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Mohali News: धान की नमी सीमा पर किसान नाराज, बीकेयू ने सौंपीं मांगें
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मोहाली।
पंजाब में धान सीजन शुरू होते ही किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे पत्र में चेतावनी दी है कि अगर किसानों की अनदेखी हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
धान की फसल पर बाढ़ और रोगों का असर पड़ा है। पीआर-131 और पीआर-132 किस्मों में झाड़ घट गया, जिससे किसान आर्थिक संकट में हैं। इसके अलावा, खरीदी नीति में नमी की सीमा घटाकर 17 प्रतिशत करने का फैसला किसानों को भारी पड़ा। उनकी मांग है कि इसे 22 प्रतिशत किया जाए।
किसानों ने पराली को खेत में मिलाने पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने और ठेकेदारों को अपने क्षेत्र तक सीमित रखने की मांग की है। साथ ही, डीएपी खाद की उपलब्धता को सुचारू बनाने की अपील की गई है।
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यूनियन ने हालिया बाढ़ में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, तटबंध मजबूत करने और भारतमाला प्रोजेक्ट प्रभावित किसानों के मुद्दों का समाधान करने की भी मांग की। संघर्ष की चेतावनी देते हुए संगठन ने कहा कि अगर सरकार ने खेती बचाने और किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। पंजाब में खेती आत्महत्याओं की ओर बढ़ रही है और इसके लिए तुरंत फैसले लेने की आवश्यकता है।
मुख्य मांगें: धान नमी सीमा 22%, पराली बोनस 200 रुपये/क्विंटल, ठेकेदार क्षेत्रीय सीमित, खाद की उपलब्धता, बाढ़ प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा।
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पंजाब में धान सीजन शुरू होते ही किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे पत्र में चेतावनी दी है कि अगर किसानों की अनदेखी हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
धान की फसल पर बाढ़ और रोगों का असर पड़ा है। पीआर-131 और पीआर-132 किस्मों में झाड़ घट गया, जिससे किसान आर्थिक संकट में हैं। इसके अलावा, खरीदी नीति में नमी की सीमा घटाकर 17 प्रतिशत करने का फैसला किसानों को भारी पड़ा। उनकी मांग है कि इसे 22 प्रतिशत किया जाए।
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किसानों ने पराली को खेत में मिलाने पर 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने और ठेकेदारों को अपने क्षेत्र तक सीमित रखने की मांग की है। साथ ही, डीएपी खाद की उपलब्धता को सुचारू बनाने की अपील की गई है।
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यूनियन ने हालिया बाढ़ में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने, तटबंध मजबूत करने और भारतमाला प्रोजेक्ट प्रभावित किसानों के मुद्दों का समाधान करने की भी मांग की। संघर्ष की चेतावनी देते हुए संगठन ने कहा कि अगर सरकार ने खेती बचाने और किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। पंजाब में खेती आत्महत्याओं की ओर बढ़ रही है और इसके लिए तुरंत फैसले लेने की आवश्यकता है।
मुख्य मांगें: धान नमी सीमा 22%, पराली बोनस 200 रुपये/क्विंटल, ठेकेदार क्षेत्रीय सीमित, खाद की उपलब्धता, बाढ़ प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा।