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डॉ. अमरजीत ने की 2.8 एमएम के मोतियाबिंद की मैनुअल सर्जरी

Wed, 18 Dec 2019 01:45 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2019 01:45 AM IST
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Dr. Amarjeet did manual surgery of 2.8 mm cataract
मोहाली। मोतियाबिंद भारत में अंधेपन की बड़ी वजह है। हर साल देश में 40 प्रतिशत लोग मोतियाबिंद के कारण अंधेपन का शिकार हो जाते हैं। अब इस ऑपरेशन को मोहाली के रहने वाले डॉ. अमरजीत सिंह पथेवाली ने अपने स्किल के बूते न सिर्फ 10 गुना सस्ता किया, बल्कि इस मैनुअल प्रोसेस को मशीनी तकनीक के करीब पहुंचा दिया। उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड के लिए आवेदन भेजा है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। अब कुछ औपचारिकताओं के बाद डॉ. अमरजीत सिंह के नाम सबसे छोटे मोतियाबिंद 2.8 एमएम की मैनुअल कैटरेक्ट सर्जरी का रिकार्ड दर्ज हो जाएगा।
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यूं तो आम तौर पर सफेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन फेको तकनीक से किया जाता है। फेको मशीन से न्यूनतम 2.8 एमएम तक के मोतियाबिंद की सर्जरी होती है। हालांकि नई आधुनिक फेको तकनीक से मोतियाबिंद के 1.9 एमएम तक के न्यूनतम साइज की सर्जरी होने लगी है लेकिन यह तकनीक काफी महंगी है। एक सामान्य फेको मशीन की कीमत करीब 30 लाख से शुरू होती है। हर साल सॉफ्टवेयर अपडेट करने में करीब 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इसका असर इलाज के खर्च पर पड़ता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन का खर्च सामान्य तौर पर तकरीबन 30 हजार रुपये के आसपास आता है लेकिन मोहाली के फेज 3बी1 में रहने वाले डॉ. अमरजीत सिंह पथेवाली ने अपनी स्किल के बूते इसे मात्र तीन हजार रुपये पर पहुंचा दिया है।
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फतेहगढ़ साहिब के गांव अत्तेवाली की राज कौर व सरहिंद निवासी माया देवी के 2.8 एमएम की मैनुअल कैटरेक्ट सर्जरी कर डॉ. अमरजीत सिंह माइक्रो लेवल पर मैनुअल सर्जरी करने वाले पहले आई स्पेशलिस्ट बन गए हैं। उनका दावा है कि इस माइक्रो साइज पर दुनिया में किसी आई स्पेशलिस्ट ने मोतियाबिंद की मैनुअल सर्जरी नहीं की है।
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भारत में ही ईजाद हुई थी मैन्यूअल तकनीक
फेको तकनीक से मोतियाबिंद के होने वाले महंगे इलाज से निजात दिलाने के लिए भारत में ही मैनुअल कैटरेक्ट सर्जरी ईजाद की गई थी। 1980 के दौरान दक्षिण भारत में एक अस्पताल की शृंखला में इस सर्जरी की शुरुआत हुई थी। इसे धीरे-धीरे दुनिया भर में अपना लिया गया। आम तौर पर मैनुअल कैटरेक्ट सर्जरी से 4 एमएम तक के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है पर अब डॉ. अमरजीत ने 2.8 एमएम के मोतियाबिंद की मैनुअल सर्जरी की।
रिकार्ड लेवल पर माइक्रो सर्जरी के लिए खुद मॉडिफाई किए इंस्ट्रूमेंट
1997 से सरहिंद में प्रैक्टिस कर रहे आई स्पेशलिस्ट डॉ. अमरजीत सिंह ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देने के लिए डॉ. अमरजीत सिंह ने मैनुअल कैटरेक्ट सर्जरी करनी शुरू की। पहली सर्जरी 6 एमएम के मोतियाबिंद की। यह सर्जरी स्किल बेस्ड है। माइक्रो लेवल पर सर्जरी के लिए स्किल डेवलप करने में 20 साल लग गए। माइक्रो लेवल पर सर्जरी के लिए डॉ. अमरजीत सिंह ने सर्जरी के इंस्ट्रूमेंट्स को खुद ही मॉडीफाई भी किया। इस मैनुअल प्रोसेस का रिस्क लेवल 1 प्रतिशत से भी कम है, जो फेको तकनीक के बराबर है।

कोलकाता में हुई वर्ल्ड कांफ्रेंस में दी प्रेजेंटेशन, मिला अवार्ड
कोलकाता में 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक वर्ल्ड मैनुअल स्मॉल इनसीजन कैटरेक्ट सर्जरी कांफ्रेंस हुई थी। इसमें दुनिया भर के 4 हजार से ज्यादा आई स्पेशलिस्ट ने हिस्सा लिया। इस कांफ्रेस में मोहाली के डॉ. अमरजीत सिंह ने स्मॉल सर्जरी पर प्रेजेंटेशन दी। यहां उन्होंने 2.8 एमएम मोतियाबिंद के ऑपरेशन की डिटेल दुनिया के सामने रखी। उनकी इस उपलब्धि पर सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर देकर उन्हें सम्मानित किया गया।
फोटो सहित 405 या 406
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