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Mohali News: तीन दशकों में दो बार रखी नींव, ऑडिटोरियम फिर भी नहीं बना
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मोहाली। वीआईपी सिटी में एक ऑडिटोरियम की मांग को लेकर तीन दशक में दो सरकारों के मंत्रियों ने नींव तो रखी, पर ऑडिटोरियम अभी तक नहीं बना। दोनों बार मंत्री साहब आए, फोटो खिंचवाई और निकल लिए। अब स्थानीय कलाकार पूछ रहे हैं कि साहब ऑडिटोरियम कहां हैं?
इस ऑडिटोरियम के लिए दो अलग-अलग जगह पर दो बार नींव रखी गई थी, लेकिन इसको बनना एक बार भी शुरू नहीं किया जा सका। जानकारी के मुताबिक पहली बार शहर में ऑडिटोरियम की नींव अकाली सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी और इसके बाद दूसरी बार इसकी नींव रखी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। जबकि मोहाली में फिल्म सिटी बनाने के दावे करने वाले सिटी को एक ऑडिटोरियम तक नहीं दे सके। हालात यह हैं कि मोहाली के आर्टिस्टों को परफारमेंस के लिए चंडीगढ़ और पंचकूला में बने थिएटरों और ऑडिटोरियमों का रुख करना पड़ता है।
शहर में ऑडिटोरियम की मांग करीब तीन दशक से की जा रही है पर यह बन नहीं सका। इस कारण कलाकारों के साथ शहर के लोगों को छोटे से छोटे समागम के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला पर निर्भर होना पड़ता है। वर्ष 2014 से लेकर तीन बार प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाया, लेकिन प्रोजेक्ट शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया। पंजाब के मौजूद सीएम भगवंत मान खुद एक कलाकार है जिनके द्वारा अभी तक इस संबंधी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शहर में चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर ऑडिटोरियम बनाने की कवायद सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गई है।
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जानकारी के मुताबिक शहर में करीब एक दर्जन से अधिक थिएटर ग्रुप सक्रिय हैं। इसके अलावा कई छोटे-बड़े शिक्षण संस्थान खुले हुए हैं लेकिन ऑडिटोरियम न होने का खामियाजा सबको भुगतना पड़ रहा है। हालत यह हैं कि निजी अकादमी में अगर छात्र और युवा जाते हैं तो वे अपने हिसाब से दाम वसूलते हैं। इस वजह से कई बार तो प्रतिभा को बाहर लाने के लिए मंच ही नहीं मिल पाता है।
इसे देखते हुए कई बार ऑडिटोरियम बनाने की बात उठ चुकी थी। जिसके बाद पंजाब में चन्नी सरकार के समय गमाडा गमाडा ने सेक्टर-78 में जगह भी दे दी है लेकिन ग्रांट जारी न होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। सिर्फ नींव पत्थर जगह पर लगा हुआ है। ऑडिटोरियम बनने की जगह पर मौजूदा समय में सिर्फ घास फूस ही नजर आ रही है। इससे पहले अकाली सरकार के समय फेज-8 में ऑडिटोरियम बनाने के लिए कवायद शुरू की गई थी, जिसके बाद सरकार के बदलते ही जमीन बदल दी गई थी।
तीन दशक से पुरानी मांग
इलाके में ऑडिटोरियम की मांग तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। 90 के दशक में एक बार सरकार से जगह मिली भी थी, लेकिन वह वापस ले ली गई। इसके बाद कई बार नींव पत्थर रखे गए। लेकिन आज तक इलाके को ऑडिटोरियम नहीं मिल पाया है। ऑडिटोरियम बनने से जहां युवाओं को प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। वहीं रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। -संजीवन सिंह, नाटककार, प्रधान इप्टा पंजाब
कई बार लिखा कब्जा नहीं मिला
गमाडा ने ऑडिटोरियम के लिए जमीन तो अलॉट की है, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया। पंजाब की मौजूदा सरकार को कई बार लिखा जा चुका है, परंतु अभी तक जमीन का कब्जा नहीं मिला है और जैसे ही कब्जा और ग्रांट मिल जाएगी तभी नगर निगम इसका निर्माण शुरू करवा देगा। -कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर मोहाली
एक ओपन थिएटर ही बना दें
पंजाब सरकार अभी तक कलाकारों के लिए कोई पॉलिसी नहीं बना सकी। चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर मोहाली में ऑडिटोरियम बनाया जाना चाहिए। ताकि कलाकारों को चंडीगढ़ और पंचकूला न जाना पड़े। कई बार नगर निगम को लिखा गया है कि जब तक ऑडिटोरियम नहीं बनता, तब तक फेज-1 में एक ओपन थिएटर ही बना दिया जाए। -नरिंदर नीना, कलाकार एवं अदाकार
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इस ऑडिटोरियम के लिए दो अलग-अलग जगह पर दो बार नींव रखी गई थी, लेकिन इसको बनना एक बार भी शुरू नहीं किया जा सका। जानकारी के मुताबिक पहली बार शहर में ऑडिटोरियम की नींव अकाली सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी और इसके बाद दूसरी बार इसकी नींव रखी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। जबकि मोहाली में फिल्म सिटी बनाने के दावे करने वाले सिटी को एक ऑडिटोरियम तक नहीं दे सके। हालात यह हैं कि मोहाली के आर्टिस्टों को परफारमेंस के लिए चंडीगढ़ और पंचकूला में बने थिएटरों और ऑडिटोरियमों का रुख करना पड़ता है।
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शहर में ऑडिटोरियम की मांग करीब तीन दशक से की जा रही है पर यह बन नहीं सका। इस कारण कलाकारों के साथ शहर के लोगों को छोटे से छोटे समागम के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला पर निर्भर होना पड़ता है। वर्ष 2014 से लेकर तीन बार प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाया, लेकिन प्रोजेक्ट शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया। पंजाब के मौजूद सीएम भगवंत मान खुद एक कलाकार है जिनके द्वारा अभी तक इस संबंधी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शहर में चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर ऑडिटोरियम बनाने की कवायद सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गई है।
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जानकारी के मुताबिक शहर में करीब एक दर्जन से अधिक थिएटर ग्रुप सक्रिय हैं। इसके अलावा कई छोटे-बड़े शिक्षण संस्थान खुले हुए हैं लेकिन ऑडिटोरियम न होने का खामियाजा सबको भुगतना पड़ रहा है। हालत यह हैं कि निजी अकादमी में अगर छात्र और युवा जाते हैं तो वे अपने हिसाब से दाम वसूलते हैं। इस वजह से कई बार तो प्रतिभा को बाहर लाने के लिए मंच ही नहीं मिल पाता है।
इसे देखते हुए कई बार ऑडिटोरियम बनाने की बात उठ चुकी थी। जिसके बाद पंजाब में चन्नी सरकार के समय गमाडा गमाडा ने सेक्टर-78 में जगह भी दे दी है लेकिन ग्रांट जारी न होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। सिर्फ नींव पत्थर जगह पर लगा हुआ है। ऑडिटोरियम बनने की जगह पर मौजूदा समय में सिर्फ घास फूस ही नजर आ रही है। इससे पहले अकाली सरकार के समय फेज-8 में ऑडिटोरियम बनाने के लिए कवायद शुरू की गई थी, जिसके बाद सरकार के बदलते ही जमीन बदल दी गई थी।
तीन दशक से पुरानी मांग
इलाके में ऑडिटोरियम की मांग तीन दशक से ज्यादा पुरानी है। 90 के दशक में एक बार सरकार से जगह मिली भी थी, लेकिन वह वापस ले ली गई। इसके बाद कई बार नींव पत्थर रखे गए। लेकिन आज तक इलाके को ऑडिटोरियम नहीं मिल पाया है। ऑडिटोरियम बनने से जहां युवाओं को प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। वहीं रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। -संजीवन सिंह, नाटककार, प्रधान इप्टा पंजाब
कई बार लिखा कब्जा नहीं मिला
गमाडा ने ऑडिटोरियम के लिए जमीन तो अलॉट की है, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया। पंजाब की मौजूदा सरकार को कई बार लिखा जा चुका है, परंतु अभी तक जमीन का कब्जा नहीं मिला है और जैसे ही कब्जा और ग्रांट मिल जाएगी तभी नगर निगम इसका निर्माण शुरू करवा देगा। -कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर मोहाली
एक ओपन थिएटर ही बना दें
पंजाब सरकार अभी तक कलाकारों के लिए कोई पॉलिसी नहीं बना सकी। चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर की तर्ज पर मोहाली में ऑडिटोरियम बनाया जाना चाहिए। ताकि कलाकारों को चंडीगढ़ और पंचकूला न जाना पड़े। कई बार नगर निगम को लिखा गया है कि जब तक ऑडिटोरियम नहीं बनता, तब तक फेज-1 में एक ओपन थिएटर ही बना दिया जाए। -नरिंदर नीना, कलाकार एवं अदाकार