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स्व-रोजगार अपनाकर पांच हजार ग्रामीण महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

Fri, 29 Jan 2021 01:59 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:59 AM IST
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Five thousand rural women become self-sufficient by adopting self-employment
मोहाली। जिले की पांच हजार ग्रामीण महिलाओं ने स्व-रोजगार से अपने परिवार की आजीविका को बेहतर बनाया है। इसके लिए इन महिलाओं की मदद की है स्व-सहायता समूहों यानि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स ने। जो केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे पंजाब राज देहाती आजीविका मिशन का हिस्सा हैं। कहीं यह महिलाएं जूट के बैग बना रहीं हैं, कहीं पर ब्यूटी पार्लर चला रही हैं और कहीं पर आचार, मुरब्बा और पापड़ बनाकर अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजूबत बनाने में जुटी हैं।
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पंजाब राज देहाती आजीविका मिशन के तहत बनाए स्व-सहायता समूहों पर बात करते हुए डीसी गिरीश दियालन ने बताया कि जिले में 360 स्व-सहायता समूह और 17 ग्राम संगठन काम कर रहे हैं। हर स्व-सहायता समूह में 10 से 15 महिला सदस्य हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण गरीब बेरोजगार महिलाओं को स्व-रोजगार उपलब्ध करवाकर आत्मनिर्भर बनाना है। इन्हीं समूहों के जरिये पांच हजार से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं ने स्व-रोजगार हासिल किया है।
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स्व-सहायता समूहों की कार्यप्रणाली के बारे में डीसी गिरीश दियालन ने बताया कि हर समूह के बैंक खाते खुलवाए जाते हैैं। जिसमें समूह की सदस्य महिलाएं अपनी बचत को जमा करती हैं। तीन महीने तक की गई बचत जमा होने के बाद योजना के तहत हर समूह को सरकार की ओर से 15 हजार रुपये का रिवाल्विंग फंड जारी किया जाता है। एक गांव में जब पांच समूह तैयार हो जाते हैं तो उस गांव में एक ग्राम संगठन बना दिया जाता है। ग्राम संगठन बनने के बाद सरकार हर 6 महीने में 50 हजार तक का कम्यूनिटी इन्वेस्टमेंट फंड जारी करती हैं। जिसका मकसद समूह की महिला सदस्यों को रोजगार शुरू करने या उसे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है। समूह की महिला सदस्यों को स्व-रोजगार शुरू करने के लिए बैंक से 7 प्रतिशत की दर पर कैश क्रेडिट लिमिट यानि सीसीएल की सुविधा भी दी जाती है।
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डीसी ने बताया कि जिले के 121 स्व-सहायता समूहों को रिवाल्विंग फंड और 17 समूहों को सीसीएल सुविधा उपलब्ध करवाई है। समूहों की सदस्य महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए कई संस्थानों से ट्रेनिंग भी दिलवाई गई है। जिसकेे बाद महिलाएं जूट के बैग, आचार, मुरब्बे, पापड़ तो बना ही रही हैं, साथ में ब्यूटी पार्लर और सिलाई कढ़ाई की सिखलाई लेकर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।
डीसी ने बताया कि खरड़ के गांव गीगो माजरा का सेवा भलाई आजीविका स्व-सहायता समूह, गांव दाऊं का एकता स्व-सहायता समूह, गांव पीर सोहाणा के फतेह सिंह स्व-सहायता समूह के अलावा माजरी ब्लॉक के गांव लखनौर का नई सोच स्व-सहायता समूह और गांव माजरी का प्रथम स्व-सहायता समूह सफतापूर्वक काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डेराबस्सी के गांव अमलाला का फतेह स्व-सहायता समूह हाथ से बने ऊनी कपड़े तैयार कर रहा है, ब्यूटी पार्लर चला रहा है और आचार-मुरब्बे भी तैयार कर रहा है। इन समूहों ने कोरोना काल के दौरान 20 हजार मास्क तैयार कर अलग-अलग विभागों को दिए।

घर में ही शुरू की करियाने की दुकान
परमजीत कौर गांव अमलाला में रहती हैं। आर्थिक तंगी ऐसी कि गुजारा भी मुश्किल से होता था। अब परमजीत करियाने की दुकान चला रही हैं। दुकान से होने वाली आमदनी से आर्थिक सहारा मिला तो परिवार का गुजर बसर ठीक से हो पा रहा है। परमजीत कौर बताती हैं कि जब से स्व-सहायता समूह बनने शुरू हुए तो उनमें झिझक थी। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण वह बचत के पैसे नहीं दे सकती थीं। योजना से जुड़ी टीम और अन्य महिला सदस्यों ने उसे प्रोत्साहित किया तो वह समूह से जुड़ीं। वह बताती हैं कि उन्होंने ग्राम संगठन से पांच हजार रुपये का कर्ज लेकर घर में ही किरयाने की छोटी सी दुकान शुरू की है।
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