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गिरफ्तारी से बचने को जिला अदालत की शरण में पहुंचे पूर्व डीजीपी सैनी
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मोहाली। पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में विजिलेंस की गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत की शरण ली है। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज वीरवार को अतिरिक्त जिला सेशन जज पीएस ग्रेवाल की अदालत में सुनवाई होगी।
जानकारी के मुताबिक विजिलेंस की ओर से सोमवार शाम को पूर्व डीजीपी सुमेेध सिंह सैनी समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। साथ ही सैनी को गिरफ्तार करने के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-20 स्थित उनकी कोठी पर दबिश दी गर्द थी। करीब 7 घंटे तक पुुलिस ने सैनी की रिहायश पर तलाशी अभियान चलाया, लेकिन इसके बावजूद उनका कोई सुराग नहीं लगा। दूसरी ओर विजिलेंस ने इस मामले में 8 टीमें गठित की हैं, जो कि उनकी तलाश में विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है। हालांकि अब पंजाब के विभिन्न राजनीतिक नेता आरोप लगा रहे हैं कि सैनी को बचाने के पुलिस अधिकारी ही साथ देते हैं। क्योंकि सैनी अब तक किसी भी मामले में पुलिस के हाथ नहीं लगे। वह जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी दांव पेच लगाकर बच जाते हैं। हालांकि पंजाब पुलिस की ओर से उन्हें कई मामलों में गिरफ्तार करने की कोशिश की है।
बता दें कि विजिलेंस ब्यूरो ने उक्त मामलों में सुमेध सिंह सैनी के अलावा पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी इंजीनियर निम्रतदीप सिंह, सुरिंदर जीत सिहं, अजय कौशल, परदुमन सिंह और अमित सिंगला का नाम शामिल किया हुआ है।
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इस आरोप में दर्ज हुुआ भ्रष्टाचार का केस
जानकारी के मुताबिक आरोप है कि आरोपी निम्रतदीप सिंह के पिता सुरिंदरजीत सिंह ने अपनी सेक्टर-20 स्थित कोठी की फर्स्ट फ्लोर ढाई लाख रुपये प्रति माह किराए के हिसाब से 11 महीने के लिए सुमेध सिंह सैनी को दी थी। यह इस किराए का एग्रीमेंट 15 अक्तूबर, 2018 में हुआ था। उक्त महीनों का कुल किराया 27.5 लाख रुपये बनता था। लेकिन एग्रीमेंट के चालू होने से पहले ही सैनी ने 40 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी और दो महीने का एडवांस किराया 5 लाख रुपये उन्हें दे दिया था। सुमेध सिंह सैनी की ओर से इस दौरान कुल 45 लाख का भुगतान किया गया था, जो कि 11 महीने के किराए से ज्यादा बनता है। इसके अलावा सैनी ने अगस्त, 2018 से अगस्त, 2020 तक सुरिंदरजीत सिंह के खाते में 6.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जबकि यह भुगतान किराया इकरारनामा (रैंट डीड) के नियमों और शर्तों के मुुताबिक नहीं था। इसके अलावा दो करोड़ रुपये की और ट्रांजेक्शन भी उनके बैंक खाते में हुई है। इसी रकम के भुगतान को आधार बनाकर विजिलेंस की ओर से यह भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया है।
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जानकारी के मुताबिक विजिलेंस की ओर से सोमवार शाम को पूर्व डीजीपी सुमेेध सिंह सैनी समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। साथ ही सैनी को गिरफ्तार करने के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-20 स्थित उनकी कोठी पर दबिश दी गर्द थी। करीब 7 घंटे तक पुुलिस ने सैनी की रिहायश पर तलाशी अभियान चलाया, लेकिन इसके बावजूद उनका कोई सुराग नहीं लगा। दूसरी ओर विजिलेंस ने इस मामले में 8 टीमें गठित की हैं, जो कि उनकी तलाश में विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है। हालांकि अब पंजाब के विभिन्न राजनीतिक नेता आरोप लगा रहे हैं कि सैनी को बचाने के पुलिस अधिकारी ही साथ देते हैं। क्योंकि सैनी अब तक किसी भी मामले में पुलिस के हाथ नहीं लगे। वह जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी दांव पेच लगाकर बच जाते हैं। हालांकि पंजाब पुलिस की ओर से उन्हें कई मामलों में गिरफ्तार करने की कोशिश की है।
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बता दें कि विजिलेंस ब्यूरो ने उक्त मामलों में सुमेध सिंह सैनी के अलावा पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी इंजीनियर निम्रतदीप सिंह, सुरिंदर जीत सिहं, अजय कौशल, परदुमन सिंह और अमित सिंगला का नाम शामिल किया हुआ है।
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इस आरोप में दर्ज हुुआ भ्रष्टाचार का केस
जानकारी के मुताबिक आरोप है कि आरोपी निम्रतदीप सिंह के पिता सुरिंदरजीत सिंह ने अपनी सेक्टर-20 स्थित कोठी की फर्स्ट फ्लोर ढाई लाख रुपये प्रति माह किराए के हिसाब से 11 महीने के लिए सुमेध सिंह सैनी को दी थी। यह इस किराए का एग्रीमेंट 15 अक्तूबर, 2018 में हुआ था। उक्त महीनों का कुल किराया 27.5 लाख रुपये बनता था। लेकिन एग्रीमेंट के चालू होने से पहले ही सैनी ने 40 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी और दो महीने का एडवांस किराया 5 लाख रुपये उन्हें दे दिया था। सुमेध सिंह सैनी की ओर से इस दौरान कुल 45 लाख का भुगतान किया गया था, जो कि 11 महीने के किराए से ज्यादा बनता है। इसके अलावा सैनी ने अगस्त, 2018 से अगस्त, 2020 तक सुरिंदरजीत सिंह के खाते में 6.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जबकि यह भुगतान किराया इकरारनामा (रैंट डीड) के नियमों और शर्तों के मुुताबिक नहीं था। इसके अलावा दो करोड़ रुपये की और ट्रांजेक्शन भी उनके बैंक खाते में हुई है। इसी रकम के भुगतान को आधार बनाकर विजिलेंस की ओर से यह भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया है।