{"_id":"5eee711b8ebc3e42d6430caa","slug":"father-showed-the-cemetery-of-pakistani-patton-tanks-only-then-he-decided-to-enter-the-army-mohali-news-pkl3788198124","type":"story","status":"publish","title_hn":"फादर्स डे: पिता ने दिखाई पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह, तभी किया था सेना में जाने का निश्चय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फादर्स डे: पिता ने दिखाई पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह, तभी किया था सेना में जाने का निश्चय
Sun, 21 Jun 2020 01:57 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2020 01:57 AM IST
विज्ञापन
कर्नल करतार सिंह ग्रेवाल, मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल
पिता विरासत है जज्बे की, हौसले की, स्वाभिमान की। पिता अपनी हर संतान के लिए प्रेरणा स्रोत है। 13 साल की उम्र में पिता ने जब वो युद्ध का मैदान दिखाया, जहां पाकिस्तान के 100 पैटन टैंकों की कब्रगाह भारतीय शेरों ने बनाई थी, तभी से यह तय कर लिया था कि अपने पिता की तरह ही भारतीय सेना ज्वाइन कर मातृभूमि की सेवा करनी है।
विज्ञापन
यह जानकारी देते हुए अपने पिता को रोल मॉडल मानने वाले मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल ने बताया कि वह अपने पिता कर्नल करतार सिंह ग्रेवाल के जज्बे और उनकी प्रेरणा से ही भारतीय सेना में उच्च पद तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद करतार सिंह ग्रेवाल ने भारतीय सेना की हॉडसन्स हार्स रेजिमेंट में कमीशन हासिल किया और 1974 में कर्नल रैंक से रिटायर हुए। उनके तीनों भाई भी आजादी के बाद भारतीय सेना में अधिकारी के पदों पर रहे। पिता की प्ररेणा से कर्नल करतार सिंह ग्रेवाल के पुत्र बीएस ग्रेवाल ने 1971 में अपने पिता की रेजिमेंट में कमीशन हासिल किया।
विज्ञापन
मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल 2010 में भारतीय सेना से रिटायर हुए। अभी भी वह पंजाब के युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए तैयार कर देश की सेवा कर रहे हैं। रिटायर होने के बाद से मोहाली के आर्म्ड फोर्सेस प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट में बतौर डायरेक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल को गर्व है इस बात का कि जिस रेजिमेंट में उनके पिता कमांडिग ऑफिसर रहे हैं उन्होंने उसी रेजिमेंट को कंमाड किया।
विज्ञापन
फादर्स-डे पर मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल 1965 में हुई भारत-पाकिस्तान की जंग को याद करते हैं। जिसमें उनके पिता ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी उम्र करीब 13 साल थी। यह किस्सा सुनाते हुए मेजर जनरल गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि लड़ाई खत्म होने के बाद उनके पिता उन्हें खेमकरण के पास उस बैटल फील्ड पर लेकर गए जहां पाकिस्तान ने हमला किया था।
भारतीय सेना ने यहां पाकिस्तान के 100 पैटन टैंकों का शमशान बनाकर, दुश्मन के घुटने तोड़ दिए थे। उस जगह को देखकर और अपने पिता से भारतीय सैनिकों की बहादुरी सुनकर उन्होंने सेना में शामिल होने का निश्चय कर लिया था। उनके पिता की भी यही इच्छा थी।
उनके पिता हमेशा मातृभूमि की रक्षा की प्रेरणा देते थे। मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल बताते हैं कि उनके भाई भी सैन्य अधिकारी रिटायर हुए हैं। उनकी दो बहनों की शादी सैन्य अधिकारियों के साथ हुई है। इतना ही नहीं उनकी बहन का एक बेटा आज अपने नाना और मामा की रेजिमेंट में कमांड कर रहा है।