेक उपरोक्त प्रोपराइटरशिप फर्म के खाते से संबंधित है, इसलिए शिकायतकर्ता का मामला विफल हो जाता है।
अदालत ने कहा कि वर्तमान आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य देयता मौजूद नहीं पाई गई है, इसलिए धारा 138 एनआई अधिनियम के आरोप साबित नहीं होते। अदालत ने कहा कि मुकदमे का सामना कर रहे आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोप के नोटिस से बरी कर दिया जाता है।