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चीन पर निर्भरता से बढ़ा साइबर सुरक्षा को खतरा

Thu, 22 Oct 2020 01:39 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 01:39 AM IST
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Cyber security threat increased due to dependence on China
मोहाली। भारत-चीन सीमा पर जारी विवाद के बीच दोनों देशों के संबंधों के भविष्य पर वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने अपने विचार रखे। इसमें जहां चीन पर निर्भरता के कारण देश की साइबर सुरक्षा पर मंडराते खतरे पर चर्चा हुई, तो वहीं दोनों देशों की अर्थव्यवस्था व व्यापारिक संबंधों को भी उठाया गया। वर्चुअल मीट में सभी विशेषज्ञों का मानना था कि चीन को उसी की भाषा में जवाब दिए जाने की जरूरत है।
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बुधवार को भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर एक वर्चुअल मीट का आयोजन किया गया। इसमें रिटायर्ड ले. जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा, ले. जनरल प्रवीण बक्शी, एडमिरल सुनील लांबा, राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ भरत कर्नाड व खनन एवं भूविज्ञान विभाग के सचिव राहुल भंडारी ने हिस्सा लिया। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूआं में आयोजित इस वर्चुअल मीट में ले.ज. दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सीमा विवादों से परे भारत-चीन के बीच लंबे समय से आर्थिक, सामाजिक और व्यापारिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण देश की साइबर सुरक्षा पर खतरा है। चीन को लेकर दीर्घकालिक नीति तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को वर्तमान स्थिति को सुधारने के लिए सीमा से सैनिकों को वापस लेना चाहिए।
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खनन एवं भूविज्ञान सचिव राहुल भंडारी ने कहा कि चीन पर निर्भरता खत्म करने में कम से कम 10 साल लगेंगे। उन्होंने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक व उत्पादक देश है। भारत भी एक उभरती हुई शक्ति है, मगर हमें अपनी कमजोरियां याद रखनी होंगी।
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राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ भरत कर्नाड ने कहा कि चीन हमेशा से ही परिवर्तनवादी प्रवृति का रहा है, जबकि इसके विपरीत भारत आदर्श व नैतिकता को तवज्जो देते हुए अपनी विदेश नीतियों को निर्धारित करता है। भारत को भी चीन के प्रति उसी नजरिये को अपनाने की जरूरत है, जिससे चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए।
सेवानिवृत्त एडमिरल सुनील लांबा ने समुद्री क्षेत्र के बारे में बात करते हुए कहा कि इंडियन ओशन रोड वह समुद्री रास्ता है जो पश्चिम और पूर्व को एक-दूसरे से जोड़ता है। समुद्री इलाकों और अन्य राज्यों में चीन के साथ तनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक फैसले लिए जाने चाहिए।

डोकलाम मुद्दे पर रिटायर्ड ले. ज. प्रवीण बक्शी ने कहा कि चीन अपनी फ़ोर्स का प्रयोग करते हुए अपने राजनीतिक और राजनयिक उद्देश्यों को पूरा करने में लगा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सहजता से सुलझाने की जरूरत है। भारतीय सेना इस तनाव को कम करने का प्रयास कर रही है।
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