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अपने अधूरे प्रोजेक्टों को भूल, मोहल्ला क्लीनिक बनाने में जुटा सेहत विभाग
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मोहाली। जिले में रहने वाले लोगों को सेहत का ख्याल रखते हुए सेहत विभाग की ओर से घर के पास बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए जगह-जगह मोहल्ला क्लीनिक खोलकर वाहवाही लूटने चला है। लेकिन विभाग मोहल्ला क्लीनिक खोलने में इतना मशगूल हो गया है कि करोड़ों रुपये की लागत से चालू किए अपने प्रोजेक्टों को पूरा करने की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है। आलम यह है कि 15 अगस्त को चालू होने वाले मोहल्ला क्लीनिकों की तैयारियों में तो सेहत विभाग दिनरात लगा हुआ है, लेकिन वर्षों पहले आधा दर्जन से अधिक प्रोजेक्ट का काम अधर में लटका हुआ है।
जानकारी के मुताबिक जिले में लोगों को घरों के पास सेहत से जुड़ी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए विभाग की ओर से अलग-अलग प्रोजेक्ट को लगाने का फैसला लिया गया। इसमें डिस्पेंसरी, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, सिविल अस्पताल से लेकर जच्चा-बच्चा केंद्र शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे प्रोजेक्टों को बनाने की मंजूरी तो पंजाब सरकार से मिल गई, लेकिन जिले में अलग-अलग विभागों के साथ सेहत विभाग का बेहतर तालमेल न होने के वजह से प्रोजेक्ट आजतक पूरे नहीं हो पाए। आलम यह है कि प्रोजेक्टों के काम की शुरूआत हुए को 2 से 3 वर्ष का समय बीत चुका है, परन्तु विभागों के साथ तालमेल न होने की वजह से समय पर फंड जारी न होने से प्रोजेक्ट अधर में पड़े हैं। उधर विभाग के अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है, जिनको इमरजेंसी के समय प्राईवेट हॉस्पिटल ही बेहतर विकल्प नजर आते हैं।
2020 में शुरू हुआ था फेज-3बी2 की डिस्पेंसरी को सीएचसी बनाने का काम
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2020 में फेज-3बी2 में स्थित डिस्पेंसरी को अपग्रेड करके यहां सीएचसी बनाने का फैसला लिया गया था। सेहत विभाग के प्रस्ताव को पंजाब सरकार की मंजूरी के बाद 3बी2 की डिस्पेंसरी को तोड़कर यहां 50 बेड वाला सीएचसी बनाने को लेकर नई बिल्डिंग को लेकर निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके लिए बाकायदा पूर्व सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने अक्तूबर, 2020 में और फिर पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने शिलान्यास करते हुए बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू करवाया। आलम यह है कि 2020 में चालू हुए प्रोजेक्ट का दो बार उद्घाटन होने के बाद बिल्डिंग का काम अधर में पड़ा है। हालांकि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जिला प्रशासन भी लगा हुआ है, लेकिन फंडों की कमी के कारण बिल्डिंग का काम बीच-बीच में बंद करना पड़ा।
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सीएचसी ढकोली को नहीं मिली सिविल अस्पताल की मंजूरी
जानकारी के मुताबिक जीरकपुर और इसके आसपास क्षेत्र में रहने वाले लोगों की बढ़ती आबादी को देखते हुए ढकोली कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) को अपग्रेड करते हुए 50 बेड वाला सिविल अस्पताल बनाने का फैसला हुआ। इसके लिए बाकायदा पूर्व सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने जनवरी 2021 में ढकोली पहुंचकर सीएचसी को सिविल अस्पताल बनाने का ऐलान करते हुए विशेष कार्यक्रम तक का आयोजन किया गया। दूसरी ओर, 2021 में सीएचसी ढकोली को सिविल अस्पताल बनाने का ऐलान तो विभाग द्वारा करवा दिया गया, लेकिन विडंबना यह है कि विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को पंजाब सरकार से मंजूरी नहीं मिली। जबकि अधिकारियों की कारगुजारी का आलम यह है कि उक्त प्रोजेक्ट की फाइल को मंजूरी न मिलने का कारण जानने के लिए पत्र तक नहीं लिखा गया।
10 करोड़ की लागत से बनेगा जच्चा-बच्चा केंद्र
जानकारी के मुताबिक सेहत विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं से जुड़ी बीमारियों को लेकर डेराबस्सी सिविल अस्पताल में जच्चा-बच्चा केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है। जबकि जच्चा-बच्चा केंद्र को लेकर प्रस्ताव पर पंजाब सरकार से मंजूरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का फंड तक जारी हो गया। दूसरी ओर, डेराबस्सी सिविल अस्पताल प्रशासन को वर्षों बीत जाने के बाद उपयुक्त जगह नहीं मिली और आलम यह है कि जगह न मिलने के कारण प्रोजेक्ट अभी तक फाइलों में धूल फांक रहा है। सेहत विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी का खामियाजा वो महिलाएं भुगत रही हैं, जो गर्भवती होने के दौरान इलाज के लिए डेराबस्सी से मोहाली आकर जच्चा-बच्चा केंद्र में जाकर इलाज करवाने के लिए मजबूर हैं।
फोटो :
फोटो 27 जुलाई को कर्मचन्द द्वारा भेजी गई।
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जानकारी के मुताबिक जिले में लोगों को घरों के पास सेहत से जुड़ी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए विभाग की ओर से अलग-अलग प्रोजेक्ट को लगाने का फैसला लिया गया। इसमें डिस्पेंसरी, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, सिविल अस्पताल से लेकर जच्चा-बच्चा केंद्र शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे प्रोजेक्टों को बनाने की मंजूरी तो पंजाब सरकार से मिल गई, लेकिन जिले में अलग-अलग विभागों के साथ सेहत विभाग का बेहतर तालमेल न होने के वजह से प्रोजेक्ट आजतक पूरे नहीं हो पाए। आलम यह है कि प्रोजेक्टों के काम की शुरूआत हुए को 2 से 3 वर्ष का समय बीत चुका है, परन्तु विभागों के साथ तालमेल न होने की वजह से समय पर फंड जारी न होने से प्रोजेक्ट अधर में पड़े हैं। उधर विभाग के अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है, जिनको इमरजेंसी के समय प्राईवेट हॉस्पिटल ही बेहतर विकल्प नजर आते हैं।
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2020 में शुरू हुआ था फेज-3बी2 की डिस्पेंसरी को सीएचसी बनाने का काम
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2020 में फेज-3बी2 में स्थित डिस्पेंसरी को अपग्रेड करके यहां सीएचसी बनाने का फैसला लिया गया था। सेहत विभाग के प्रस्ताव को पंजाब सरकार की मंजूरी के बाद 3बी2 की डिस्पेंसरी को तोड़कर यहां 50 बेड वाला सीएचसी बनाने को लेकर नई बिल्डिंग को लेकर निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके लिए बाकायदा पूर्व सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने अक्तूबर, 2020 में और फिर पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने शिलान्यास करते हुए बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू करवाया। आलम यह है कि 2020 में चालू हुए प्रोजेक्ट का दो बार उद्घाटन होने के बाद बिल्डिंग का काम अधर में पड़ा है। हालांकि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जिला प्रशासन भी लगा हुआ है, लेकिन फंडों की कमी के कारण बिल्डिंग का काम बीच-बीच में बंद करना पड़ा।
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सीएचसी ढकोली को नहीं मिली सिविल अस्पताल की मंजूरी
जानकारी के मुताबिक जीरकपुर और इसके आसपास क्षेत्र में रहने वाले लोगों की बढ़ती आबादी को देखते हुए ढकोली कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) को अपग्रेड करते हुए 50 बेड वाला सिविल अस्पताल बनाने का फैसला हुआ। इसके लिए बाकायदा पूर्व सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने जनवरी 2021 में ढकोली पहुंचकर सीएचसी को सिविल अस्पताल बनाने का ऐलान करते हुए विशेष कार्यक्रम तक का आयोजन किया गया। दूसरी ओर, 2021 में सीएचसी ढकोली को सिविल अस्पताल बनाने का ऐलान तो विभाग द्वारा करवा दिया गया, लेकिन विडंबना यह है कि विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को पंजाब सरकार से मंजूरी नहीं मिली। जबकि अधिकारियों की कारगुजारी का आलम यह है कि उक्त प्रोजेक्ट की फाइल को मंजूरी न मिलने का कारण जानने के लिए पत्र तक नहीं लिखा गया।
10 करोड़ की लागत से बनेगा जच्चा-बच्चा केंद्र
जानकारी के मुताबिक सेहत विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं से जुड़ी बीमारियों को लेकर डेराबस्सी सिविल अस्पताल में जच्चा-बच्चा केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है। जबकि जच्चा-बच्चा केंद्र को लेकर प्रस्ताव पर पंजाब सरकार से मंजूरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का फंड तक जारी हो गया। दूसरी ओर, डेराबस्सी सिविल अस्पताल प्रशासन को वर्षों बीत जाने के बाद उपयुक्त जगह नहीं मिली और आलम यह है कि जगह न मिलने के कारण प्रोजेक्ट अभी तक फाइलों में धूल फांक रहा है। सेहत विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी का खामियाजा वो महिलाएं भुगत रही हैं, जो गर्भवती होने के दौरान इलाज के लिए डेराबस्सी से मोहाली आकर जच्चा-बच्चा केंद्र में जाकर इलाज करवाने के लिए मजबूर हैं।
फोटो :
फोटो 27 जुलाई को कर्मचन्द द्वारा भेजी गई।