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पहले कोरोना काल और अब डॉक्टरों की हड़ताल ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का विरोध
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पहले कोरोना काल और अब डॉक्टरों की हड़ताल ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
क्रासर - छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में डॉक्टर चल रहे हड़ताल पर
खास बात
रोजाना लोग अस्पतालों में पहुंचकर लौट रहे निराश होकर, अब हड़ताल 17 तक बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाल। फेज-6 जिला सिविल अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर चल रहे हैं। जिससे रोजाना सैकड़ों लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। क्योंकि अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी वाले मरीजों की जांच की जा रही है। जबकि अन्य बीमारियों का इलाज करवाने आए मरीजों को वापस घरों को लौटना पड़ रहा है। दूसरी तरफ हड़ताल पर चल रहे डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल 17 जुलाई तक बढ़ा दी है। ऐसे में साफ है कि अब लोगों को सोमवार से ही बढ़िया सेहत सुविधाएं मिल पाएंगी।
जानकारी के मुताबिक छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से डॉक्टर आहत हैं, क्योंकि उनकी तनख्वाह में इससे ज्यादा इजाफा नहीं हो रहा है। जिसके चलते डॉक्टर हड़ताल की राह पर आ गए हैं। डॉक्टरों द्वारा अब मरीजों को उनकी पुरानी पर्चियों पर ही दवाईयां लिखकर दी जा रही हैं। डॉक्टरों की मानें तो वे मरीजों के लिए चौबीसों घंटे अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, लेकिन सरकार का रवैया हमारे प्रति ठीक नहीं है। फेज-6 सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर विक्रम जसवाल ने बताया कि ज्वाइंट कमेटी की और से दी गई कॉल का हम सभी डॉक्टर समर्थन कर रहे हैं। पिछले चार दिनों से हड़ताल जारी है ऐसे में खुद मैं जिस विभाग में काम कर रहा हूं, वहां मरीजों को लगातार आना जाना रहता है। रोजाना होने वाले ब्लड टेस्ट हर मरीज के लिए प्राथमिक इलाज है। वहीं जहां दिन के 1000 से 1200 मरीज आ जाया करते थे, अब सिर्फ 250 से 300 मरीज ही आ रहे हैं। उनमें भी अधिकतर तो गर्भवती महिलाएं ही हैं। जिनके इलाज में ब्लड टेस्ट बहुत जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह बड़े अस्पतालों की रोजाना की ओपीडी को देखते हुए जल्द फैसला लें। हमारा विरोध मरीजों से नहीं है सरकार की नीति से है जिससे जल्द सुलझाया जाना चाहिए।
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क्रासर - छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में डॉक्टर चल रहे हड़ताल पर
खास बात
रोजाना लोग अस्पतालों में पहुंचकर लौट रहे निराश होकर, अब हड़ताल 17 तक बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाल। फेज-6 जिला सिविल अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर चल रहे हैं। जिससे रोजाना सैकड़ों लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। क्योंकि अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी वाले मरीजों की जांच की जा रही है। जबकि अन्य बीमारियों का इलाज करवाने आए मरीजों को वापस घरों को लौटना पड़ रहा है। दूसरी तरफ हड़ताल पर चल रहे डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल 17 जुलाई तक बढ़ा दी है। ऐसे में साफ है कि अब लोगों को सोमवार से ही बढ़िया सेहत सुविधाएं मिल पाएंगी।
जानकारी के मुताबिक छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से डॉक्टर आहत हैं, क्योंकि उनकी तनख्वाह में इससे ज्यादा इजाफा नहीं हो रहा है। जिसके चलते डॉक्टर हड़ताल की राह पर आ गए हैं। डॉक्टरों द्वारा अब मरीजों को उनकी पुरानी पर्चियों पर ही दवाईयां लिखकर दी जा रही हैं। डॉक्टरों की मानें तो वे मरीजों के लिए चौबीसों घंटे अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, लेकिन सरकार का रवैया हमारे प्रति ठीक नहीं है। फेज-6 सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर विक्रम जसवाल ने बताया कि ज्वाइंट कमेटी की और से दी गई कॉल का हम सभी डॉक्टर समर्थन कर रहे हैं। पिछले चार दिनों से हड़ताल जारी है ऐसे में खुद मैं जिस विभाग में काम कर रहा हूं, वहां मरीजों को लगातार आना जाना रहता है। रोजाना होने वाले ब्लड टेस्ट हर मरीज के लिए प्राथमिक इलाज है। वहीं जहां दिन के 1000 से 1200 मरीज आ जाया करते थे, अब सिर्फ 250 से 300 मरीज ही आ रहे हैं। उनमें भी अधिकतर तो गर्भवती महिलाएं ही हैं। जिनके इलाज में ब्लड टेस्ट बहुत जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह बड़े अस्पतालों की रोजाना की ओपीडी को देखते हुए जल्द फैसला लें। हमारा विरोध मरीजों से नहीं है सरकार की नीति से है जिससे जल्द सुलझाया जाना चाहिए।
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